बिजनेस स्टैंडर्ड - सुजलॉन के कर्ज का होगा समाधान
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सुजलॉन के कर्ज का होगा समाधान

श्रेया जय और सोमेश झा / नई दिल्ली October 23, 2019

भारत की प्रमुख विंड टर्बाइन निर्माता सुजलॉन एनर्जी दिवालिया प्रक्रिया से बच सकती है, क्योंकि कंपनी के ऋणदाता कर्ज पुनर्गठन के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को दिवालिया प्रक्रिया के विकल्प से बचने का केंद्र सरकार का फरमान कंपनी के पक्ष में साबित हो रहा है। सुजलॉन पर 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और वह प्रवर्तक हिस्सेदारी घटाकर नए निवेशक तलाश रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के एक प्रमुख बैंक के अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि सुजलॉन के ऋणदाता कई विकल्प तलाशने के लिए बातचीत कर रहे हैं जिनसे ऋण पुनर्गठन के जरिये कंपनी के परिचालन को पुनर्जीवित करने में मदद मिल सकती है और वह दिवालिया संबंधी अदालत जाने से बच सकती है। कंपनी के ऋणदाताओं में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नैशनल बैंक, यूनियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा मुख्य रूप से शामिल हैं।
 
बैंक के अधिकारी ने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कंपनी कर्ज की सही मात्रा के साथ अनुकूल स्थिति में आए। मौजूदा समय में उस पर कर्ज का स्तर अस्थिर दिख रहा है।' उन्होंने कहा कि बैंक कंपनी का कर्ज घटाकर उस स्तर पर लाने के लिए बातचीत कर रहे हैं जो उसके नकदी प्रवाह के अनुरूप हो और कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार आए। जून 2019 में समाप्त तिमाही में सुजलॉन ने 337 करोड़ रुपये का शुद्घ नुकसान और 833 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया था। जून 2019 में कंपनी का समेकित शुद्घ कर्ज (एफसीसीबी समेत) 7,751 करोड़ रुपये और उसका कार्यशील पूंजी ऋण 4,000 करोड़ रुपये पर था। इस साल जुलाई में सुजलॉन अपने बॉन्डधारकों को 17.2 करोड़ डॉलर के विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (एफसीसीबी) के भुगतान में विफल रही, जिसकी आखिरी तारीख 16 जुलाई थी। 17.2 करोड़ डॉलर की रकम वर्ष 2014 में पहली बार पुनर्गठित बॉन्ड सीरीज का हिस्सा थी।
 
सुजलॉन के प्रवक्ता ने एक ईमेल संदेश के जवाब में कहा कि ऋणदाता कंपनी के साथ मिलकर समाधान योजना पर काम कर रहे हैं। कंपनी ने जुलाई में एक्सचेंजों को यह भी जानकारी दी थी कि ऋणदाता अंतर-लेनदार समझौता पहले ही कर चुके हैं और आरबीआई के 7 जून 2019 के सर्कुलर के संदर्भ में ऋणदाताओं के पास कोई कठोर कदम उठाने से पहले समाधान योजना पर काम करने के लिए जनवरी 2020 तक का समय है। पीएसबी के मुख्य अधिकारियों ने पिछले सप्ताह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी और आईबीसी से संबंधित अपनी चिंताओं से उन्हें अवगत कराया था। वित्त मंत्री ने हाल में बैंकों को यह निर्देश जारी कर आईबीसी से अलग वैकल्पिक समाधान व्यवस्था पर विचार करने को कहा।  नया निवेशक लाने की सुजलॉन की कोशिशें भी रंग नहीं ला पा रही हैं। कई खबरों में कहा गया कि वेस्टास विंड सिस्टम्स और निजी इक्विटी फर्म बु्रकफील्ड के साथ वार्ताएं आगे नहीं बढ़ पाई हैं। निवेश घटाने के पिछले प्रयासों में, दिलीप सांघवी ने 2015 में कंपनी में 1800 करोड़ रुपये में 18 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। 
 
(अमृता पिल्लई के साथ)
Keyword: power, electric, suzlon, wind,,
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