बिजनेस स्टैंडर्ड - आईटी: मार्जिन पर वीजा का दबाव
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आईटी: मार्जिन पर वीजा का दबाव

देवाशिष महापात्र / बेंगलूरु November 01, 2019

पिछले एक साल के दौरान अधिकतर एच-1 वीजा आवेदन को खारिज किए जाने से भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। वीजा के अभाव में भारतीय आईटी सेवा कंपनियों को अपने विदेशी ग्राहकों की परियोजनाओं के निष्पादन के लिए काफी हद तक उपठेकेदारों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में आक्रामक तरीके से कर्मचारी पिरामिड तैयार करने के बावजूद घरेलू आईटी कंपनियों को अपने ग्राहकों के यहां परियोजनाओं के निष्पादन के लिए इंजीनियरों को अमेरिका भेजने की दरकार है।
 
यूएस सिटिजनशिप ऐंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि एच-1बी वीजा आवेदनों को खारिज होने की दर ट्रंप प्रशासन के दौरान सर्वकालिक ऊंचाई तक पहुंच गई है। नैशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (एनएफएपी) के एक विश्लेषण के अनुसार, अक्टूबर से जून की अवधि में एच-1बी वीजा आवेदनों के खारिज होने की दर बढ़कर 24 फीसदी हो गई जो वित्त वर्ष 2015 में 6 फीसदी थी। आईटी सेवा कंपनियों के बीच कॉग्निजेंट के करीब 60 फीसदी शुरुआती आवेदन खारिज कर दिए गए। इसके बाद कैपजेमिनाई, ऐक्सेंचर, विप्रो और इन्फोसिस का स्थान है। साल 2008 में इन छह शीर्ष भारतीय आईटी सेवा कंपनियों को महज 16 फीसदी यानी 2,145 एच-1बी वीजा आवंटित किए गए।
 
उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि वीजा आवेदनों के खारिज होने की ऊंची दर से घरेलू आईटी कंपनियों की लागत बढ़ेगी जिससे अंतत: उसके मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा। शेयरखान के अनुसंधान प्रमुख संजीव होता ने कहा, 'वीजा आवेदनों के खारिज होने की दर में तेजी के कारण भारतीय आईटी कंपनियों को अपनी विदेशी परियोजनाओं के निष्पादन के लिए उपठेकेदारों में कहीं अधिक निर्भर रहना पड़ेगा। साथ ही, आईटी कंपनियों द्वारा शुरू की गई स्थानीयकरण की पहल में आगे तेजी दिखेगी जिससे जाहिर तौर पर लागत में इजाफा होगा।' उन्होंने कहा, 'ऐसे समय में जब कंपनियों को अपने पारंपरिक कारोबार में मूल्य संबंधी दबाव से जूझना पड़ रहा हो, लागत संबंधी दबाव से उनके मार्जिन को जबरदस्त झटका लगेगा।'
 
शीर्ष आईटी कंपनियों की उपठेकेदारी लागत उनकी कुल डिलिवरी लागत के 6 से 10 फीसदी के दायरे में है। टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज (टीसीएस) की उपठेकेदारी लागत करीब 6 फीसदी है जबकि दूसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी इन्फोसिस के मामले में यह आंकड़ा 7 फीसदी है। अधिकतर आईटी कंपनियां अमेरिका जैसे जगहों पर उपठेकेदारी लागत को अपने डिलिविरी मॉडल का अभिन्न हिस्सा मानती हैं। इसके अलावा कौशल में कमी को दूर करने के लिए भी वे उपठेकेदारों की सेवाएं लेती हैं। 
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