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एआईएफ में निवेश एक साल में 60 फीसदी बढ़ा

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई October 22, 2019

नियामकीय ढांचा सहज होने और डेट में निवेश बढऩे के कारण ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (एआईएफ) में निवेश एक साल में 60 फीसदी की उछाल के साथ 1.19 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एआईएफ मोटे तौर पर धनाढ्य निवेशकों को लक्षित होता है। एआईएफ कैटिगरी-2 की अगुआई में यह बढ़त हुई है, जिसमें निवेश 79 फीसदी बढ़कर जून 2019 के आखिर में 74,816 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कैटिगरी-1 व कैटिगरी-2 में निवेश क्रमश: 31 फीसदी और 37 फीसदी बढ़ा है। कैटिगरी-2 एआईएफ स्टार्टअप या शुरुआती चरण वाले उद्यम, सामाजिक उद्यम, एसएमई, बुनियादी ढांचा या अन्य क्षेत्रों में निवेश करता है, जिसे सरकार या नियामक सामाजिक या आर्थिक रूप से जरूरी मानता है।
 
रियल एस्टेट फंड, प्राइवेट इक्विटी फंड और दबाव वाली परिसंपत्तियों के लिए फंड आदि कैटिगरी-2 एआईएफ के तौर पर पंजीकृत हैं। विविध या जटिल ट्रेडिंग की रणनीति अपनाने वाला एआईएफ वैसे सूचीबद्ध या असूचीबद्ध डेरिवेटिव में निवेश करता है जो कैटिगरी-3 के दायरे में आता है। मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ प्रमुख (निवेश) आशिष शंकर ने कहा, एचएनआई और फैमिली ऑफिस अपनी संपत्तियों का एक निश्चित हिस्सा एआईएफ को आवंटित कर रहे हैं। यह फंड असूचीबद्ध कंपनियों में निवेश का मौका मुहैया कराता है जिसमें नई पीढ़ी वाले क्षेत्र व स्टार्टअप (खास तौर से उपभोक्ता या तकनीक के क्षेत्र वाले) शामिल है। उन्होंने कहा कि एआईएफ प्लेटफॉर्म पर स्ट्रक्चर्ड डेट में लेनदेन में काफी रुचि दिखी है, जिनमें दबाव वाले व रियल एस्टेट डेट शामिल हैं। उन्होंने कहा, कैटिगरी-2 एआईएफ में बढ़त की यह मुख्य वजह है।
 
इस साल इनक्रेड कैपिटल, केकेआर और जेएम फाइनैंशियल ने डेट सेगमेंट पर केंद्रित फंडों की मंजूरी के लिए नियामक के पास आवेदन किए हैं। कैटिगरी-2 एआईएफ में निवेश कर की ज्यादा दर के कारण घट सकता है। डेरिवेटिव ट्रेड वाले और कारोबारी आय हासिल करने वाले लॉन्ग-शॉर्ट फंडों को अब पहले के 39.5 फीसदी के बजाय 42.7 फीसदी की दर से कर देना होगा, अगर उसकी आय 5 करोड़ रुपये से ज्यादा हो।   शंकर ने कहा, हमने इस श्रेणी में निवेश निकासी की शुरुआत देख ली है। इनमें से कुछ फंड सीमित दायित्व वाली साझेदारी या गिफ्ट सिटी में नए सिरे से पंजीकृत होकर पुनर्गठन की बात कर रहे हैं ताकि ज्यादा अधिभार न चुकाना पड़े।
 
म्युचुअल फंड भी अपनी पेशकश के विशाखन के इरादे से एआईएफ की ओर बढ़ रहे हैं। उदाहरण के लिए फ्रैंकलिन टेम्पलटन ने पिछले साल फ्रैंकलिन इंडिया लॉन्ग शॉर्ट इक्विटी एआईएफ पेश किया। एमएफ के उलट एआईएफ असूचीबद्ध कंपनियों मेंं निवेश कर सकता है और लॉन्ग-शॉर्ट रणनीति अपना सकता है, जिसके लिए हेज पोर्टफोलियो की अनिवार्यता नहीं होती। वे संकेंद्रित दांव लगा सकते हैं और सार्वजनिक कंपनियों में निजी निवेश कर सकते हैं।
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