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आईबीसी समाधान में लग रहा अधिक समय

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता October 29, 2019

ऋण समाधान योजना के अंजाम तक पहुंचने वाली 156 दिवालिया मामलों को पूरा होने में लगने वाला औसत समय इस प्रक्रिया के लिए सरकार द्वारा संशोधित 330 दिनों की समय-सीमा से अधिक है। भारतीय दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने तक कॉरपोरेट ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के ऐसे 156 मामले थे जिनका समाधान हो चुका है। इसमें लगने वाला औसत समय 374 दिन रहा जिसमें सक्षम अधिकारी (एए) द्वारा आमतौर पर छोड़ देने वाली अवधि भी शामिल है। यदि इस अवधि को छोड़ दिया जाए तो औसत समय 347 दिनों का रहा। ये दोनों ही अवधि सरकार द्वारा संशोधित समय-सीमा से अधिक है।
 
इससे पहले दिवालिया प्रक्रिया पूरी करने के लिए 270 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई थी। कई मामलों में इस समय-सीमा का उल्लंघन हुआ जिसकी मुख्य वजह विभिन्न हितधारकों द्वारा मुकदमेबाजी रही। जुलाई में सरकार ने ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) में संशोधन कर दिवालिया प्रक्रिया को पूरी करने के लिए निर्धारित 270 दिनों की समय-सीमा को बढ़ाकर 330 दिन कर दिया था। हालांकि वह संशोधन संसद द्वारा पारित हो चुका है लेकिन दिवालिया कंपनी एस्सार स्टील के परिचालन लेनदारों ने इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी चुनौती दी है।
 
सितंबर के अंत तक कॉरपोरेट ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया के जारी 1,497 मामलों में से 535 मामलों में 270 दिनों की समय-सीमा का उल्लंघन किया गया जबकि 324 मामलों में 180 दिनों से अधिक लेकिन 270 दिनों से कम समय लगा। कुल दर्ज मामलों की संख्या 2,542 थी। रेटिंग एजेंसी इक्रा के उपाध्यक्ष अभिषेक डफरिया ने कहा, 'मामलों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उन्हें समयबद्ध तरीके से निपटाना एनसीएलटी के लिए एक चुनौती बन गई है। इस प्रक्रिया से गुजर रहे सीआईआरपी की संख्या सर्वकालिक ऊंचाई पर है जो सितंबर के अंत में करीब 1,500 थी।'
 
हालांकि दिवालिया मामलों को निपटाने में लगने वाला औसत समय 374 दिनों का है लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक की गैर-निष्पादित आस्तियों वाले खातों की पहली सूची में शामिल कई मामले दो साल से अधिक समय से लंबित हैं। एस्सार स्टील का मामला 2 अगस्त 2017 को शुरू हुआ था जबकि भूषण पावर का 26 जुलाई 2017 को। दिवालिया समाधान पेशेवर सुमित बिनानी ने कहा है कि समयबद्ध तरीके से समाधान इस संहिता का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा, 'समय-सीमा को संशोधित किया गया क्योंकि उसका पालन नहीं किया जा रहा था। संशोधित समय-सीमा 330 दिनों की है जिसमें मुकदमेबाजी की अवधि भी शामिल है। इस संहिता के दो महत्त्वपूर्ण स्तंभ यानी समाधान पेशेवर और सक्षम अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी की जा सके।'
Keyword: IBC, code, IBBI, NCLT, RBI,,
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