बिजनेस स्टैंडर्ड - निवेश के माहौल में कैसे आएगा सुधार
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निवेश के माहौल में कैसे आएगा सुधार

राजीव कुमार /  November 01, 2019

अब वक्त आ गया है कि निवेशकों की धारणा के आधार पर राज्यों के कारोबार और निवेश संबंधी माहौल का आकलन किया जाए। विस्तार से जानकारी दे रहे हैं राजीव कुमार 

 
घरेलू और विदेशी निवेशकों को इस खबर से खुश होना चाहिए कि विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता रैंकिंग में इस वर्ष भारत की स्थिति में और अधिक सुधार हुआ है। 2014 में जहां भारत का स्थान 142वां था, वहीं 2020 की कारोबारी सुगमता रिपोर्ट के अनुसार 2019 में यह सुधरकर 63वां हो चुका है। इस वर्ष का सुधार पिछले वर्षों की तरह प्रभावशाली नहीं रहा लेकिन फिर भी भारत को 9वां सबसे बेहतर प्रदर्शन वाला राष्ट्र घोषित किया गया। कॉर्पोरेट कर दर में भारी कटौती के बाद इस खबर से निवेशकों के रुझान में और सुधार होना चाहिए। नए निवेश और नई उत्पादन इकाइयों के लिए कॉर्पोरेशन कर दर में 15 फीसदी तक की कमी की गई है। इससे भारत अन्य देशों की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी हो गया है। ये उपाय थोड़ा ठहर कर असर दिखाएंगे। निवेश और क्षमता निर्माण पर इनका तत्काल असर होने की अपेक्षा करना सही नहीं होगा। ऐसे में हम वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में निवेश में सुधार की आशा कर सकते हैं। 
 
कारोबारी सुगमता रैंकिंग के कुछ पहलू ऐसे हैं जिनको चिह्नित करने की आवश्यकता है:
 
1. जैसा कि वित्त मंत्री ने स्वयं कहा, केवल दो शहरों के आधार पर बनाई गई रैंकिंग अलग-अलग राज्यों के एकदम जुदा हालात का आकलन नहीं करती। ऐसे में वक्त आ गया है कि इस सूची में ज्यादा शहरों को शामिल किया जाए।
 
2. अब यह स्पष्ट है राज्यों में निवेश का माहौल ही देश में निवेश का प्रमुख कारक है। यह कहना शायद अतिरंजित नहीं होगा कि मौजूदा या संभावित निवेशकों के 80 फीसदी गतिरोध को राज्य सरकारें आसानी से दूर कर सकती हैं। ऐसे में शायद देश के सभी राज्यों में कारोबारी सुगमता में सुधार का वक्त आ गया है।
 
3. यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी रैंकिंग किसी बाहरी एजेंसी मसलन विश्व बैंक या नीति आयोग से बनवाई जाए तथा यह अलग-अलग राज्यों में निवेश के माहौल को लेकर निवेशकों की अवधारणा पर केंद्रित हो। मेरी दृष्टि में ऐसी रैंकिंग तैयार करने का निजी निवेश पर सकारात्मक असर होगा और राज्य निवेश जुटाने के मामले में सकारात्मक ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। बड़े और एकबारगी निवेश संबंधी आयोजन प्राय: अपेक्षित परिणाम नहीं देते। अब समय आ गया है कि राज्य नियमित रूप से अपने कारोबारी माहौल में सुधार के लिए काम करें।
 
4. समेकित कारोबारी रैंकिंग में सुधार के बावजूद कुछ समस्याएं हैं। मसलन अनुबंध प्रवर्तन के क्षेत्र में भारत 190 देशों में 163वें स्थान पर है। इससे निवेशकों के लिए अनिश्चित माहौल बनता है क्योंकि उन्हें विवाद की स्थिति में समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस संबंध में यह ध्यान देने वाली बात है कि टाटा ट्रस्ट ने जस्टिस रिपोर्ट बनाने की सराहनीय पहल की है। इस रिपोर्ट के जरिये पहली बार चार कारकों पर राज्यों में न्याय प्रदान की स्थिति की रैंकिंग की जा रही है। ये कारक हैं पुलिस, जेल, न्याय और विधिक सहायता। यह रिपोर्ट आगामी 7 नवंबर को जारी की जाएगी। मैं आशा करता हूं कि इस रिपोर्ट और इसके बाद के वार्षिक संस्करणों के माध्यम से राज्यों में न्यायिक शासन सुधरेगा। वह देश में कारोबारी माहौल में सुधार की दृष्टि से अहम है।
 
