बिजनेस स्टैंडर्ड - खाद्यान्न पर जीएसटी लगाने का विचार
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खाद्यान्न पर जीएसटी लगाने का विचार

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 10 30, 2019

आरसीएम के तहत कर लगाने पर मंथन

पहले वैट में लगता था खरीद कर
जीएसटी में नहीं लगता है कोई कर

बिजनेस स्टैंडर्ड खाद्यान्न पर जीएसटी लगाने का विचारसरकार ऐसी खाद्यान्न वस्तुओं पर कर लगाने पर विचार कर रही है जिन पर मूल्यवद्धित कर (वैट) व्यवस्था के तहत खरीद कर लगता था लेकिन उन्हें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में छूट हासिल है। राजस्व वृद्धि पर गठित अधिकारियों की समिति इस सुझाव पर विचार कर रही है। इन वस्तुओं पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के तहत कर लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें पंजीकृत करदाता गैरपंजीकृत करदाता की ओर से जीएसटी का भुगतान करते हैं।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'इसके पीछे सोच जीएसटी में राजस्व तटस्थता का सिद्घांत अपनाने की थी। लेकिन अब जीएसटी की दरों में व्यापक कटौती के बाद ऐसी स्थिति आ गई है कि जीएसटी दर पिछली व्यवस्था से कम हो गई है। खाद्यान्न जैसी कई ऐसी वस्तुएं हैं जिनमें थोक विक्रेता खरीद कर का भुगतान करते थे लेकिन अब उन पर पूरी तरह छूट है।' उन्होंने कहा कि इन वस्तुओं पर आरसीएम के जरिये कर लगाया जा सकता है। समिति साथ ही कंपोजिशन योजना में दरों में बदलाव करने और कर चोरी रोकने के लिए वहां आरसीएम शुरू करने की संभावना भी टटोल रही है। कंपोजिशन योजना के तहत कर की एक ही दर है और कारोबारियों के लिए जीएसटी रिटर्न दाखिल करना आसान है। 

एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'हम कंपोजिशन कर की दर को व्यावहारिक बनाने पर विचार कर सकते हैं। इसके अलावा अगर हम यह भी देखेंगे कि कर चोरी को रोकने के लिए आरसीएम को लागू किया जा सकता है या नहीं।' सितंबर में जीएसटी संग्रह 91,916 करोड़ रुपये रहा जो 19 महीने में सबसे कम है। यह पिछले साल सितंबर के मुकाबले 2.67 फीसदी और इस साल अगस्त की तुलना में 6.4 फीसदी कम है। यही वजह है कि सरकार ने राजस्व बढ़ाने के उपाय सुझाने के लिए अधिकारियों की एक समिति का गठन किया है।

12 सदस्यीय इस समिति में केंद्र और राज्यों के पांच-पांच सदस्य है। समिति दुरुपयोग रोकने के लिए जीएसटी में व्यवस्थागत बदलाव करने, कर आधार बढ़ाने के उपाय, अनुपालन की निगरानी बढ़ाने और बेहतर डेटा एनालिटिक्स और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के जरिये कर चोरी रोकने जैसे मुद्दों पर भी विचार कर रही है। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि अगर आरसीएम को व्यापक तौर पर लागू किया जाता है तो इससे जीएसटी व्यवस्था कमजोर होगी। उन्होंने कहा, 'वैट के तहत अधिकांश राज्यों में खाद्यान्न को छूट मिली हुई थी जबकि हरियाणा और पंजाब में खरीद कर लगता था। यह खरीदार को चुकाना पड़ता था। इस कर को जीएसटी में मिला दिया गया है। मुझे नहीं लगता है कि इन पर कर लगाने का कोई तुक है।'

Keyword: food, gst, input tax, credit, crisil, IGST, SGST,,
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