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संवत 2075 रहा निवेशकों का स्वर्णिम दशक

राजेश भयानी / मुंबई October 28, 2019

संवत 2075 निवेशकों के लिए इस दशक का सबसे अच्छा साल रहा। इस संवत में निवेशकों को सोने में 20.4 फीसदी प्रतिफल मिला। इससे पहले निवेशकों में सोने में इतना ही प्रतिफल संवत 2067 में मिला था। निवेशकों को पिछले 7-8 साल में सबसे अधिक प्रतिफल मिलने के कारण बीता साल सोने के लिए यादगार रहा। पिछले पांच वर्षों के दौरान निवेशकों का एक नया वर्ग स्वर्ण बाजार में उतरा है। वे ऐसे निवेशक थे, जिन्हें पहले निवेश के लिए सोना खरीदने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसकी वजह यह थी कि उन्होंने सोने के प्रतिफल और इसमें पूंजी की सुरक्षा का स्वाद नहीं चखा था।
 
संवत 2075 की शुरुआत अच्छी हुई। यहां तक कि दीवाली के बाद के दिन में भी मुहूर्त कारोबार हुआ। पिछले साल दीवाली पर सोना खरीदने वाले निवेशक की पूंजी अब 20 फीसदी बढ़ चुकी है। इससे यही संकेत मिलता है कि सोना लंबी अवधि की संपत्ति है और इस पीली धातु में गिरावट का दौर खत्म हो चुका है। सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड की लोकप्रियता बढ़ रही है, जिससे अब लोगों के पोर्टफोलियो में सोने का अनुपात बढ़ेगा। चालू वित्त वर्ष में अब तक सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड की छह खेप जारी की जा चुकी हैं। पिछले पांच खेपों में 3.1 टन के सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड बिक चुके हैं। यह रुझान पिछले साल से अलग है, जब दीवाली तक सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड की तीन खेपों में केवल 1.37 टन के बॉन्डों की बिक्री हुई थी। 
 
सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड की लोकप्रियता की वजह यह है कि भौतिक सोने में मुनाफावसूली को लेकर रुझान कमजोर पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि स्वर्ण बॉन्डों में डीमैट में खरीदारी के विकल्प के अलावा सालाना ब्याज और छूट ऑफर मिलते हैं। वित्त मंत्री ने 5 जुलाई को पेश बजट में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया था, जो पहले 10 फीसदी था। इससे नई मांग पर असर पड़ा है क्योंकि सोने की घरेलू कीमतें बढ़ गई हैं। हालांकि इस शुल्क से घरेलू कीमतें बढऩे के कारण सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड समेत सोना खरीदने वाले लोगों के सोने की कीमत 2.5 फीसदी बढ़ गई। बजट के बाद सोने के आयात में भारी गिरावट आई है, लेकिन अवैध आयात में इजाफा हुआ है। बजट के बाद के तीन महीनों के दौरान मुश्किल से 85 टन सोने का आयात हुआ है। अप्रैल-मई में आम चुनावों के दौरान निगरानी बढऩे के कारण अवैध आयात घट गया था। 
 
सोने की कीमतें बढऩे के बाद उन सराफों ने खूब बिक्री की, जिन्होंने पहले आयात किया था। इसके साथ ही अवैध रूप से आयातित सोना भी बाजार में पहुंचा। इसके नतीजतन हाजिर बाजार में कीमतें आयात कीमतों से काफी कम थीं। सोने के हाजिर दाम सितंबर में आयातित सोने की लागत से करीब 1,300 से 1,350 रुपये कम थे। उपभोक्ता तेजी को भुनाने के लिए पुराने आभूषणों को बेच रहे थे, जिससे आपूर्ति में बढ़ोतरी हुई। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में पुराने आभूषणों की बिक्री 100 टन से अधिक रहने का अनुमान है। यह संभवतया अब तक का रिकॉर्ड था। 
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