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दुष्यंत चौटाला : प्रशंसकों के बीच खतरों का खिलाड़ी

अर्चिस मोहन /  October 28, 2019

अपने प्रशंसकों के बीच चौटाला खतरों का सामना करने वाले व्यक्ति के तौर पर लोकप्रिय हैं। पिछले वर्ष दिसंबर माह में उन्होंने बड़ा जोखिम मोल लेते हुए इंडियन नैशनल लोकदल (इनेलो) से अलग होकर जननायक जनता पार्टी (जजपा) का गठन किया। हालांकि ये कदम सफल साबित हुआ और हाल में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में नौ माह पुरानी पार्टी ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की। अपने प्रचार प्रसार के समय दुष्यंत ने जाट समुदाय को मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी के 'कुशासन' के खिलाफ उकसाया। हालांकि शुक्रवार को उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन करके एक बार फिर अपने राजनीतिक करियर को जोखिम में डाल दिया है। 31 वर्ष की उम्र में वह हरियाणा के सबसे युवा उप-मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हैं और लोगों के दिलों में अपने परदादा तथा जाट नेता देवीलाल की विरासत को आगे ले जाने की उम्मीद जगाई है। हालांकि भाजपा के साथ गठबंधन ने राज्य में जाट नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस को जजपा पर भाजपा की 'बी टीम' के तौर पर काम करने का आरोप लगाने का मौका दे दिया है। 

 
आने वाले वर्षों में जाट समुदाय का प्रमुख नेता बनने के लिए दुष्यंत की हुड्डा के बेटे दीपेंद्र तथा दूसरे जाट नेताओं के साथ प्रतिस्पर्धा हो सकती है। भाजपा के साथ आगे बढऩे का निर्णय उनके राजनीतिक सफर को ऊंची उड़ान दे सकता है या उसे बरबाद कर सकता है। फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले और जमीन से जुड़ाव वाले दुष्यंत अपने प्रशंसकों के बीच 'जेंटलमैन चौटाला' के नाम से लोकप्रिय हैं। उन्होंने सनावर (हिमाचल प्रदेश) के द लॉरेंस स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की और कैलीफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया। उनके पास कानून की डिग्री भी है। दिसंबर 2018 में दुष्यंत और उनके पिता अजय चौटाला को दादा ओम प्रकाश चौटाला तथा परदादा देवीलाल की पार्टी इनेलो से निकाल दिया गया था। हालांकि परिवार में सुलह कराने के लिए कुछ खाप पंचायतों के साथ ही पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री तथा चौटाला परिवार के करीबी मित्र प्रकाश सिंह बादल ने कई प्रयास किए लेकिन दुष्यंत अपने फैसले पर अडिग रहे। 
 
जजपा ने जींद में हुए उपचुनाव से अपना चुनावी सफर शुरू किया। हालांकि पार्टी प्रत्याशी और दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला को भाजपा प्रत्याशी ने हरा दिया लेकिन वे कांग्रेस उम्मीदवार रणदीप सिंह सुरजेवाला को तीसरे स्थान पर खिसकाने में सफल रहे। इसके बाद जजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 7 सीटों पर चुनाव लड़ा और 3 सीटें आम आदमी पार्टी के लिए छोड़ दींं। हालांकि भाजपा ने सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की। हालिया विधानसभा चुनाव के लिए दुष्यंत ने आप पार्टी और बसपा के साथ गठबंधन की कोशिश की। हालांकि बाद में जजपा ने अकेले चुनाव लडऩे का फैसला लिया। 
 
इनेलो को केवल एक सीट पर समेटते हुए जजपा ने 10 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की। चुनाव में इनेलो को जहां 2.44 प्रतिशत वोट मिले वहीं जजपा को करीब 15 प्रतिशत वोट हासिल हुए। दुष्यंत ने उचाना कलां सीट से वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेम लता के खिलाफ जीत दर्ज की जिन्होंने पिछली बार दुष्यंत को हराया था। वर्ष 2014 में 26 वर्षीय चौटाला ने सबसे कम उम्र के लोकसभा सांसद बनने पर सुर्खियां बटोरी थीं। लोकसभा वेबसाइट पर लिखे उनके प्रोफाइल के अनुसार, 'भारतीय संसद के लिए सबसे कम उम्र के व्यक्ति के तौर पर जीत दर्ज करने वाले लिम्का बुक ऑफ रिकॉड्र्स धारी'। 
 
लोकसभा में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने शानदार वक्तव्यों और विविध विषयों पर सवालों से प्रभावित किया था। उन्होंने इस दौरान रेलवे, राजमार्ग परियोजनाओं, महिलाओं के खिलाफ अपराध, बाल श्रम और नशीले पदार्थों की तस्करी आदि विषयों से जुड़े कुल 677 सवाल पूछे। किसानों के मुद्दों को उठाने के लिए वह 2017 में ट्रैक्टर लेकर संसद पहुंचे थे। लोकहित के कार्यों को लेकर दुष्यंत बताते हैं कि उन्होंने कई बार रक्तदान शिविर लगाए, अंगदान को लेकर जागरूकता फैलाई और पेड़ लगाने की पहल शुरू की। उन्होंने सिर्फ जाट नेता की छवि से इतर राज्य की '36 बिरादरी' का नेता बनने के लिए दूसरी जातियों तक भी अपनी पहुंच बनाई। 
 
पिछले पांच वर्षों के अपने सफर को याद करते हुए वह कहते हैं, 'इस दौरान काफी बदलाव आया। मुझे अपनी पढ़ाई छोड़कर राजनीति में आना पड़ा। आज मैं एक पार्टी का नेतृत्व कर रहा हूं। इसके लिए कड़ी मेहनत और बड़े बदलाव जरूरी हैं।' दुष्यंत खुद को किसान नेता के तौर पर देखते हैं जो अपने परदादा के कदमों पर चल रहे हैं और प्रत्येक सभा से पहले उनको याद करते हैं। मतदान के दिन भी ट्रैक्टर को आजमाया गया। वह अपनी पत्नी मेघना और विधायक माता नैना चौटाला के साथ मतदान के लिए ट्रैक्टर पर सवारी करके आए। 
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