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निजी क्षेत्र दे सकता है पूर्वी डीएफसी को गति

शाइन जैकब / नई दिल्ली October 30, 2019

पूर्वी समर्पित मालवाहक गलियारे (ईडीएफसी) के सोननगर से गोमोह खंड को नया जीवन मिलने की उम्मीद है। भारतीय समर्पित मालवाहक गलियारा निगम (डीएफसीसीआईएल) ने इस खंड को सार्वजनिक-निजी हिस्सेदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने के लिए कॉर्पोरेट्स से बातचीत की पहल की है। दिल्ली में बुधवार को डीएफसीसी की ओर से आयोजित रोड शो में रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा प्रोजेक्ट्स, अदाणी पोट्र्स ऐंड लॉजिस्टिक्स, जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर, मित्सुई सीमेंस और केएफसी इंटरनैशनल सहित निजी क्षेत्र के कम से कम 23 घरेलू और वैश्विक दिग्गजों ने हिस्सा लिया। 
 
डीएफसीसीआईएल के प्रबंध निदेशक अनुराग सचान ने कहा कि 263.7 किलोमीटर के इस खंड के लिए दो महीने के भीतर रिक्वेस्ट फॉर कोटेशन मांगा जा सकता है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र के दिग्गजों के अलावा इसमें एनटीपीसी जैसे ग्राहकों और विश्व बैंक, इंटरनैशनल फाइनैंस कॉर्पोरेश (आईएफसी) और जापान इंटरनैशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) जैसी वित्तपोषण एजेंसियों ने भी हिस्सा लिया। विश्व बैंक पूर्वी डीएफसी के एक हिस्से के लिए 2.36 अरब डॉलर दे रहा है, जबकि जेआईसीए ने पश्चिमी डीएफसी के 38,722 करोड़ रुपये कर्ज देने की पेशकश की है। 
 
इस खंड में ईडीएफसी का सोननगर (बिहार) से दानकुनी (पश्चिम बंगाल) 538 किलोमीटर हिस्सा शामिल होगा, जिस पर 15,000 करोड़ रुपये लागत आने की संभावना है। ईडीएफसी का शेष हिस्से के लिए विश्व बैंक कर्ज देने को सहमत है। डीएफसीसीआईएल ने एन्युटी मॉडल पेश किया है, जिसमें निजी साझेदार को न्यूनतम सालाना रिटर्न करीब 2,140 करोड़ रुपये मिलेगा। सचान ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'इस परियोजना के लिए 90 प्रतिशत जमीन का पहले ही अधिग्रहण किया जा चुका है। विदेशी निवेशकों तक पहुंचने की योजना के तहत कुछ महीने पहले इस तरह का कार्यक्रम किया गया था।' कंपनी को उम्मीद है कि समझौते पर हस्ताक्षर होने तक 98 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण हो जाएगा। डीएफसीसीआईएल के एक अन्य सूत्र ने कहा कि ईडीएफसी का न्यू भादन और खुर्जा के बीच194 किलोमीटर का काम मार्च 2020 तक पूरा हो सकता है। इस मार्ग पर ज्यादातर कोयले और लोहे की ढुलाई होती है। 
 
एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'पीपीपी का हिस्सा बनने वाले निजी कारोबारियोंं को फायदा यह होगा उन्हें 14 प्रतिशत आईआरआर होगा और ठेका पाने वाले को डीएफसीसीआईएल की ओर से परियोजना चालू होने केबाद 15 साल की अवधि तक नियत एन्युटी भुगतान मिलेगा।' दिलचस्प है कि अगर सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज जैसे एनटीपीसी या कोल इंडिया इस परियोजना में दिलचस्पी दिखाती हैं तो एक संयुक्त उद्यम की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।  इन दो  समर्पित मालवाहक गलियारों का चालू होना इस हिसाब से बहुत अहम है कि देश की कुल माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी मौजूदा 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 2030 तक करीब 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। अनुमान के आधार पर ईडीएफसी से करीब 26.4 करोड़ टन और डब्ल्यूडीएफसी से 28.2 करोड़ टन माल की ढुलाई 20 साल में हो सकती है। इस खंड पर वित्त वर्ष 2015 तक दोनोंं दिशाओं में प्रतिदिन 100 रैक चलाए जा सकेंगे। 
Keyword: EDFC, DFCCIL, PPP,,
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