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एफआईआई ने घटाई निजी बैंकों में हिस्सेदारी

जश कृपलानी / मुंबई October 28, 2019

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सितंबर तिमाही में दर्जन भर निजी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है। मझोले आकार की कंपनियों और एसएमई में कर्ज पर बढ़ रहे दबाव की चिंता के बीच एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी कम की है। बीएसई 500 में शामिल मझोले आकार के निजी बैंकों में सबसे ज्यादा एफआईआई का निवेश कम हुआ है। उदाहरण के तौर पर कर्णाटका बैंक में सितंबर तिमाही में एफआईआई की हिस्सेदारी 167 आधार अंक घटकर 13.7 फीसदी रह गई, जो जून तिमाही में 15.37 फीसदी थी। इसके अलावा फेडरल बैंक (246 आधारअंक कम), सिटी यूनियन बैंक (133 आधार अंक कम), आईसीआईसीआई बैंक (117 आधार अंक कम), एचडीएफसी बैंक (80 आधार अंक कम), डीसीबी बैंक (43 आधार अंक कम), कोटक महिंद्रा बैंक (37 आधार अंक कम) और आरबीएल बैंक (20 आधार अंक) में भी एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है।
 
इन बैंकों में से डीसीबी बैंक और कर्णाटका बैंक ने सितंबर तिमाही में एसएमई लोन बुक में चूक बढऩे की बात कही है। कुछ अन्य निजी बैंकों के प्रबंधन ने भी कर्जदारों की ओर से भुगतान में देरी की वजह से एसएमई कारोबार में दबाव के संकेत दिए हैं। विदेशी ब्रोकिंग फर्म मैक्वायरी ने हालिया नोट में संकेत दिया था कि विदेशी निवेशकों के एक वर्ग का भारतीय बैंकों के प्रति नजरिया 'निराशात्मक' है। मैक्वायरी ने कहा था, 'निवेशक मझोली कंपनियों और एसएमई क्षेत्र में नए दबाव के उभरने से चिंतित हैं।' यह रिपोर्ट सिंगापुर और हॉन्ग कॉन्ग के 40 निवेशकों से बातचीत पर तैयार की गई थी।
 
विश्लेषकों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में नरमी की वजह से एसएमई खंड पर दबाव बढऩे की आशंका है, जिससे इन कंपनियों में कर्ज निवेश वाले बैंकों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। निजी क्षेत्र के बैंकों के मामले में एमएसएमई उपक्रमों के कर्ज में गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) की हिस्सेदारी 2018-19 में बढ़कर 2.91 फीसदी हो गई जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 2.69 फीसदी थी। विश्लेषकों का कहना है कि दबाव वाले कर्ज बढऩे से बड़े आकार के बैंकों की तुलना में मझोले आकार के बैंकों की बैलेंस शीट ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। यही वजह है कि विदेशी निवेशक अपेक्षाकृत छोटे निजी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है।
 
आईआईएफएल में शोध प्रमुख अभिमन्यु सौफत ने कहा, ''न केवल मझोले आकार के बैंकों को उच्च स्तर के विकास को बरकरार रखने में कठिनाइ का सामना करना पड़ रहा है बल्कि उनकी संपत्ति की गुणवत्ता का जोखिम भी बढ़ रहा है। ऐसे में एफआईआई ऐसे बैंकों को लेकर अल्पावधि में सतर्क नजरिया अपना रहे हैं।'  इस बीच एफआईआई ने कुछ सरकारी बैंकों पर अपना दांव लगाया है। पंजाब नैशनल बैंक में एफआईआई की हिस्सेदारी 13 आधार अंक बढ़कर 3.45 फीसदी हो गई। इसी तरह केनरा बैंक में एफआईआई की हिस्सेदारी 27 आधार अंक बढ़कर 4.5 फीसदी हो गई। बीएसई 500 में शामिल बैंकों में से एफआईआई ने आठ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। 
 
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बेहतर स्थिति में हैं क्योंकि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां अपनी विकास की रफ्तार गंवा रही हैं। सौफत ने कहा, 'इनमें से कुछ के शेयर अपनी बुक वैल्यू से आधे पर कारोबार कर रहे हैं। साथ ही उनमें चूक के मामले भी कम हुए हैं।'
Keyword: bank, loan, debt, NPA, FII,,
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