बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंकों में 5 दिन काम की मांग खारिज
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बैंकों में 5 दिन काम की मांग खारिज

सोमेश झा / नई दिल्ली October 23, 2019

इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) ने कर्मचारी संगठनों की ओर से सप्ताह में 5 दिन बैंक खोलने की मांग औपचारिक रूप से खारिज कर दी है। साथ ही उसने वेतन में 12 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी करने में भी असमर्थता जताई है। बैंकों के प्रबंधन ने यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के तहत कर्मचारियों के संगठनों के कुछ सुझावों से असहमति जताई है। बैंक प्रबंधन के संगठन आईबीए ने यूनियनों से कहा है कि वेतन में 12 प्रतिशत बढ़ोतरी करने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर 6,300 करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना बोझ पड़ेगा। 
 
एक सरकारी बैंंक के मुख्य कार्यकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'बैंक प्रबंधन का मानना है कि सप्ताह में 5 दिन काम का नियम लागू करने के लिए यह उचित समय नहीं है, जब कर्जदाता और बैंक साथ मिलकर वित्तीय समावेशन की दिशा में काम कर रहे हैं।' यूनियनों की लंबे समय से सप्ताह में 5 दिन काम करने की मांग रही है। सितंबर 2015 से आईबीए सहमत हो गया था कि बैंकों की शाखाएं दूसरे व चौथे शनिवार को  हर महीने बंद रहेंगी। अधिकारी ने कहा, 'सरकारी बैंक ग्रामीण व उपनगरीय क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं और अगर कार्यदिवस में और कमी की जाती है तो इससे उपभोक्ताओं से जुड़ाव कम होगा। खासकर ऐसे वक्त में ऐसा होगा जब प्रत्यक्ष नकदी अंतरण योजनाओं पर बड़े पैमाने पर ध्यान दिया रहा है।'
 
सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्रालय के तहत आने वाला वित्तीय सेवा विभाग महीने में 3 शनिवार को बैंक बंद रखने के पक्ष में है, लेकिन वह इस प्रस्ताव पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। बैठक में शामिल रहे एक व्यक्ति ने कहा, 'वित्त सचिव राजीव कुमार और बैंक ऑफिसर्स यूनियन की 23 सितंबर को हुई बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई थी।'  आईबीए और यूएफबीयू के  बीच वेतन को लेकर चर्चा चल रही है, जिसमें वेतन में बढ़ोतरी, कार्यदिवस की संख्या व वेतन से जुड़े अन्य मसले तथा पेंशन का पुनर्गठन शामिल है। 
 
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव नागराजन एस ने कहा, 'दो आधार पर 5 कार्यदिवस की संभावना बनती है। पहला कि ग्राहक वैकल्पिक चैनलों का इस्तेमाल करें और दूसरा डिजिटल पहुंच बढ़े। यह मसला हमारे लिए अहम है।'  आईबीए ने इसके पहले 18 अक्टूबर को हुई बैठक में कहा था कि वेतन में 12 प्रतिशत बढ़ोतरी करने से भारतीय स्टेट बैंक सहित सभी सरकारी बैंकों को मिलाकर 6,319 करोड़ रुपये बोझ बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर सुपरएनुएशन लाभों की लागत भी शामिल कर ली जाए तो कुल लागत 31 मार्च 2017 तक 11,865 करोड़ रुपये आएगी। यह राशि बहुत ज्यादा है, जिस पर संगठनों को समाधान निकालना है। 
 
वेतन में बढ़ोतरी नवंबर 2017 से लंबित है। अक्टूबर 2017 में इसके पहले हुआ त्रिपक्षीय समझौता खत्म हो गया था। इसके पहले वेतन में बदलाव 2012 में किया गया था, जो 1 नवंबर 2012 से 31 अक्टूबर 2017 तक के लिए था। 2012 में वेतन में हुए आखिरी बदलाव में बैंक कर्मचारियों के वेतन में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई थी। ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा, 'हमने 12 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी का आईबीए का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। अगर आईबीए हमारी अन्य मांगों से सहमत हो जाती है तो हम इस पर फैसला करेंगे, जिसमें फेमिली पेंशन फॉर्मूले में सुधार, विशेष भत्तों का मूल वेतन में विलय के अलावा अन्य मांगें शामिल हैं।' 
 
वेतन पर चर्चा के लिए बैठक के दौरान आईबीए ने शुरुआत में वेतन में 2 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा, जो उसके बाद बढ़ाकर 6 प्रतिशत, फिर 10 प्रतिशत और अब 12 प्रतिशत कर दिया है। आईबीए ने प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना का भी प्रस्ताव रखा है, जो सरकारी बैंक कर्मियों पर पहली बार लागू किया जाएगा। वेंकटचलम ने कहा कि यूनियन इस मसले पर जल्द ही अपनी सिफारिशें आईबीए को सौंपेगा। 
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