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लगातार तीसरे माह जीएसटी संग्रह लक्ष्य से कम

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली November 01, 2019

वस्त एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अक्टूबर महीने में लगातार तीसरे महीने 1 लाख करोड़ रुपये से कम रहा है। राजस्व संग्रह पिछले साल अक्टूबर महीने की तुलना में 5.3 प्रतिशत कम रहा। यह चालू वित्त वर्ष के 7 महीनों में कर संग्रह में सबसे तेज गिरावट है। इससे उपभोक्ता मांग कमजोर रहने का पता चलता है। वित्त मंत्रालय की ओर से आज जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर महीने में कर संग्रह 95,380 करोड़ रुपये रहा, जो इसके पहले महीने के 91,916 करोड़ रुपये से मामूली अधिक है, जब राजस्व गिरकर 19 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था।
 
अक्टूबर दूसरा महीना है, जब कर संग्रह सालाना आधार पर गिरा है। इसके पहले सितंबर महीने में कर संग्रह मेंं 2.7 प्रतिशत की गिरावट आई थी। पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, 'यह लगातार दूसरा महीना है, जब कर संग्रह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कम है।' माना जा रहा है कि इससे सरकार के  2019-20 के राजस्व के लक्ष्य में कमी आएगी। सरकार ने औसतन 1.18 लाख करोड़ रुपये मासिक जीएसटी संग्रह का लक्ष्य रखा था।  डेलॉयट इंडिया में पार्टनर एमएस मणि ने कहा कि जीएसटी संग्रह में जितनी कमी का पहले अनुमान लगाया गया था, यह उससे भी कम है, जिससे अर्थव्यवस्था में सुस्ती का पता चलता है। उन्होंने कहा, 'चूंकि जीएसटी खपत कर है, ऐसे में पिछले कुछ महीनों से कम संग्रह से शायद यह संकेत मिल रहा है कि ग्राहकों द्वारा किया जाने वाला खर्च कम हुआ है।' 
 
अक्टूबर में संग्रह मुख्य रूप से सितंबर महीने का है, जो त्योहार के पहले वाला महीना है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अक्टूबर महीने के जीएसटी में बढ़ोतरी होगी, जिसका संग्रह नवंबर महीने में किया जाएगा. इससे मांग बढऩे के संकेत मिल सकते हैं।  जैन ने कहा कि त्योहार की वजह से नवंबर महीने के लिए संग्रह बेहतर रह सकता है। जैन ने कहा, 'अनुपालन आसान किए जाने और प्रशासनिक कदम सख्त किए जाने से अगले कुछ महीनों में संग्रह में थोड़ा सुधार होगा। मांग में तेजी लाने के लिए निश्चित रूप से प्रोत्साहन की जरूरत है।' इक्रा में प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि अगले महीने का कर संग्रह, जिसमें त्योहारी अवधि भी शामिल होगी, अहम संकेत देगा कि वित्त वर्ष 2020 में जीएसटी संग्रह कितना रह सकता है। 
 
केंद्रीय जीएसटी संग्रह अक्टूबर महीने में 17,582 करोड़ रुपये रहा, जो सितंबर में 16,630 करोड़ रुपये था। राज्य जीएसटी संग्रह 23,674 करोड़ रुपये था, जो इसके पहले महीने में 22,598 करोड़ रुपये था। एकीकृत जीएसटी संग्रह में कमी आई है और यह पिछले महीने के 50,612 करोड़ रुपये की तुलना में इस महीने 46,517 करोड़ रुपये रह गया है। राजस्व संग्रह की धुंधली तस्वीर ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इस वित्त वर्ष में कर संग्रह बजट अनुमान की तुलना में 2 लाख करोड़ रुपये कम रहने की उम्मीद है। केंद्र व राज्य के अधिकारियोंं की 12 सदस्यों की समिति पिछले साल गठित की गई थी, जो राजस्व वसूली को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी। यह समिति कर चोरी की वजहें दूर करने और जहां जरूरी है, दरें बढ़ाने के बारे में जांच कर रही है। 
 
वित्त वर्ष 20 में केंद्रीय जीएसटी में 16 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया था, जिसे फरवरी में आगामी बजट में घटाया जा सकता है। सीजीएसटी संग्रह का लक्ष्य दरअसल वित्त वर्ष के लिए घटाकर 5.26 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि अंतरिम बजट में 6.1 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था। टैक्समैन में डीजीएम विशाल रहेजा ने कहा, 'कमजोर मांग, कम जीडीपी वृद्धि दर और औद्योगिक उत्पादन में गिरावट अक्टूबर महीने में जीएसटी में कमी की वजह हो सकती है।' उम्मीद से कम राजस्व से केंद्र सरकार पर राज्यों के राजस्व में आने वाली कमी की भरपाई करने के मामले में भी दबाव बढ़ रहा है। महीने के दौरान मुआवजा उपकर संग्रह 7,607 करोड़ रुपये रहा है। यह करीब 13,000 करोड़ रुपये मुआवजा की तुलना में बहुत कम है, जो हर महीने राज्यों को दिया जा रहा है। अगस्त तक जीएसटी मुआवजा उपकर वसीलू करीब 24,000 करोड़ रुपये कम रही है राजस्व में कमी की भरपाई के लिए राज्यों को मुआवजा दिया गया है। सितंबर महीने के लिए 31 अक्टूबर 2019 तक दाखिल किए गए रिटर्न की कुल संख्या 73.83 करोड़ रही है।
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