5. दो अन्य मोर्चों पर भारत का प्रदर्शन पर्याप्त बेहतर नहीं रहा। कारोबार शुरू करने के मामले में देश को 136वां स्थान दिया गया जो गत वर्ष से एक स्थान बेहतर है। मैं पहले भी कह चुका हूं कि देश में कारोबारी माहौल सुधारने में अब राज्यों का अहम योगदान होने वाला है। निवेशकों को छोटे-बड़े हर तरह के राज्यों में कारोबार शुरू करने में दिक्कत आती है। इसी तरह संपत्ति का पंजीयन भी एक कठिन कवायद है। इस सूची में हम 166वें स्थान से सुधरकर 154वें पर आ गए हैं। संपत्ति का अधिकार देश में बुनियादी अधिकार है और इस दिशा में और अहम कदम उठाने की आवश्यकता है।
 
6. एक अन्य पहलू जहां अधिक सुधार की जरूरत है, वह है कर भुगतान की सुविधा। इस मामले में हमने छह स्थानों का सुधार किया और 2018 के 121 से 2019 में 115वें स्थान पर आ गए। आम लोगों और कंपनियों दोनों को प्रत्यक्ष कर भुगतान की सुविधा देना सन 1993 से ही एजेंडे में रहा है। उस वक्त मैं वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में आर्थिक सलाहकार था। उन्हीं वर्षों के दौरान व्यापक करदाता यूनिट बनाने की पहल हुई थी। उसका काम था कर भुगतान की सुविधा देना और यह सुनिश्चित करना कि बड़े करदाताओं को कोई नुकसान न हो। अब इस पहल को प्रभावी बनाने का वक्त आ गया है ताकि बड़े करदाता, जिन्हें कुल करदाताओं के 10 फीसदी तक सीमित किया जा सकता है, उन्हें कर अनुपालन में दिक्कत न हो। 
 
7. यह शायद वर्तमान स्थिति का परिचायक है कि ऋण उपलब्धता के क्षेत्र में हमारी रैंकिंग 22 से फिसलकर इस वर्ष 25 हो गई है। इसका सीधा संबंध बैङ्क्षकग क्षेत्र से है जहां बीते 12 महीने में ऋण की स्थिति तंग हुई है। इन हालात में तत्काल सुधार करना होगा। यह बात बहुत महत्त्वपूर्ण है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कई उद्यमियों की संगठित क्षेत्र तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित हो। अप्रैल 2015 में मुद्रा ऋण योजना की शुरुआत के बाद से अब तक 20.6 करोड़ कर्जदारों को 9.1 लाख करोड़ रुपये का ऋण बांटा गया है। इससे असंगठित क्षेत्र में ऋण की पहुंच में सुधार हुआ है। परंतु इस क्षेत्र में अभी काफी कुछ किए जाने की आवश्यकता है।
 
राज्य सरकारों द्वारा अपने क्षेत्र में कारोबारी सुगमता सुधारने पर ध्यान देकर देश वैश्विक कारोबारी सुगमता सूचकांक में शीर्ष 50 देशों में जगह बना सकता है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि होगी लेकिन हमें और सुधार करना होगा क्योंकि आर्थिक वृद्घि और रोजगार निर्माण के लिए लगातार भारी भरकम निवेश की आवश्यकता होगी। निवेशकों की दृष्टि से देखें तो असली बदलाव केवल तब होगा जब सभी राज्यों के कारोबारी माहौल में गुणात्मक सुधार होगा। ऐसे में वक्त आ गया है कि सभी राज्य अपने कारोबारी और निवेश संबंधी माहौल को निवेशकों की अवधारणा के अनुसार बेहतर करना होगा। 
 
(लेखक नीति आयोग के उपाध्यक्ष हैं। लेख में प्रस्तुत विचार निजी हैं।) 
Keyword: business ranking, FPI,,
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