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महाराष्ट्र में भाजपा गठबंधन वापस, हरियाणा में आगे

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली October 24, 2019

हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एकतरफा जीत के दावे किए जा रहे थे लेकिन आज आए नतीजे पार्टी की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे हैं। करीब 150 दिन पहले हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा और सहयोगी दलों ने जबरदस्त जीत दर्ज की थी लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा के मतदाताओं ने उसे झटका दे दिया। 

भाजपा का चुनावी प्रचार मुख्य रूप से अनुच्छेद 370 खत्म करने के इर्दगिर्द था लेकिन मतदाताओं ने स्थानीय मुद्दों को ज्यादा तरजीह दी। इन चुनावों से विपक्ष खासकर कांग्रेस के दिग्गज मजबूत बनकर उभरे हैं। शरद पवार तथा भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे क्षेत्रीय नेताओं के राजनीतिक करियर को संजीवनी मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है जो इस बात का प्रमाण है कि पार्टी ने इन राज्यों में साफ सुथरी सरकार दी है। 

उन्होंने कहा कि पार्टी दोनों राज्यों के विकास के लिए काम करती रहेगी। हरियाणा में पार्टी को पिछली बार से तीन फीसदी ज्यादा वोट मिले लेकिन वह बहुमत से दूर रह गई। मनोहर लाल खट्टर सरकार के नौ मंत्री चुनाव हार गए। कांग्रेस ने इसे भाजपा की नैतिक हार बताया और विपक्षी दलों से हरियाणा में मिलकर सरकार बनाने की अपील की। हालांकि भाजपा राज्य में निर्दलीयों और छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बना सकती है। भाजपा ने 90 सदस्यीय हरियाणा में 40 सीटें जीती हैं और उसे बहुमत के लिए छह विधायकों की जरूरत है। महाराष्ट्र में भाजपा ने 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि शिवसेना ने 124 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।  

288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा 104 सीटों पर आगे है और बहुमत से बहुत पीछे है। इस बीच उसकी सहयोगी पार्टी शिव सेना ने मोलभाव करना शुरू कर दिया है। पार्टी प्रमुख उद्घव ठाकरे ने भाजपा को उसका वादा याद दिलाया है।

उन्होंने कहा, 'भाजपा को वह फॉर्मूला याद दिलाने की जरूरत है जो उस समय तय हुआ था जब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह मेरे घर आए थे। हमने गठबंधन के लिए 50-50 फॉर्मूला तय किया था।' उद्घव के पुत्र आदित्य ठाकरे पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। शिवसेना प्रमुख ने कहा, 'हमने भाजपा से कम सीटों पर चुनाव लडऩे पर सहमति जताई थी लेकिन हम हर बार भाजपा की बात नहीं मान सकते हैं। मैं अपनी पार्टी को भी बढऩे देना चाहता हूं।'

शिवसेना आधे समय के लिए मुख्यमंत्री पद पर अपने नेता को बैठाना चाहती है। विपक्ष भी इसमें अपनी संभावना टटोल रहा है। उसका कहना है कि शिव सेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को मिलकर सरकार बनानी चाहिए। पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी और भाजपा प्रमुख अमित शाह ने संकेत दिया कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस और हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर अपने पद पर बरकरार रहेंगे। मोदी ने कहा कि इन दोनों नेताओं के पास अनुभव नहीं था लेकिन इसके बावजूद उन्होंने साफ सुथरी सरकार दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सहयोगी दलों को साथ लेने में विश्वास करती है। यह इस बात का संकेत है कि भाजपा और शिवसेना के बीच समझौता होगा। 

इन चुनावी नतीजों ने शरद पवार और भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे क्षेत्रीय नेताओं को भी संजीवनी देने का काम किया है। पवार की राकांपा ने महाराष्ट्र में अपना प्रदर्शन सुधारते हुए 54 सीटें जीती जबकि हुड्डा हरियाणा में कांग्रेस को 31 सीटें जिताने में सफल रहे। हुड्ड ने कांग्रस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके करीबी नेताओं के साथ तकरार के बावजूद यह सफलता हासिल की।  

खासकर हरियाणा के नतीजों से कांग्रेस में पुराने नेताओं के हाथ मजबूत हुए हैं। हुड्डा ने हरियाणा में राहुल गांधी की एकमात्र जनसभा का बहिष्कार किया था। उन्होंने पार्टी के रुख से हटते हुए अनुच्छेद 370 को खत्म करने के फैसले का स्वागत किया था।

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