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व्हिसलब्लोअर से जुड़ी घटनाओं का हो अनुभवजनित अध्ययन

बाअदब
सोमशेखर सुंदरेशन /  October 25, 2019

एक बार फिर एक सूचीबद्घ कंपनी के खिलाफ एक व्हिसलब्लोअर ने शिकायत की है। एक बार फिर हालात को संभालने की घबराहट भरी कवायद नजर आएगी। हो सकता है इससे कुछ हासिल हो या न भी हो। बहरहाल नीति निर्माताओं को एक आवश्यकता पर काम करना होगा: व्हिसलब्लोअर नीति को लेकर एक ऐसे कानूनी ढांचे का निर्माण जो इस अवधारणा के तमाम पहलुओं से निपटता हो। व्हिसलब्लोअर की ऐसी शिकायतों से निपटने के तमाम कानून और प्रक्रियाएं स्वत: स्फूर्त ढंग से विकसित हुई हैं और इन्हें कानूनी सहायता प्राप्त नहीं है। कंपनी कानून और प्रतिभूति नियमन के लिए निकायों के भीतर एक व्हिसलब्लोअर नीति की आवश्यकता है। इसके बावजूद व्हिसलब्लोअर का काम और इनका प्रबंधन दोनों अत्यंत नाजुक क्षेत्र हैं। अगर गलत तरीके से प्रबंधन किया गया तो यह उन संस्थानों में लोगों को शिकार बनाने का जरिया बन सकता है जहां जी हुजूरी करने वालों का बोलबाला है। या फिर इसके चलते पूरे संगठन तंत्र को शिकार बनाया जा सकता है। 

 
एक वक्त था जब भारत सरकार की स्पष्ट नीति थी जिसके तहत गुमनाम या छद्म शिकायतों की अनदेखी की जाती थी। जब तक शिकायत किसी व्यक्ति द्वारा नहीं की जाती थी तब तक जांच नहीं होती थी। सार्वजनिक सेवा में काम के हर घंटे के दौरान ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जो किसी को निराश करते हैं। ऐसे में एक संस्थान तब तक नहीं चल सकता है जब तक कि ऐसे निर्णयों के कारण हुई निराशा को लेकर संरक्षण की व्यवस्था न हो। इसके बावजूद गुमनाम शिकायतों या पत्रों को आधार बनाकर उठाए जाने वाले गंभीर कदमों की कोई कमी नहीं। अब इसमें छद्म शिकायतें भी शामिल हो गई हैं। शिकायत की विषयवस्तु जितनी गंभीर होती है, गुमनाम या छद्म होने के आधार पर उस शिकायत की अनदेखी करना उतना ही मुश्किल होता है। 
 
कॉर्पोरेट बोर्ड में इस तरह की शिकायत और अधिक देखने को मिलती हैं। हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि किसी भी स्रोत से आ रहा प्रकाश रौशनी दे सकता है। ऐसे में जब शिकायत गुमनाम या छद्म होती है तो निदेशक मंडल को सीईओ के व्यक्तित्व और संस्थान में काम के माहौल पर ध्यान देना चाहिए। सीईओ जितना मजबूत (पढ़ें स्वेच्छाचारी) होगा, शिकायतकर्ता के लिए अपनी पहचान छिपाना उतना ही आवश्यक होगा। सीईओ जितना समावेशी और समायोजन करने वाला होगा और वह कार्यस्थल पर विविधता का जितना हामी हो, निदेशक मंडल को गुमनाम या छद्म शिकायतों को लेकर उतनी ही सख्ती बरतनी चाहिए। हालांकि यह कहना आसान है करना मुश्किल। 
 
किसी शिकायत की जांच में एक भावना बहुत गहरे तक शामिल रहती है। वह है यह जानने की इच्छा कि आखिर शिकायतकर्ता कौन है। नेतृत्व जितना सख्त होगा, व्हिसलब्लोअर की सुरक्षा को उतना ही जोखिम होगा। व्हिसलब्लोअर का संरक्षण और उसे लेकर संगठन के रवैये से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि संगठन की प्रकृति क्या है। जो एक व्यक्ति के लिए सुधारक है वह दूसरे के लिए धोखेबाज हो सकता है। अमेरिका की कारोबारी जगत से जुड़ी नीतियों ने दुनिया को सोचने पर मजबूर किया। उसने व्हिसलब्लोअर की चिंताओं का इस्तेमाल कॉर्पोरेट जगत के भ्रष्टाचार से जुड़ी चिंताओं से निपटने में किया लेकिन जब मामला सरकार की गड़बडिय़ों से जुड़े मामले उजागर करने का होता है तो अमेरिका का अधिनायकवादी स्वरूप सामने आता है। एडवर्ड स्नोडेन तथा उनके जैसे अनेक लोगों की दुर्दशा इसका उदाहरण है। समान सोच वाले ऐसे तमाम लोग जेलों में कैद हैं। अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति अपने कार्यालय में व्हिसलब्लोअर की भरोसेमंद शिकायतों की जांच न होने देने के हिमायती हैं। 
 
मौजूदा समय में जिन कंपनियों का सरकार से कोई लेनादेना नहीं है उन्हें भी व्हिसल ब्लोअर की शिकायतों से निपटना है। बल्कि उन्हें एक ऐसा ढांचा तैयार करना चाहिए जहां शिकायतकर्ता बिना किसी भय या अपनी पहचान की आशंका के बिना आकर शिकायत कर सके। अपारदर्शी तरीके से की गई शिकायतों को गंभीरता से न लेने से आगे बढ़ते हुए बाजार अब इसे अवैध मानने तक आ पहुंचा है। अब मांग यह की जा रही है व्हिसल ब्लोअर की पहचान सुनिश्चित हो। अब वक्त आ चुका है कि इस बात का व्यापक अनुभवजनित अध्ययन किया जाए कि देश में व्हिसलब्लोअर नीतियों का किस प्रकार इस्तेमाल और दुरुपयोग हो रहा है तथा कॉर्पोरेट जगत इनसे संगठनात्मक रूप से कैसे निपट रहा है। व्हिसलब्लोअर की शिकायतों से निपटने के लिए आदर्श तरीका अपनाने और इन शिकायतों से निपटने के संगठनों के तरीकों पर कानूनी दृष्टि को देखना इस विषय में कानून प्रवर्तन की दिशा में काफी अहम हो सकता है। आज निदेशक मंडलों पर भी आरोप लगते हैं कि वे इन शिकायतों से सही ढंग से नहीं निपटते। कहा जाता है कि वे या तो सतही शिकायतों को अत्यधिक गंभीरता से ले लेते हैं या फिर अहम शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते। इनसे निपटने को लेकर कानून में जितनी अपारदर्शिता रहेगी, देश में कारोबारी सुगमता की स्थिति भी उतनी ही खराब रहेगी। 
Keyword: whistleblower, law,,
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