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ज्यादातर कारोबारी मसले सुलझे: गोयल

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली October 21, 2019

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि भारत और अमेरिका ने ज्यादातर व्यापक कारोबारी मतभेद सुलझा लिए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशोंं को द्विपक्षीय कारोबारी समझौता जैसे ज्यादा व्यापक सौदों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।  यूएस-इंडिया स्टै्रटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में अमेरिका के उद्योग के वरिष्ठ सदस्योंं को संबोधित करते हुए गोयल ने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर उम्मीद जताई और कहा कि यह 'अब तक का सबसे बेहतर दौर' है। 
 
उन्होंने कहा, 'हमने करीब सभी असहमतियोंं का समाधान कर लिया है, जिसकी हम घोषणा करने जा रहे है। मुझे नहीं लगता कि पहली घोषणा को लेकर मतभेद कम करने में कोई बड़ी कठिनाई है।' बहरहाल उन्होंने दोनों देशों के बीच चल रही कारोबारी बातचीत की समय सीमा बताने से इनकार किया। उन्होंंने कहा, 'कारोबारी वार्ताएं जटिल हैं। आपको बहुत कुछ आगे और पीछे देखना होता है, जो हो रहा है। हमने इसे थोड़ा विराम दिया था क्योंकि हम सभी अन्य क्षेत्रों में व्यस्त थे। लेकिन यह सही राह पर है और सब कुछ बहुत आसानी से चल रहा है।'  
 
अमेरिका के साथ कारोबारी समझौता पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान होने की उम्मीद की जा रही थी। बहरहाल मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले महीने वादा किया था कि भारत के साथ कारोबारी समझौता 'बहुत जल्द' व्यापक रूप से होगा।  गोयल ने जोर दिया कि भारत अमेरिका से तकनीक, नवाचार, कौशल और गुणवत्ता युक्त शिक्षा के क्षेत्र में उम्मीद कर रहा है। वहीं भारत अमेरिका के कारोबारियोंं को आकर्षक बाजार, कुशल श्रम और उन क्षेत्रों में तकनीकी विशेषज्ञता की पेशकश कर रहा है, जहां अमेरिकी कंपनियां मूल्यवर्धन कर सकती हैं। 
 
यूएसआईएसपीएफ के अनुमान के मुताबिक द्विपक्षीय व्यापार 2025 तक बढ़कर 238 अरब डॉलर होने का अनुमान है।  एक वरिष्ठ कारोबारी वार्ताकार के मुताबिक भारत आपस में स्वीकार्य एक 'कारोबारी पैकेज' चाहता है, जिससे दोनों पक्षों की प्रमुख चिंताओं का मान्य समाधान मुहैया कराए। भारत कारोबारी मुनाफा नीति के साथ कोरोनरी स्टेंट की मौजूदा मूल्य सीमा को खत्म करने पर विचार कर रहा है। भारत कुछ सूचना एवं संचार तकनीक से जुड़े उत्पादों जैसे महंगे मोबाइल फोन और स्मार्ट वाचेज के अमेरिका से कम शुल्क पर आयात की अनुमति दे सकता है, जिससे भारत मेंं आईफोन उत्पाद सस्ते हो सकते हैं। इसके एवज में अमेरिका अपने पारस्परिक कर के आक्रामक रुख से कदम पीछे खींचने की पेशकश कर सकता है। ट्रंप ने कई बार अमेरिका में बनी हर्ले डेविडसन मोटरसाइकिलों पर भारी शुल्क का हवाला देते हुए भारत पर ज्यादा शुल्क वाला देश होने का आरोप लगाया है। 
 
इस साल की शुरुआत में बातचीत में उस समय व्यवधान पैदा हो गया था, जब अमेरिका ने अमेरिकी बाजार में भारत की शुल्क मुक्त पहुंच खत्म कर दी थी, जो उसकी तरजीही कारोबार योजना जनरलाइज्ड सिस्टम आफ प्रेफरेंसेज (जीएसपी) के तहत मिलती थी। उसके बाद भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले कुछ महंगे सामान पर आयात शुल्क बढ़ा दिया था, जिनमें ज्यादातर कृषि उत्पाद जैसे सेब और बादाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक जीएसपी लाभों को बहाल किया जाना भारत की मुख्य मांगों में शामिल है। 
 
सूत्रों ने कहा कि अमेरिका ने भारत से यह भी कहा है कि वह इस बात की पुष्टि करे कि मौजूदा आर्थिक मंदी और घरेलू उड्डयन बाजार में उतार-चढ़ाव का असर भारत के नागरिक विमानों की खरीद पर नहीं पड़ेगा। सस्ती विमान सेवा कंपनी स्पाइस जेट ने ही अमेरिकी विनिर्माता बोइंग से 205 विमान खरीदने का ऑर्डर दिया है। गोयल ने प्रस्तावित क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समझौते पर चल रही बातचीत में सावधानी बरतने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सरकार घरेलू उद्योगों के हितों को ध्यान में रख रही है। गोयल ने कहा, 'कांग्रेस के शासनकाल में जल्दबाजी में समझौते किए गए, जो प्राय: भारत के हितों से तालमेल नहीं खाते थे, ऐसे प्रावधान डाल दिए गए। ऐसे में सेवा क्षेत्र को कोई लाभ नहीं हुआ और भारत के बाजार तक उन देशों की पहुंच हो गई।' आरसीईपी में कारोबारी मतभेदों को सुलझाने के लिए 10 दिन का दिया गया वक्त मंगलवार को खत्म हो रहा है। परिणामस्वरूप 14 क्षेत्रों में कारोबारी मतभेदों का अगर समाधान नहीं किया गया तो इस पर अगले महीने आरसीईपी के तीसरे सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान चर्चा होगी। 
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