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सोने में तेजी का दौर रहेगा 3-4 साल : विश्लेषक

संजय कुमार सिंह /  October 23, 2019

विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में तेजी के कारक मजबूत बने हुए हैं, इसलिए खरीदार धनतेरस पर पीली धातु की आगे की संभावनाओं को लेकर चिंता किए बिना खरीदारी कर सकते हैं। इस समय इक्विटी और रियल एस्टेट कमजोर हैं। लेकिन सोना उन कुछ परिसंपत्तियों में से एक है, जो निवेशकों के पोर्टफोलियो को मजबूती दे रहा है। इस समय सोने का भाव 38,177 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इस पीली धातु ने पिछले एक साल में निवेशकों को 20.3 फीसदी प्रतिफल दिया है। न केवल भारत बल्कि दुनियाभर में आर्थिक मंदी का संकट गहरा रहा है, जिसे सोने की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण माना जा रहा है। दूसरी वजह व्यापार युद्ध है। क्वांटम म्युचुअल फंड के वरिष्ठ फंड प्रबंधक (वैकल्पिक निवेश) चिराग मेहता ने कहा, 'आगे अमेरिका और चीन के बीच सुलह हो सकती है। अमेरिका में 2020 में राष्ट्रपति चुनाव होने है और डॉनल्ड ट्रंप मतदाताओं को यह दिखाना चाहेंगे कि सब चीजें उनके नियंत्रण में हैं। लेकिन हम पहले भी उनको अपनी बातों से पलटते हुए देख चुके हैं। व्यापार युद्ध को लेकर दोनों वैश्विक शक्तियों के बीच रस्साकशी जारी है और यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहेगी।' इतना ही नहीं, अब व्यापार युद्ध के जद में मैक्सिको, यूरोप और यहां तक कि भारत भी आ गया है, इसलिए इनका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दुष्प्रभाव बने रहने के आसार हैं। 

 
केंद्रीय बैंकों के कदमों से भी सोने को सहारा मिलने की संभावना है। अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने इस साल सितंबर में वर्ष 2008 के बाद दूसरी बार दरों में कटौती की है। पहली कटौती जुलाई में की गई थी। केडिया कमोडिटीज के निदेशक अजय केडिया ने कहा, 'अमेरिका में दरों में कटौती पर जल्द विराम लगने के आसार नहीं हैं, जिससे सोने में लंबी अवधि की तेजी शुरू हो सकती है।'  अगर वैश्विक आर्थिक मंदी जारी रहती है तो केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति को उदार बना सकते हैं। वे ऐसे हालात में ब्याज दरों में कटौती करेंगे। अमेरिका सहित बहुत से देश ऋणात्मक ब्याज दरों की तरफ बढ़ सकते हैं। निवेशक वास्तविक ब्याज दरों के ऋणात्मक होने के माहौल में सोने की खरीदारी करेंगे। 
 
दुनियाभर में अच्छे निवेशक सोने में पैसा लगा रहे हैं। केडिया ने कहा, 'विश्व के सबसे बड़े स्वर्ण एक्सचेंज ट्रेडेड फंड एसपीडीआर के पास जमा सोना बढ़ा है। इसके अलावा रूस, तुर्की, चीन और भारत के केंद्रीय बैंक पिछले 2-3 साल से सोने की खरीद कर रहे हैं।' भूराजनीतिक तनावों के बढऩे से निवेशकों का सोने की तरफ रुझान और बढ़ेगा। हालांकि कुछ ऐसे भी कारक हैं, जो सोने की कीमतों में मजबूती की संभावनाओं पर पानी फेर सकते हैं। उदाहरण के लिए व्यापार युद्धों का सौहार्दपूर्ण ढंग से समाधान निकल सकता है। हालांकि इसकी संभावनाएं कम हैं। डॉलर मजबूत है क्योंकि अन्य मुद्राएं कमजोर हैं। अगर डॉलर में मजबूती जारी रही तो सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में अपील कमजोर पड़ेगी। हालांकि विशेषज्ञ लंबी ïअवधि में यह स्थिति नहीं बने रहने के आसार जता रहे हैं। सोने की कीमतों में तेजी पर अंकुश लगा सकने वाला अंतिम कारक रिसाइकल्ड सोने की भारी आपूर्ति है। 
 
केडिया ने कहा, 'भारत और चीन में सोने का बड़ा भंडार है। जब अचानक कीमतों में तेजी आती है तो ग्राहक पुराने सोने के बदले नया सोना खरीदने लगते हैं। इससे नए सोने की मांग घट जाती है।' निवेशकों को हमेशा अपने पोर्टफोलियो में 10 से 15 फीसदी सोना रखना चाहिए। वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के भंवर में फंसी हुई है, इसलिए पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा बढ़ाकर 20 फीसदी किया जा सकता है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको 5 फीसदी अतिरिक्त आवंटन के लिए निवेश की समयावधि कम से कम तीन से पांच साल रखनी चाहिए। आखिर में इस बात की चिंता न करें कि सोना 20 फीसदी चढ़ चुका है, इसलिए इसमें आगे बढ़त के आसार नहीं हैं। केडिया ने कहा, 'सोने ने पिछले एक साल में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन यह उससे पहले पांच साल तक स्थिर बना हुआ था। आम तौर पर सोने की तेजी का चक्र कम से कम तीन से चार साल तक बना रहता है। 
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