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जब खुदरा कारोबार रूबरू हुआ मीडिया बाजार से

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  October 28, 2019

ऑनलाइन खुदरा कंपनी फ्लिपकार्ट ने हाल में एक वीडियो स्ट्रीमिंग सेवा शुरू की। कंपनी 'बैंकबैंचर्स' नाम से पहली मूल (ओरिजिनल) सीरीज का प्रसारण इस महीने शुरू कर रही है। बॉलीवुड फिल्म निर्माता फरहा खान इसकी प्रस्तोता होंगी। इसमें वह भारत की शीर्ष हस्तियों के साथ बातचीत करेंगी। सिखया एंटरटेनमेंट के गुनीत मोंगा शॉर्ट स्टोरीज के क्रिएटर और क्यूरेटर के तौर पर इसमें शिरकत कर रहे हैं। फ्लिपकार्ट वीडियो पर आधी से अधिक सामग्री दूसरे और तीसरे दर्ज के शहरों से होंगी। कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि इसका मकसद ऐसे इंटरनेट उपभोक्ताओं को फ्लिपकार्ट से जोडऩा है, जो ऑनलाइन खरीदारी से बहुत अधिक वाकिफ नहीं हैं। कंपनी की यह पहल कारणों से दिलचस्प हो जाती है। 

 
करीब 16 करोड़ लोगों के घर पहुंचने वाली फ्लिपकार्ट में अमेरिका की 515 अरब डॉलर हैसियत वाली दिग्गज खुदरा कंपनी वॉलमार्ट की बहुलांश हिस्सेदारी है। अमेरिका की ही एक दूसरी कंपनी एमेजॉन ने 2007 में वीडियो सर्विस शुरू की थी, जिसे हम आज एमेजॉन प्राइम वीडियो के नाम से जानते हैं। 233 अरब डॉलर हैसियत वाली एमेजॉन दुनिया की सबसे बड़ी खुदरा कंपनियों में एक है। कंपनी ने 'द फैमिली मैन' या 'मार्वेलस मिसेज मैसल' जैसे कार्यक्रमों पर लाखों डॉलर खर्च किए हैं। एमेजॉन प्राइम वीडियो 2016 में भारत में आया। दुनिया की दो सबसे बड़ी ऑनलाइन और ऑफलाइन कंपनियों ने भारत में वीडियो स्ट्रीमिंग कारोबार में अपनी खासी पैठ बना ली है। 
 
एक दूसरी अहम बात यह है कि फ्लिपकार्ट से पहले ऑनलाइन ऑर्डर लेकर खान-पान की आपूर्ति करने वाली जोमैटो भी वीडियो सेवा में उतरी है। जोमैटो ने संजीव कपूर के साथ 'फूड ऐंड यू' और जॉर्डइंडियन के साथ 'ड्यूड व्हेअर इज द फूड' सहित कार्यक्रमों की पेशकश शुरू की थी। इसके बाद जोमैटो ने पिछले वर्ष अगस्त में 'स्निक पीक' की भी शुरुआत की थी। ये कार्यक्रम केवल भारत में उपलब्ध होंगे, जहां जोमैटो 500 शहरों में कारोबार करती है। बाकी वीडियो का प्रसारण उन सभी 24 देशों के सात करोड़ लोगों तक हो सकता है, जहां कंपनी का कारोबार है। जोमैटो की इस पहल का मकसद अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना और उन्हें कंपनी के साथ समय बिताने के लिए आकर्षित करना है। पिछले वर्ष ओला ने 'ओला प्ले' की सेवा देनी शुरू की थी। इसमें यात्री थोड़ी अतिरिक्त रकम खर्च कर कैब में वीडियो सर्विस का आनंद ले सकते हैं। 
 
