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लघु वित्त बैंकों के कारोबार में मंदी का असर नहीं

सोमेश झा /  October 28, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक से दर्जन भर अन्य लघु वित्त बैंकों को परिचालन की मंजूरी मिलने के साथ ईएसएएफ स्मॉल फाइनैंस बैंक ने मार्च 2017 में परिचालन शुरू किया था। 2018-19 में उसका शुद्ध मुनाफा तीन गुना बढ़कर 90 करोड़ रुपये हो गया है। बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ के पॉल थॉमस ने सोमेश झा से बातचीत मेंं कहा कि लघु वित्त बैंकों का काम तेज है और इन पर आर्थिक मंदी का कोई असर नजर नहीं आता। संपादित अंश...

 
ईएएसएफ स्माल फाइनैंस बैंंक सहित कुछ लघु वित्त बैंकों के लिए आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ)  लाने की नियामकीय अंतिम तिथि नजदीक आ रही है। खुद को कैसे तैयार कर रहे हैं? 
 
हमारे लिए अंतिम तिथि जुलाई 2021 है। जुलाई 2018 में हमारी शुद्ध पूंजी 500 करोड़ रुपये पार कर गई है। हमने शुरुआती तैयारियां शुरू कर दी हैं और मर्चेंट बैंंकर को काम सौंपा गया है। 
 
जब हम पिछली बार दिसंबर 2017 में मिले थे तो आपने कहा था कि विदेशी कारोबारियों से भी धन जुटाने की कवायद की जा रही है। उस दिशा में कितनी प्रगति हुई? 
 
हमने 2018 में दो बार पूंजी जुटाई है, जो कुल 364 करोड़ रुपये है। यह ज्यादातर पीएनबी मेटलाइफ, बजाज, आईसीआईसीआई लोंबार्ड सहित कुछ घरेलू बीमा कंपनियों और कुछ ज्यादा पूंजी वाले लोगोंं से जुटाई गई है। ऐसे में हमने घरेलू निवेशकोंं में बेहतर अवसर पाया है। 
 
क्या इस वित्त वर्ष में आपको और पूंजी की जरूरत है? 
 
इस समय हमारी स्थिति अच्छी है और हमारी पूंजी पर्याप्तता 26 प्रतिशत पर है। इस साल हमें अतिरिक्त पूंजी की जरूरत नहीं है। बहरहाल हम बाजार में कदम रखने की योजना बना रहे हैं और आईपीओ के माध्यम से हम धन जुटाएंगे। संपत्तियोंं के मामले में हमारी स्थिति ठीक  है। 
 
वाणिज्यिक बैंकों की स्थिति देखें तो कर्ज देने में सुस्ती है। पिछले एक साल से लघु वित्त बैंकों के क्षेत्र में क्या हो रहा है?
 
सभी लघु वित्त बैंकों कर्ज देने का हिस्सा भी बढ़ा है। हमाने पिछले एक साल में 30 प्रतिशत क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की है। लघु वित्त बैंकों के पास नकदी लगाने के कई विकल्प होते हैं, जिसकी वजह से इस क्षेत्र पर कोई असर नहीं पड़ा है। ज्यादातर लघु वित्त बैंक लघु वित्तीय संस्थानों से बने हैं। ये अभी भी छोटे कर्ज देते हैं और इनकी गैर निष्पादित संपत्तियां कम हैं। 
 
हाल के महीनों के बारे में क्या कहेंगे?
 
हम औसतन हर महीने 450-500 करोड़ रुपये कर्ज दे रहे हैं। जुलाई और अगस्त में केरल के कुछ जिलों में बाढ़ का असर दिखा और यही स्थिति मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में रही। बेहतर मॉनसून से ग्रामीण बाजार को मदद मिलेगी। हाल ही में मैं कोयंबटूर में था, और वहां किसान समूहों से बात की। बेहतर बारिश की वजह से वे फसलें बेहतर होने की उम्मीद कर रहे हैं। अगले 6 महीने में ग्रामीण मांग में सुधार होगा। 
 
रिजर्व बैंक ने दिसंबर 2018 में आपको अनुसूचित बैंक के रूप में परिचालन की अनुमति दी। क्या बदला है?
 
इसका लाभ है कि हम पंजीकृत ट्रस्ट और सोसाइटियों तक पहुंच सकेंगे। जुलाई 2018 में रिजर्व बैंक ने हमें एनआरई (नॉन रेजिटेंड एक्सटर्नल) जमा की अनुमति दी, जिससे हमें खुदरा जमा के हिसाब से गति मिली। 15 महीनों में हमारा एनआरई जमा 1,000 करोड़ रुपये से ऊपर हो गया, जो बड़ी उपलब्धि है। अन्यथा हमारे 6,150 करोड़ रुपये जमा मेंसे 90 प्रतिशत छोटे जमा थे। 
 
कॉर्पोरेट कर में कटौती का आप पर क्या असर होगा? 
 
हमारे मुनाफे में 3 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना है क्योंकि हम स्टार्टअप बैंक हैं और 25 प्रतिशत कर के दायरे में आते हैं। 
 
वित्त क्षेत्र में हाल की घटनाओं को आप किस रूप में देखते हैं? 
 
वित्तीय सेवा क्षेत्र में कुछ अनिश्चितता है। जब आप एनबीएफसी की बात करते हैं, छोटे और मझोले आकार के एनबीएफसी, जो पूरी तरह से बाजार से वित्तपोषण पर निर्भर नहीं हैं, उनके ऊपर असर नहीं पड़ा। बड़े एनबीएफसी में ढांचागत मसला अभी भी मौजूद है, और उन्हें इससे बाहर निकलने में कुछ वक्त लग सकता है। हम पहले भी सहकारी बैंकों की विफलता देख चुके हैं, लेकिन इतना व्यापक नहीं था। भविष्य में सहकारी बैंकों के लिए कड़े नियम की उम्मीद है।
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA, ESAF,
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