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'शानदार मुलाकात के लिए शुक्रिया'

निवेदिता मुखर्जी /  October 22, 2019

इस वर्ष के नोबेल पुरस्कार विजेता और भारत में जन्मे अभिजित बनर्जी ने मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया कि यह एक शानदार मुलाकात थी और 'भारत को अपनी उपलब्धियों पर गर्व है।' बनर्जी के साथ नोबेल पुरस्कार पाने वालों में उनकी पत्नी एस्टर डफ्लो और माइकल क्रेमर भी शामिल हैं। हालांकि नोबेल पुरस्कार पाने वाली सबसे युवा डफ्लो इस मुलाकात के दौरान मौजूद नहीं थीं।  प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'नोबेल पुरस्कार के लिए चयनित अभिजित बनर्जी के साथ शानदार मुलाकात। मानव सशक्तीकरण के प्रति उनका जुनून स्पष्ट तौर पर दिखाई देता है। हमारे बीच विभिन्न विषयों पर अच्छी और गहन चर्चा हुई। भारत को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है। भविष्य के लिए मेरी शुभकामनाएं।'

 
बनर्जी ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया, लेकिन सोशल मीडिया पर नहीं। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'धन्यवाद प्रधानमंत्री.... यह एक शानदार अनुभव था।' प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत के बारे में पूछने पर बनर्जी ने कहा कि वह किसी भी विवादास्पद विषय में नहीं पड़ेंगे क्योंकि प्रधानमंत्री ने उन्हें इसे लेकर आगाह किया है। हालांकि बनर्जी ने बातें बिखेरने की कोशिश करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने यह कहकर बातचीत शुरू की कि मीडिया कैसे उन्हें 'मोदी विरोधी बातें' कहने के लिए फंसाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री टीवी देख रहे हैं और आप लोगों पर नजर बनाए हुए हैं। वह जानते हैं कि आप क्या करने की कोशिश कर रहे हैं।'
 
थोड़ा गंभीर होते हुए बनर्जी ने प्रधानमंत्री के साथ इस मुलाकात को 'मैत्रीपूर्ण' और 'अच्छा' बताया। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री ने मुझे काफी समय दिया और भारत के बारे में मेरी सोच पर लंबी बातचीत की। यह शानदार था।' उन्होंने कहा, 'लोग नीतियों के बारे में बात करते हैं लेकिन नीति के पीछे की सोच को लेकर शायद ही कोई बात करता है।'  दोनों ने सरकार तथा शासन के विभिन्न पहलुओं के बारे में भी बात की। इस बातचीत का जोर 'शासन की प्रक्रिया पर होने वाले कुलीन नियंत्रण की संरचना' पर था, जिसके कारण सरकार के कम उत्तरदायी होने की संभावना बनी रहती है। अर्थशास्त्री ने कहा, 'उन्होंने (मोदी) बहुत अच्छी तरह से समझाया कि वह किस तरह से इसे और अधिक प्रभावकारी बनाने के लिए अफसरशाही में सुधार करने की कोशिश कर रहे हैं। ' उन्होंने कहा कि भारत के लिए ऐसी अफसरशाही की आवश्यकता है जो जमीन पर काम करे।
 
विवादों में नहीं पडऩे का वादा करते हुए बनर्जी ने देश में बैंकिंग संकट को 'गंभीर और भयावह' करार दिया। इसके लिए चिंता करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, 'हमें कुछ महत्त्वपूर्ण और आक्रामक बदलाव करने होंगे।' उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी को 50 प्रतिशत से कम करने का तर्क दिया, जिससे केंद्रीय सतर्कता आयोग का कोई हस्तक्षेप न रहे। उन्होंने कहा कि निगरानी की आवश्यकता होने के बावजूद सीवीसी के कारण सरकारी बैंकों की स्थिति खराब हो रही है। 
 
बनर्जी और डफ्लो अपनी पुस्तक 'गुड इकनॉमिक्स फॉर हार्ड टाइम्स : बेटर आन्सर टू अवर बिगेस्ट प्रॉब्लम' के प्रसार के लिए पिछले कुछ समय से भारत में हैं।  मैसाच्यूसेट्स इंस्टीस्टूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में प्रोफेसर बनर्जी ने हाल ही में कहा था कि कॉर्पोरेट कर की दरों में कमी करने से अर्थव्यवस्था को गति नहीं मिलेगी। वह आर्थिक मंदी के दौर में उपभोग बेहतर करने के लिए अमीरों पर कर की दर बढ़ाने और गरीबों के लिए नगदी उपलब्ध कराने की वकालत करते रहे हैं।  कुछ राजनेताओं ने हाल ही में बनर्जी की आलोचना की थी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस महीने की शुरुआत में बनर्जी को बधाई देते हुए उन्हें वाम की ओर झुकाव वाला बताया था। गोयल ने कहा था कि बनर्जी ने न्यूनतम आय योजना का सुझाव दिया था जिसे भारत की जनता ने नकार दिया और उनकी सोच को स्वीकार करने की जरूरत नहीं है। सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के कुछ दूसरे नेताओं ने भी बनर्जी पर व्यक्तिगत हमले किए हैं। हालांकि बनर्जी ने प्रतिक्रियास्वरूप कहा कि वह इस तरह के व्यक्तिगत हमलों से दुखी हैं। 
 
प्रधानमंत्री मोदी और बनर्जी के बीच मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। अर्थवव्यवस्था को गति देने के लिए कॉर्पोरेट कर की दर में कमी का विरोध करने के बावजूद बनर्जी ने कहा कि हालिया सरकार ने गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाओं समेत अनेक काम सही दिशा में हैं। 
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