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रिफाइनिंग की चिंता दूर करेगा उपभोक्ता कारोबार

उज्ज्वल जौहरी और राम प्रसाद साहू / नई दिल्ली/मुंबई October 21, 2019

रिलायंस इंडस्ट्रीज के सितंबर तिमाही के नतीजे मिश्रित रहे और इस तरह से कंपनी के आंकड़े ज्यादातर ब्रोकिंग फर्मों के अनुमान से पीछे रहे। बाजार हालांकि चिंतित नहीं है क्योंकि डिजिटल सेवाओं और खुदरा क्षेत्र में ठीक-ठाक रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है। एकीकृत राजस्व और परिचालन लाभ की रफ्तार एक अंक में रही, लेकिन नए कारोबारों में राजस्व की रफ्तार 27 से 43 फीसदी तक रही, वहीं लाभ में 49 से 67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। कंपनी बढ़त की इस रफ्तार पर भरोसा कर रही है ताकि उसे दो कारोबारों को आगे बढ़ाकर परिचालन लाभ में उसकी हिस्सेदारी 50 फीसदी पर पहुंचाने में मदद मिले, जो वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में 33 फीसदी रही। दोनों काराबारों का योगदान एक साल पहले करीब 20 फीसदी था। वास्तव में बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच और एसबीआईकैप सिक्योरिटीज जैसे ब्रोकिंग फर्मों के लिए शेयर की कीमतें अपग्रेड करने की एक वजह डिजिटल और न्यू कॉमर्स की पहल है, जो मध्यम अवधि में आगे बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

 
बोफा-एमएल का मानना है कि अगर कंपनी प्रमुखक्षेत्रों में अपनी योजनाओं का क्रियान्वयन करे तो बाजार पूंजीकरण अगले दो साल में 64 फीसदी बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। अभी तक डिजिटल व खुदरा क्षेत्र में क्रियान्वयन सटीक नजर आया है। कंपनी संगठित खुदरा क्षेत्र और वायरलेस सेवाओं में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में कामयाब रही है। कंपनी की प्रतिस्पर्धी हालांकि अपनी हिस्सेदारी बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन जियो ने लगातार दूसरी तिमाही में 2.4 करोड़ ग्राहक जोड़े और उसके ग्राहकों का कुल आधार 35.5 करोड़ पर पहुंच गया। हाल में 6 पैसे प्रति मिनट के हिसाब से इंटरकनेक्ट यूजेज चार्ज वसूलने से औसत राजस्व प्रति ग्राहक स्थिर होने की संभावना है। चूंकि कंपनी फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड सेवाएं देंगी, लिहाजा राजस्व व ग्राहक की रफ्तार आगामी तिमाहियों में बढ़ सकती है। मौजूदा दर पर 50 करोड़ ग्राहकों का लक्ष्य एक साल में पूरा हो जाएगा।
 
बढ़त का एक अन्य क्षेत्र खुदरा भी बाजार हिस्सेदारी हासिल कर रहा है। यह सेम स्टोर सेल्स में दो अंकों की बढ़ोतरी और छोटे शहरों में नए स्टोर खोलने की पृष्ठभूमि में हुआ है। परिचालन मुनाफा मार्जिन सालाना आधार पर 150 आधार अंक बढ़कर 6.3 फीसदी पर पहुंच गया है। प्राइवेट लेबल की बढ़ती हिस्सेदारी (अभी किराना में 14 फीसदी) भी मार्जिन के लिहाज से अच्छी है। ऑनलाइन ई-कॉमर्स भी बढ़त के लिहाज से बेहतर स्थिति में है, ऐसे में अल्पावधि से मध्यम अवधि में किराना (असंगठित खुदरा) डिजिटलीकरण ही प्रमुख ट्रिगर होगा।
 
खुदरा व डिजिटल के प्रदर्शन ने रिफाइनिंग व पेट्रोकेमिकल जैसे विरासत वाले कारोबारों की निराशा की भरपाई कर दी। कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे है, (इसका असर कंपनी के रिफाइनिंग राजस्व पर पडऩे की संभावना थी) ऐसे में रिफाइनिंग मार्जिन सुधरा। इसकी वजह इंटरनैशनल मैरिटाइम संगठन के नए नियम है, जो सल्फर से संबंधित है और ये चीजें सकल रिफाइनिंग मार्जिन पर प्रतिबिंबित होनी शुरू हो गई है।  कंपनी ने कहा, सिंगापुर कॉम्पलैक्स मार्जिन पर प्रीमियम घटा है क्योंंकि फ्यूल ऑयल क्रैक्स की ताकत ने सिंगापुर के मार्जिन को सहारा दिया। इसी वजह से जीआरएम ब्रोकरेज कंपनियों के अनुमान से कम रहा। विश्लेषकों का मानना है कि डाउनस्ट्रीम मार्जिन का परिदृश्य स्थिर बना रहा क्योंकि वैश्विक क्षमता में जुड़ाव बढ़त से ज्यादा हो सकता है। रिफाइनिंग क्षेत्र मेंं कमी की भरपाई हालांकि पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की उम्मीद से बेहतर रफ्तार से हो गई। इस क्षेत्र में राजस्व क्रमिक तौर पर 2.5 फीसदी बढ़ा और परिचालन लाभ में 1.3 फीसदी की उछाल आई।
Keyword: reliance, refining, firm,,
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