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राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 93 प्रतिशत

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली October 31, 2019

केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में बजट अनुमान के 92.6 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि कर राजस्व लक्ष्य के मुताबिक नहीं आया और व्यय में भी बहुत कमी नहीं की गई है।  यह आंकड़े गंभीर नजर आते हैं, लेकिन यह पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की पहली छमाही के 95.3 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा कम है। लेकिन वित्त वर्ष 19 में राजकोषीय चूक हुई थी और 3.3 प्रतिशत लक्ष्य की तुलना में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.4 प्रतिशत हो गया था। उस हिसाब से देखें तो केंद्र सरकार को चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.3 प्रतिशत के लक्ष्य पर बरकरार रख सकती है। हालांकि अक्टूबर के बाद कर राजस्व प्रभावित हो सकता है क्योंकि कॉर्पोरेट कर  दरों मेंं कटौती की घोषणा की गई है। 
 
इस अवधि के दौरान राजस्व घाटा बढ़कर बजट अनुमान के करीब 100 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो व्यय और मौजूदा राजस्व जरूरतों के अंतर को दिखाता है। एक साल पहले की समान अवधि में यह 108 प्रतिशत था। कुछ अर्थशास्तित्रयों का मानना है कि  राजकोषीय घाटे से कहीं बहुत ज्यादा अहम राजस्व घाटा है क्योंकि सरकार को खपत के लिए उधारी लेनी होगी। अप्रैल सितंबर 2020 के दौरान कुल कर प्राप्तियां 6.07 लाख करोड़ रुपये रही हैं, जो बजट अनुमान का 36.8 प्रतिशत है। यह इसके पहले के वित्त वर्ष की पहली छमाही के 39.4 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा कम है। 
 
इक्रा में प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'चिंता की बात है कि केंद्र का सकल कर राजस्व अगस्त और सितंबर 2019 में सालाना आधार पर गिरा है, जिसकी वजह से वित्त वर्ष 20 की पहली छमाही में 1.5 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई है।' उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर राजस्व दोनों मद से आने वाले कर राजस्व में उल्लेखनीय कमी आएगी, क्योंकि हाल के महीनों में प्रदर्शन सुस्त रहा है।  इसके अलावा सितंबर तक राजस्व के आंकड़ों में तेजी बनी रही क्योंकि रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं, जो अगली छमाही में नहीं रहेगा। रिजर्व बैंक के हस्तांतरण से केंद्र का पहली छमाही में कुल गैर कर राजस्व 2.09 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह 2019-20 के बजट अनुमान की तुलना में 66.7 प्रतिशत रहा, जो अप्रैल सितंबर 2018-19 के 44.5 प्रतिशत की तुलना में बहुत ज्यादा है। 
 
इंडिया रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा, 'अगर रिजर्व बैंक से एकमुश्त अप्रत्याशित लाभ नहीं होता तो राजकोषीय घाटे की हालत बहुत खराब नजर आती।'  गैर कर्ज पूंजीगत प्राप्तियों, जिसमें विनिवेश शामिल है, की रफ्तार सुस्त है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल सितंबर के दौरान यह 20,598 करोड़ रुपये रहा है, जो बजट अनुमान का 17.2 प्रतिशत है, जो एक साल पहले 19.2 प्रतिशत था। सरकार बड़े विनिवेश जैसे बीपीसीएल और एयर इंडिया पर नजर बनाए हुए है, जिससे 1.05 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य हासिल किया जा सके। 
 
वहीं दूसरी ओर अर्थव्यवस्था मेंं सुस्ती की वजह से सरकार ने व्यय में भी ज्यादा कटौती नहीं की है। राजस्व व्यय और पूंजीगत वव्यय दोनों ही पहले छह महीने में प्रतिशत के हिसाब से पिछले साल की समान अवधि के बराबर रहा है।  नायर ने कहा कि वित्त वर्ष 20 में राजकोषीय घाटे में तेज बढ़ोतरी रोकने के लिए व्यय मेंं कटौती करनी पड़ सकती है।
Keyword: fiscal deficit, revenue, economy,,
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