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महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के आसार

सुशील मिश्र /  November 01, 2019

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर गतिरोध शुक्रवार को भी बना रहा। राज्य में विधानसभा के नतीजे घोषित हुए आठ दिन बीत चुके हैं। कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने शिव सेना को 'धोखा' दिया है। महाराष्ट्र के वित्त मंत्री और भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि अगर राज्य में 7 नवंबर तक नई सरकार नहीं बनती है तो यहां राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार गठन में मुख्य बाधा शिवसेना की ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग है।

 
अब राज्य में सरकार गठन की दौड़ में शिवसेना-भाजपा के साथ राकांपा और कांग्रेस भी शामिल हो गई हैं। राजनीतिक दलों के नेताओं की तरफ से आ रहे अलग-अलग बयानों से सरकार गठन की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। राजनीतिक गतिरोध के कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के आसार भी जताए जा रहे हैं। शिवसेना मुख्यमंत्री पद की मांग लेकर अड़ी हुई है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि भाजपा और शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है लेकिन महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री शिवसेना से होगा। उन्होंने कहा, 'भाजपा को कोई अल्टीमेटम नहीं दिया गया है, वे बड़े लोग हैं।' उन्होंने कहा कि अगर शिवसेना फैसला लेती है तो उसे महाराष्ट्र में स्थिर सरकार के गठन के लिए जरूरी संख्या मिल सकती है। राकांपा प्रमुख शरद पवार से भी गुरुवार को राउत ने मुलाकात की थी। अटकलें लगाई जा रही है कि भाजपा से रिश्ते खराब होने पर शिवसेना कांग्रेस-राकांपा के साथ मिलकर सरकार बनाने की फिराक में है। 
 
राजनीतिक गलियारों में अटकलें चल रही हैं कि शिवसेना और राकांपा राज्य में सरकार बनाएंगी और कांग्रेस उन्हें बाहर से समर्थन देगी। राकांपा के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि यदि भाजपा और शिवसेना महाराष्ट्र में सरकार बनाने में विफल रहती हैं तो उनकी पार्टी विकल्प देने का प्रयास करेगी। मलिक ने भाजपा नेता और मंत्री सुधीर मुनगंटीवार पर उनके इस बयान को लेकर प्रहार किया कि यदि महाराष्ट्र में सात नवंबर तक नई सरकार नहीं बनती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है। उन्होंने कहा कि यह कुछ धमकी जैसा लगता है। लोगों ने भाजपा और शिवसेना से सरकार बनाने को कहा है। यदि वे सदन के पटल पर ऐसा करने में विफल रहती हैं तो हम विकल्प देने का प्रयास करेंगे। राजनीतिक रस्साकशी पर भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने भरोसा जताया कि नई सरकार का गठन जल्द ही होगा। उन्होंने कहा, 'निर्धारित समय के भीतर एक नई सरकार बनानी होगी या राष्ट्रपति को हस्तक्षेप करना पड़ेगा। अगर समयसीमा के भीतर सरकार नहीं बनती है तो राष्ट्रपति शासन लागू होगा। सरकार गठन में मुख्य बाधा शिवसेना की ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग है। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा इस मांग को मानेगी, इस पर मुनगंटीवार ने कहा कि हमने पहले ही देवेंद्र फडणवीस को नामित कर दिया है। 
 
गुरुवार को राकांपा प्रमुख शरद पवार के साथ हुई बैठक के बाद आज कांग्रेसी नेता दिल्ली में सोनिया गांधी से इस मुद्दे पर चर्चा करने गए हैं। सरकार की अटकलों के बीच राकांपा नेता अजीत पवार ने कहा है कि उनकी पार्टी और सहयोगी दल कांग्रेस विपक्ष में बैठेंगे। चुनाव के परिणाम से साफ है कि उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है और वह ऐसा ही करेंगे। कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने पार्टी नेताओं की आलोचना की, जो महाराष्ट्र में अगली सरकार गठन के लिए शिवसेना को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं। निरूपम ने कहा कि भाजपा और उसकी सहयोगी शिवसेना के बीच चल रही जुबानी जंग कुछ और नहीं बल्कि नाटक है और कांग्रेस को इससे दूर रहना चाहिए।
 
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण व पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा था कि अगर शिवसेना उनकी पार्टी के समर्थन से सरकार बनाना चाहती है तो उसे भाजपा से अलग होना होगा। मल्लिकार्जुन खडग़े और सुशील कुमार शिंदे जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता शिवसेना के साथ किसी भी तरह के रिश्ते के खिलाफ हैं। शिंदे ने कहा कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष दल है। कांग्रेस और शिवसेना विचारधारा के स्तर पर बिल्कुल अलग हैं और मल्लिकार्जुन खडग़े पहले ही कह चुके हैं कि दोनों दलों के साथ आने का सवाल ही नहीं है। शिवसेना की राजनीतिक चालों के बावजूद भाजपा को भरोसा है कि सरकार उनकी ही बनने वाली है। सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि दीपावली उत्सव के कारण भाजपा और शिवसेना के बीच बातचीत में देर हुई। एक या दो दिन में बातचीत शुरू होगी। महाराष्ट्र के लोगों ने केवल एक पार्टी को नहीं बल्कि महायुति को जनादेश दिया है। हमारा गठबंधन फेविकोल या अंबुजा सीमेंट से भी मजबूत है। 
 
गौरतलब है कि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल आठ नवंबर को समाप्त होगा। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 105 सीटें जीती हैं जबकि शिवसेना महज 56 सीटें जीत कर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। दूसरी तरफ राकांपा ने 54 सीट और कांग्रेस ने 44 सीटें जीती हैं। विधानसभा में सदस्यों की संख्या 288 है और बहुमत के लिए 145 का आंकड़ा जरूरी है।
Keyword: election, maharashtra, BJP, shivsena, congress, NCP,,
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