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एजीआर पर आदेश से कंपनियों को झटका

रोमिता मजूमदार और राम प्रसाद साहू / मुंबई October 24, 2019

दूरसंचार क्षेत्र की मुश्किलें खत्म होती नजर नहीं आ रही है। गुरुवार को आए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश ने इन कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ा दी है। समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) पर अदालत का फैसला इन कंपनियों के खिलाफ आया है जिसके बाद उन्हें इस मद में 92,641 करोड़ के बकाये का भुगतान करना होगा। 

लंबे वक्त से एजीआर की परिभाषा को लेकर दूरसंचार कंपनियों और दूरसंचार विभाग के बीच विवाद बना हुआ था। दूरसंचार कंपनियां लाइसेंस शुल्क और स्पेटक्ट्रम शुल्कों को राजस्व हिस्सेदारी के तौर पर सरकार को देती हैं। साधारण शब्दों में कहें तो राजस्व की वह रकम जिसका उपयोग इस राजस्व हिस्सेदारी की गणना के लिए की जाती है एजीआर कहलाता है। जबकि दूरसंचार विभाग मानता है कि बैंक जमाओं आदि जैसे स्रोतों से अर्जित आय को भी एजीआर में सम्मिलित किया जाना चाहिए। जबकि दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि इसके लिए केवल प्रमुख दूरसंचार सेवाओं से अर्जित आय पर ही विचार किया जाना चाहिए।  

उद्योग के साझेदारों ने इस फैसले पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उनका कहना है कि फिलहाल भारतीय दूरसंचार टैरिफ अभी दुनिया भर के दूसरे देशों में वसूले जाने वाले सबसे कम टैरिफों में से एक है। इस बीच विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपिनयां भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (वीआईएल) बुरी तरह से प्रभावित होंगी। सबसे अधिक धक्का वोडाफोन आइडिया को लगेगा। हालांकि, इस असर का दायरा इस पर निर्भर करेगा कि सरकार कब इसकी वसूली करती है और भुगतानों का आकार कितना है।

रिलायंस सिक्योरिटीज के रिसर्च प्रमुख नवीन कुलकर्णी ने कहा, 'इस फैसले का असर दूरसंचार कंपनियों के लिए विनाशकारी साबित होने वाला है। सबसे बुरा असर वोडाफोन आइडिया पर पड़ेगा जिन्हें 28,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करना है।' 

92,641 करोड़ रुपये में से करीब 50,000 करोड़ रुपये का बकाया मौजूदा निजी दूरसंचार परिचालकों पर है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक वीआईएल पर 28,308 करोड़ रुपये, एयरटेल पर 21,682 करोड़ रुपये का बकाया है जबकि इस उद्योग में उतरी सबसे नई कंपनी रिलायंस जियो पर 13 करोड़ रुपये का बकाया है जिसका भुगतान दूरसंचार विभाग को किया जाना है।   

बाकी 40,540 करोड़ रुपये का बकाया उन कंपनियों पर हैं जो या तो बंद हो चुकी हैं या फिर कर्ज समाधान प्रक्रियाओं से गुजर रहीं हैं। इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस पर 10,456 करोड़ रुपये, एयरसेल पर 7,852 करोड़ रुपये और टाटा टेलीसर्विसेज पर 9,987 करोड़ रुपये का बकाया है। उल्लेखनीय है कि ये कंपनियां बाजार में रिलायंस जियो के कदम रखने के बाद से बंद हुई हैं और बचे हुए परिचालकों को लगातार भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

92,641 करोड़ रुपये में से केवल 25 फीसदी ही वास्तविक बकाया है। बाकी रकम ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज है। एमके ग्लोबल के शोध विश्लेषक नवल सेठ ने लिखा, 'हमारा अभी भी मानना है कि खराब होती वित्तीय सेहत, ग्राहकों की घटती संख्या और एकीकरण में बनी हुई बाधाओं की वजह से वीआईएल एक लचर कंपनी बनी हुई है। वीआईएल पर बढ़ी हुई वित्तीय दबाव से भारती और रिलांयस जियो के लिए संभावित दो कंपनियों का अधिकार वाले बाजार के लिए वैकल्पिक मूल्य तैयार होगा जो पहले से ही जारी है।' 
Keyword: Jio, Aircel, Bharti Airtel,Vodafone, Idea, AGR, Spectrum Tariff, Supreme Court, SC, Telecom Department,
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