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सीमित दायरे में रह सकता है देसी शेयर बाजार

सुंदर सेतुरामन /  October 29, 2019

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि संवत 2075 में बाजार का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा और बाजार में व्यापक भागीदारी देखने को नहीं मिली। सुंदर सेतुरामन को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधार होने तक बाजार की बढ़ोतरी सीमित रहेगी। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...

 
संवत 2075 में बाजार में 12 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। क्या आप इस प्रदर्शन से संतुष्ट हैं?
 
आय में सुस्त बढ़ोतरी के समय बाजार गुणवत्ता पर ध्यान बनाए हुए है। संवत 2075 में देश व दुनिया में आर्थिक मंदी देखने को मिली और इसके बाद भी बाजार नई ऊंचाई को छू गया और निफ्टी 12,000 के पार निकल गया, जब भारतीय जनता पार्टी को जीत हासिल हुई। उल्लास का यह माहौल ज्यादा समय नहीं टिका और फंडामेंटल की ओर ध्यान केंद्रित हो गया। कंपनी कर में कटौती के बाद एक बार फिर बाजार में तेजी देखने को मिली। लेकिन निफ्टी के भीतर और निफ्टी व मिडकैप-स्मॉलकैप के बीच बड़े अंतर की प्रवृत्ति बनी हुई है।
 
बाजार में किस तरह का अवरोध है?
 
सितंबर 2018 के आईएलऐंडएफएस संकट के बाद से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों व हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों पर काफी दबाव बना हुआ है। इसका विस्तार अब बैंंकिंग क्षेत्र में भी हो गया है। सकल घरेलू उत्पाद की रफ्तार का अनुमान घटाया गया है, जो अल्पावधि में मुश्किल आर्थिक माहौल का संकेत देता है।
 
कंपनी कर में कटौती का कंपनियों और कुल अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
 
कंपनी कर में कटौती और नई विनिर्माण कंपनियों को प्रोत्साहन अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक उत्प्रेरक है। इससे कंपनी के लाभ में सुधार होगा। अगले दो साल में पूंजीगत खर्च के चक्र में सुधार के लिहाज से भी यह अच्छा है। इससे हालांकि वित्त वर्ष 2020 के राजकोषीय घाटे पर थोड़ा जोखिम हो सकता है, लेकिन मौजूदा माहौल में बढ़त को प्राथमिकता देना सही नीतिगत रुख है।
 
संवत 2076 के लिए आपका क्या नजरिया है? बाजार पर कौन से देसी व वैश्विक कारकों का प्रभाव पड़ेगा?
 
आर्थिक सुधार होने तक अल्पावधि में बाजार सीमित दायरे में बना रह सकता है। बाजार की चाल पर प्रभाव डालने वाले तीन मुख्य कारकों में वित्तीय क्षेत्र की सेहत, सरकार की तरफ से और प्रोत्साहन की घोषणा और अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध का समाधान शामिल है।
 
अर्थव्यवस्था को मुश्किल दौर से बाहर निकलने में कितना समय लगेगा? अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कौन से कदम उठाए जाने चाहिए?
 
फरवरी 2019 से ही भारतीय रिजर्व बैंक उदार रहा है और रीपो दरों में 135 आधार अंकों की कटौती की है। महंगाई के नियंत्रण में रहने और मुद्रा में स्थिरता के साथ ब्याज दरें नरम बनी रह सकती है। इससे त्योहारी सीजन में उपभोग में बढ़ोतरी होगी। मॉनसून में सुधार से भी ग्रामीण इलाके में उपभोग बढ़ेगा। इससे अगली कुछ तिमाहियों में धीरे-धीरे आर्थिक सुधार होगा। रियल एस्टेट क्षेत्र पर और ध्यान दिए जाने की जरूरत है, हालांकि कुछ कदमों का ऐलान किया जा चुका है।
 
आय में कब ठीक-ठाक सुधार की उम्मीद की जा सकती है?
 
सुस्त मांग, वित्तीय क्षेत्र में परिसंपत्ति गुणवत्ता की असमान प्रवृत्ति और जिंसों की कीमतों में अवस्फीतिक रुख से आय में कमी का जोखिम बना हुआ है। ऐसे में कंपनी कर में कटौती से वित्त वर्ष 2020 में शायद ही आय में ज्यादा सुधार होगा और यह मोटे तौर पर आय में गिरावट को सीमित कर देगा। हालांकि हमें अर्थव्यवस्था में सुधार के बाद वित्त वर्ष 2020-21 में आय में ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद है। हमें वित्त वर्ष 2020 में निफ्टी में प्रति शेयर आय में 12 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है और वित्त वर्ष 2021 में इसमें 28 फीसदी का मजबूत सुधार देखने को मिलेगा।
 
वित्तीय क्षेत्र की सेहत को लेकर निवेशकों में घबराहट है। क्या यह सही है? 
 
दबाव वाली कंपनियों की रेटिंग घटाए जाने से दबाव वाली परिसंपत्तियों में नए नाम शामिल हो रहे हैं। हालांकि दबाव में बढ़ोतरी की रफ्तार काफी कम है। एनसीएलटी में बड़े समाधान के जरिए रिकवरी और क्रेडिट लागत के सामान्य होने से वित्तीय क्षेत्र के लाभ में बढ़ोतरी होगी। साथ ही कंपनी कर में कटौती से कंपनियों की बचत ज्यादा होगी, जिससे कर्ज चुकाने की उनकी क्षमता में सुधार आएगा।
 
चुनौतीपूर्ण समय में आप निवेशकों को क्या सलाह देंगे?
 
मध्यम से लंबी अवधि के लिहाज से निवेश करने वाले निवेशकों को अच्छी गुणवत्ता वाले लार्जकैप और चुनिंदा मिडकैप पर नजर डालनी चाहिए और बाजार में होने वाले उतारचढ़ाव का इस्तेमाल लंबी अवधि के लिए इक्विटी पोर्टफोलियो बनाने में करना चाहिए।
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