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मारुति: महंगा मूल्यांकन टिकाऊ नहीं!

राम प्रसाद साहू /  November 03, 2019

वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बिक्री वृद्घि, बाजार भागीदारी में सुधार और बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को लेकर प्रतिस्पर्धी बढ़त की वजह से मारुति सुजूकी का शेयर पिछले तीन महीनों में 35 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है। कॉरपोरेट कर कटौती से इस शेयर की धारणा को मजबूती मिली है। अगस्त से कीमत तेजी को देखते हुए शेयर अपने वित्त वर्ष 2020 की प्रति शेयर आय के 44 गुना और एक वर्ष आगे के अनुमानों की तुलना में 31 गुना पर कारोबार कर रहा है। 

मौजूदा मूल्यांकन पिछले 14 वर्षों में सर्वाधिक स्तर पर हैं। आयशर को छोड़कर, वाहन क्षेत्र में इसके ज्यादातर प्रतिस्पर्धी 14-17 गुना के दायरे में अपने मूल्यांकन के मुकाबले भारी गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं। मूल्यांकन उन कारणों में से एक है जिनसे यह शेयर अक्टूबर बिक्री वृद्घि के आंकड़े के मुकाबले ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दिखा पाया है। बिक्री वृद्घि सालाना आधार पर 4.5 प्रतिशत पर रही है जो अनुमानों की तुलना में बेहतर है। रिलायंस सिक्योरिटीज के मितुल शाह का कहना है, 'त्योहारी बिक्री और ऊंचे डिस्काउंट से मारुति की बिक्री को बढ़ावा मिला है।' जहां बिक्री बढ़ी है, वहीं विश्लेषकों का कहना है कि दो अवधि तुलनायोग्य नहीं हैं क्योंकि पिछले साल त्योहारी सीजन अक्टूबर और नवंबर में विभाजित था, वहीं इस साल यह पूरी तरह अक्टूबर पर केंद्रित रहा। मारुति के प्रबंधन ने संकेत दिया है कि त्योहारी अवधि में खुदरा बिक्री में कुछ सुधार दिखे हैं। हालांकि उनका कहना है कि त्योहारी मांग के अभाव में मजबूती के रुझान पर कम स्पष्टता है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषक भी इसे लेकर आशंकित हैं। विश्लेषकों का कहना है, 'हमने त्योहारी सीजन के दौरान यह महसूस किया है कि ऊंचा डिस्काउंट (सितंबर तिमाही में प्रति वाहन 25,800 रुपये) भी उपभोक्ता खरीदारी बढ़ाने में विफल रहा है। इससे संभवत: मांग सुधार में सुस्ती का संकेत मिलता है। आश्चर्यजनक बात यह है कि मूल्यांकन अनिश्चित बना हुआ है। लगातार पांच तिमाहियों में बिक्री गिरावट को देखते हुए कंपनी ने बिक्री सुधारने के लिए भारी छूट पर ध्यान दिया।'

अन्य चिंता बाजार भागीदारी में नुकसान को लेकर है। मारुति की बाजार भागीदारी दूसरी तिमाही में तिमाही आधार पर 120 आधार अंक घटकर 49.8 प्रतिशत रह गई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि यह मुख्य रूप से यूटिलिटी वाहन (यूवी) सेगमेंट की भागीदारी में गिरावट की वजह से है। डीजल पोर्टफोलियो को अलग किए जाने की वजह से यूवी सेगमेंट की भागीदारी 26.3 प्रतिशत से घटकर 25.7 प्रतिशत रह गई। कंपनी अपनी डीजल पेशकशों को फिलहाल बीएस-6 मानकों से नहीं जोड़ेगी। उपभोक्ताओं के रुझान में इस तरह के बदलाव से मारुति पर दबाव पड़ सकता है।

निर्मल बांग इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का मानना है कि उपभोक्ता पसंद यूटिलिटी वाहनों की ओर केंद्रित हो रही है। यात्री वाहन खंड में पेश किए जाने वाले प्रत्येक 13 नए वाहनों में से 10 यूवी में हैं। ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषकों का कहना है कि चूंकि मारुति का कार सेगमेंट में दबदबा है जिसमें यूवी के मुकाबले तेजी से गिरावट आ रही है, लेकिन उसे बाजार भागीदारी पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। बाजार भागीदारी में नुकसान का यह रुझान बरकरार रहने की आशंका है क्योंकि यूवी सेगमेंट में प्रतिस्पर्धियों द्वारा कई और मॉडल पेश किए जाने हैं। हालांकि मारुति के लिए कुछ सकारात्मक बदलाव भी हैं। बिक्री में 30 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद कंपनी की राजस्व गिरावट ऊंची प्राप्तियों की वजह से सीमित रही। कंपनी सुरक्षा उपकरण और बीएस-6 संबंधी लागत को ध्यान में रखते हुए अपने वाहनों की औसत बिक्री कीमत दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 7 प्रतिशत तक बढ़ाने में सफल रही। उसकी नई पेशकशों (एस-प्रेसो और एक्सएल 6) को भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, जो एंट्री-लेवल और अन्य सेगमेंट में बिक्री में गिरावट को देखते हुए महत्वपूर्ण है। जिंस कीमतों में गिरावट गिरती बिक्री की वजह से मार्जिन दबाव को देखते हुए अन्य सकारात्मक बदलाव है। तिमाही में मार्जिन सालाना आधार पर 500 आधार अंक गिरकर 9.5 प्रतिशत पर रह गया। जहां कम जिंस लागत अनुकूल है, वहीं मार्जिन पर सबसे ज्यादा दबाव कमजोर परिचालन दक्षता से पड़ा है। इसलिए, यदि बिक्री में वृद्घि नहीं होती है तो पिछली तिमाही के दौरान अपने कई प्रतिस्पर्धियों को मात दे चुके इस शेयर को अपनी बढ़त बनाए रखने में चुनौती का सामना करना पड़ेगा। 

Keyword: Automobile, Car, Policy, Vehicle, Technology, BS-6, Valuation, Maruti Suzuki,
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