तीसरा कारण थोड़ा दिचलस्प और रुझान के विपरीत है। गैर-मीडिया क्षेत्र की कंपनियां ऐसे समय में वीडियो सर्विस में कदम रख रही हैं जब पूरी दुनिया में मीडिया कंपनियां सभी तरह की 'लेनदेन सेवाओं' में उतर रही हैं। ये सेवाएं प्रत्यक्ष ऑनलाइन खुदरा या ऐसी गतिविधियां हो सकती हैं, जो संभावित खरीदारों को उन वेबसाइटों तक ले जाती हैं, जहां वे खर्च करते हैं। इसके बदले इकाइयों को कमीशन या 'संबद्ध राजस्व' की प्राप्ति होती है। उदाहरण के तौर पर देश की सबसे बड़ी इंटरनेट पब्लिशर टाइम्स इंटरनेट अपने कुल राजस्व का एक तिहाई से थोड़ा अधिक हिस्सा ऐसी सेवाओं से प्राप्त करती है, जो कमीशन के रूप में राजस्व कमाती हैं। डाइनआउट, ईटी मनी या ग्रेडअप ऐसे ही उदाहरण हैं।  सवाल यह उठता है कि लाखों डॉलर रकम के निवेश से बनने वाली सामग्री के बाजार में फ्लिपकार्ट या जोमैटो के लिए क्या संभावनाएं दिख रही हैं। 
 
भारत में अनुमानित 8,000 करोड़ रुपये के ऑनलाइन वीडियो मार्केट में करीब 60 करोड़ यूजर को लुभाने के लिए 35 से अधिक ऐप एक दूसरे से प्रतिस्पद्र्धा कर रहे हैं। गूगल का यूट्यूब इनमें सबसे बड़ा है, जो हरेक महीने 26.5 करोड़ लोगों तक पहुंचता है। वर्ष 2018 में इसका राजस्व 2,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा था। डिज्नी का हॉटस्टार, वॉयाकॉम18 का वूट और नेटफ्लिक्स सहित दूसरे भी अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पूरी कसरत कर रहे हैं। ये सभी नियमित मीडिया कंपनियां हैं, जो लाइसेंस वाली एवं मूल सामग्री के जरिये विज्ञापन या सबस्क्रिप्शन राजस्व अर्जित करती हैं। जोमैटो में वरिष्ठï उपाध्यक्ष (ग्रोथ) दुर्गा रघुनाथ कहते हैं, 'हम नेटफ्लिक्स या यूट्यूब बनने की होड़ में नहीं हैं। हम किसी खास विषय-वस्तु पर कार्यक्रम बनाते हैं, इसलिए हमारा बजट सीमित है। हमारा मकसद लोगों को बाहर जाकर खाने का आनंद उठाने या घर में ही खान-पान करने से जुड़े लेने में लोगों की मदद करना है। यह लेनदेन और एक पूरी फिल्म के बजाय बजाय सर्च आधारित वीडियो है।'
 
हालांकि वैश्विक स्तर पर एमेजॉन को छोड़कर वीडियो कारोबार में हाथ आजमाने वाली गैर-मीडिया कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। वॉलमार्ट, मीडियामाक्र्ट, कार्फू, सेंसबरीज दुनिया की कुछ उन बड़ी खुदरा कंपनियों में शामिल हैं, जिन्होंने वीडियो सेवा कारोबार में दांव आजमाया है। लंदन स्थित शोध एवं सलाहकार कंपनी ओवम में पिं्रसिपल एनालिस्ट ( पे-टीवी और ओटीटी वीडिया) टोनी गनारसन कहते हैं, 'इनमें ज्यादातर सेवाएं टीवीओडी (ट्रांजेक्शन वीडियो-ऑन-डिमांड) थीं और सफल नहीं रहीं थीं। कुछेक साल मशक्कत करने के बाद लगभग सभी बंद हो गईं।' 
 
हालांकि विशुद्ध रूप से मीडिया कंपनियों के बारे में भी यह बात पूरी तरह लागू नहीं होती है। एनडीटीवी की सफल डिजिटल इकाई एनडीटीवी कन्वर्जेंस ने फैशन में विशेष खुदरा कारोबार पर हाथ आजमाया, लेकिन इसे बहुत अधिक सफलता नहीं मिली। टाइम्स इंटरनेट का ज्यादातर राजस्व 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' या 'गाना' जैसे ब्रांड से आता है। कई दूसरी सेवाओं से कमीशन राजस्व भी बढ़ रहा है। फिलहाल स्थिति साफ नहीं लग रही है। मीडिया और गैर-मीडिया कंपनियों जब तक और प्रयोग सामने नहीं आ जाए तब तक एक स्पष्टï रुझान के लिए हमें इंतजार करना होगा। 
Keyword: e commerce, flipkart, amazon, OTT,,
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