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कैटिगरी-1 में हैं 80 फीसदी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई November 03, 2019

करीब 80 फीसदी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को कैटिगरी-1 के तौर पर वर्गीकृत किया गया है, जो आने वाले समय में इन निवेशकों के लिए ज्यादा उदार व्यवस्था का संकेत दे रहा है।

इसका मतलब आसान पहुंच, सरलीकृत नो योर क्लाइंट (केवाईसी) और दस्तावेजी जरूरत के अलावा ज्यादातर एफपीआई के लिए निवेश पर काफी कम पाबंदी हो सकती है, खास तौर से व्यापक आधार वाले फंडों आदि, जिन्हें पहले कैटिगरी-2 में रखा गया था। पुनर्वर्गीकरण से पहले तीन फीसदी से कम एफपीआई ही कैटिगरी-1 में शामिल थे और 80 फीसदी से ज्यादा कैटिगरी-2 का हिस्सा थे। फंडों का करीब 13 फीसदी कैटिगरी-3 के तौर पर वर्गीकृत किया गया था।

कैटिगरी-2 में शामिल एफपीआई ऑफशोर डेरिवेटिव न तो सबस्क्राइब कर पाएंगे और न ही इसे जारी कर पाएंगे। कैटिगरी-1 में अनुपालन का बोझ भी ज्यादा होगा। पाइवॉट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी के संस्थापक व सीईओ विराज कुलकर्णी ने कहा, लगता है कि नियामक ने एफपीआई की व्यवस्था को अच्छा खासा उधार बना दिया है और एचआर खान कमेटी की सिफारिशों के बाद ज्यादातर फंडों के लिए केवाईसी व दस्तावेजी जरूरत आसान बनाया गया है। कैटिगरी-3 एफपीआई को अनुपालन का लाभ मिलता है और वे कैटिगरी-1 में जा सकते हैं।

उनके मुताबिक, कैटिगरी-2 और कैटिगरी-3 फंडों ने पहले अनुपालन में काफी चुनौतियों का सामना किया है, जिससे भारत में उनकी लागत काफी ज्यादा बढ़ गई थी। उदाहरण के लिए केवाईसी की समीक्षा कैटिगरी-2 व कैटिगरी-3 के एफपीआई (उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के) के लिए सालाना होनी थी। दूसरों के लिए केवाईसी की समीक्षा एफपीआई पंजीकरण के विस्तार के समय होना था। कैटिगरी-3 वाले एफपीआई को अनिवार्य रूप से वित्तीय आंकड़े जमा कराने थे, जिसमें अंकेक्षित सालाना वित्तीय विवरण या अंकेक्षक से नेटवर्थ का प्रमाणपत्र शामिल होता था।

ईवाई इंडिया के पार्टनर अनीश ठाकर ने कहा, हम आसान व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन यह देखा जाना बाकी है कि क्या नए कैटिगरी-1 के लिए नियम पहले के कैटिगरी-2 के मुकाबले ज्यादा उदार होंगे। पुनर्वर्गीकरण के बाद कम से कम चार इलाकों मॉरीशस, केमन आइलैंड, साइप्रस और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड के एफपीआई को खासा नुकसान होने का अनुमान है। संचयी तौर पर इन क्षेत्रों के 924 एफपीआई में से 767 यानी 83 फीसदी एफपीआई कैटिगरी-2 मेंं सूचीबद्ध हैं। यह जानकारी एनएसडीएल के आंकड़ों से मिली।

हाल में मॉरीशस वित्तीय सेवा नियामक फाइनैंशियल सर्विसेज कमीशन के अधिकारियों ने सेबी से मुलाकात कर कैटिगरी-1 में सिर्फ फाइनैंशियल ऐ क्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) सदस्यों को ही शामिल किए जाने के फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था। एफएससी के अधिकारियों ने सेबी से मौजूदा नियमों में बदलाव करने को कहा था ताकि एफएटीएफ अनुपालन वाले क्षेत्र के फंडों को कैटिगरी-1 एफपीआई के तौर पर पंजीकृत होने की अनुमति मिल सके।

दिलचस्प रूप से सिंगापुर और नीदरलैड्स के करीब एक तिहाई एफपीआई कैटिगरी-2 में हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि ये एकल स्वामित्व वाले फंड या अनियमित फंड मैनेजरों के साथ अनियमित फंड हो सकते हैं। ब्रिटेन, आयरलैंड, कनाडा, नॉर्वे और जापान जैसे क्षेत्रों के एफपीआई कैटिगरी-2 में 10 फीसदी से भी कम हैं।
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