बिजनेस स्टैंडर्ड - डीडीटी खत्म करने की तैयारी!
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डीडीटी खत्म करने की तैयारी!

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली 10 29, 2019

समीक्षा कर रही सरकार

शेयर बाजार में भरोसा कायम करने के लिए लाभांश वितरण कर खत्म करने पर विचार
अभी 15 फीसदी की दर से लगता है लाभांश कर, प्रभावी दर है 20.35 फीसदी
सभी तरह की निवेश श्रेणियों में एकरूपता लाने के लिए दीर्घावधि पूंजी लाभ कर की होगी समीक्षा

बिजनेस स्टैंडर्ड डीडीटी खत्म करने की तैयारी!केंद्र सरकार शेयर बाजार और भारतीय उद्योग जगत से संबंधित कर ढांचे में कुछ बदलाव करने की योजना बना रही है। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा कायम करने के लिए संबंधित मंत्रालय और नियामक लाभांश वितरण कर (डीडीटी) को खत्म करने की संभावना तलाश रहे हैं। इसके साथ ही सरकार दीर्घावधि पूंजी लाभ कर के ढांचे को भी तार्किक बनाने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने कहा कि शेयर बाजार से संबंधित कुछ कराधान व्यवस्था पर संबद्ध मंत्रालयों और नियामकों की पिछले कुछ दिनों में कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। सरकार के अधिकारियों का मानना है कि लाभांश वितरण कर की वजह से देश में विदेशी निवेश की राह में बाधा आ रही है।

घरेलू कंपनियों की ओर से कुल घोषित, वितरण या भुगतान किए गए लाभांश पर 15 फीसदी की दर से लाभांश वितरण कर वसूला जाता है। हालांकि 12 फीसदी अधिभार और 3 फीसदी शिक्षा उपकर की वजह से इसकी प्रभावी दर 20.35 फीसदी हो जाती है। कंपनियां अपने मुनाफे में से लाभांश का भुगतान करती हैं जबकि निवेशकों को सालाना 10 लाख रुपये तक लाभांश पर कोई कर नहीं देना पड़ता है। हालांकि सालाना 10 लाख रुपये से अधिक लाभांश पाने वाले निवेशकों को 10 फीसदी के हिसाब से डीडीटी देना पड़ता है। 

इसके साथ ही विभिन्न निवेश साधनों में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए कर अनुपालन को सहज बनाने के लिए सरकार दीर्घावधि पूंजी लाभ कर के ढांचे को तीन व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत कर तार्किक बनाने पर भी काम कर रही है। इनमें वित्तीय-इक्विटी, वित्तीय-गैर-इक्विटी और अन्य (प्रॉपर्टी, सोना आदि) शामिल हैं। वित्तीय-इक्विटी में सभी तरह के शेयर शामिल होंगे, जबकि वित्तीय-गैर-इक्विटी में डेट फंड जैसे कि बॉन्ड, डिबेंचर आदि होंगे। तीसरी श्रेणी में अन्य संपत्तियां शामिल होंगी।

कर ढांचे को तार्किक बनाने का मकसद सभी संपत्ति श्रेणी में एकरूपता लाना है ताकि किसी भी अन्य संपत्ति श्रेणी को कराधान के मामले में अलग तरीके से न देखा जाए। वर्तमान में 6 तरह की संपत्ति श्रेणियां हैं और सभी में निवेश बनाए रखने की अवधि अलग-अलग है तथा कर की दरें भी अलग-अलग हैं।

सूचीबद्ध शेयरों और कंपनियों पर एलटीसीजी को 14 साल के अंतराल के बाद 2018-19 में फिर से शुरू किया गया था। शेयरों की बिक्री पर एक लाख रुपये से अधिक मुनाफे पर दस फीसदी की दर से एलटीसीजी देना पड़ता है। दीर्घकालिक का मतलब है कि शेयरों को एक साल अपने पास रखने के बाद बेचा गया है। निवेशकों को फिर से यह कर लगाना रास नहीं आया। एलटीसीजी को खत्म किए जाने के पीछे यह तर्क भी दिया जा रहा है कि शेयरों की खरीद-फरोख्त पर सीटीटी लगाया जाता है। हालांकि सूत्रों ने बताया कि एसटीटी हटाने पर कोई चर्चा नहीं हुई है। 
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