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अंकेक्षकों की भूमिका जांचेगा सेबी, आरबीआई

देव चटर्जी / मुंबई October 24, 2019

बाजार नियामक सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक यह समझने के लिए अंकेक्षण फर्म टी पी ओस्तवाल की राय जानने की योजना बना रहा है कि ऑडिट फर्म ने इस साल मार्च में दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) को कैसे क्लिन चिट दे दी, जब मीडिया वेबसाइट कोबरापोस्ट ने खुलासा किया था कि डीएचएफएल के प्रवर्तकों ने कंपनी से रकम की हेराफेरी की है।

कोबरापोस्ट के खुलासे के कुछ ही दिन के भीतर ओस्तवाल को डीएचएफएल बोर्ड में नियुक्त किया गया था। ओस्तवाल की रिपोर्ट 5 मार्च को डीएचएफएल ने स्टॉक एक्सचेंजों के साथ साझा किया और तब से डीएचएफएल का शेयर लगातार टूट रहा है और उसके शेयरधारकों ने 86 दिन हुई गिरावट के कारण अपने बाजार कीमत में 3,600 करोड़ रुपये गंवा दिए।

जुलाई में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से शुरू हुए फॉरेंसिक ऑडिट और केपीएमजी के फॉरेंसिक ऑडिट में पुष्टि हुई कि प्रवर्तकों ने 20,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है और कई मामलों में डीएचएफएल की तरफ से 40 इकाइयों को दी गई उधारी का सही रिकॉर्ड भी नहीं रखा गया। नियामक डेलॉयट की भी राय चाहेगा जो 2015 से 2019 के दौरान डीएचएफएल की अंकेक्षक थी, जब फॉरेंसिक ऑडिट हुआ था। संपर्क किए जाने पर ओस्तवाल ने टिप्पणी करने से मना कर दिया।

अपनी रिपोर्ट में टी पी ओस्तवाल ऐंड एसोसिएट्स ने 26 संबंधित इकाइयों को 11,520 करोड़ रुपये कर्ज दिए जाने के मामले में क्लीन चिट दी है। टी पी ओस्तवाल ऐंड एसोसिएट्स ने रिपोर्ट में कहा है, कंपनी ने कथित तौर पर 26 मुखौटा कंपनियों का प्रवर्तन नहीं किया है, जो उसके कर्जदार हैं। इसके अलावा उन इकाइयों में प्रवर्तक समूह के सदस्य समेत कोई भी एकसमान निदेशक नहीं हैं। इसके अलावा कंपनी या प्रवर्तकों के पास इन कंपनियों की कोई हिस्सेदारी नहीं है, न ही ये इकाइयां कंपनी की शेयरधारक हैं।

इसके मुताबिक आरोपों की पुष्टि करने के लिए संकेतक नहीं हैं कि कंपनी ने रकम की हेराफेरी के लिए मुखौटा कंपनियों का गठन किया। जून में हॉन्ग कॉन्ग की शोध फर्म रीड इंटेलिजेंस ने कहा कि संबंधित पक्षकारों को दिए गए फंड छुपाने के लिए डीएचएफएल समेत कई भारतीय एनबीएफसी ने बॉक्स कंपनियां गठित की। 7 जून की रिपोर्ट में रीड इंटेलिजेंस ने कहा कि अन्य एनबीएफसी ने भी कर्ज के रोलओवर के लिए ऐसे ही ढांचे का इस्तेमाल किया और प्राधिकरण या शेयरधारकों को इसकी सूचना नहीं दी, जो सेबी व आरबीआई के खुलासा नियमों का उल्लंघन है।

डीएचएफएल के मामले में तीन बॉक्स कंपनियां हैं - हेमिस्फेयर, गैलेक्सी और सिलिकन। तीन बॉक्स कंपनियों के पास मार्च 2018 में डीएचएफएल के 3.11 करोड़ शेयर यानी डीएचएफएल की करीब 9 फीसदी हिस्सेदारी थी और इन शेयरों को बाजार में बेच दिया गया। पूरे साल तीनों कंपनियों ने शेयर बेचे और इस तरह से जून के आखिर तक 40 लाख शेयर निपटाए और सितंबर तक उनकी हिस्सेदारी 76.5 लाख शेयर और कम हो गई, साथ ही मार्च 2019 तक रजिस्टर में यह नजर नहीं आया।

रीड ने कहा कि जब कंपनियां ऐसे ढांचे का इस्तेमाल करती हैं तब खाता बही की जांच करने वाले अंकेक्षकों के लिए इसके वास्तविक लाभार्थी का पता लगाना मुश्किल होता है।

उसने कहा है कि डीएचएफएल ने चार छद्म कंपनियों अर्लीन रियल एस्टेट डेवलपर्स, एडविना रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, नोशन रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और प्रशुल रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को 2,000 करोड़ रुपये उधार दिए। इन कंपनियों ने बाद में दर्शन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के शेयर खरीदे, जो वधावन रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की सहायक है और इसका स्वामित्व संस्थापकों के पास है।
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