बिजनेस स्टैंडर्ड - नीले आसमान और साफ फेफड़े के लिए जारी रहेगी जंग
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, November 13, 2019 04:54 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

नीले आसमान और साफ फेफड़े के लिए जारी रहेगी जंग

जमीनी हकीकत
सुनीता नारायण /  October 21, 2019

सर्दी दस्तक देने वाली है और दिल्ली में हम लोग ठंडी हवा भारी होने से वायु प्रदूषण दम घोंटने लगेगा और हम खुलकर सांस भी नहीं ले पाएंगे। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है। नाराजगी होने के साथ कार्रवाई भी दिख रही है। इसके सबूत भी हैं कि हमने प्रदूषण वक्र को मोड़ दिया है जो काफी नहीं होते हुए भी यह दर्शाता है कि इन कदमों का असर दिखना शुरू हो गया है। हमें इसी की जरूरत है। मैं यह इसलिए कह रही हूं कि अपने साझा गुस्से में अक्सर हम जरूरी कदम और असर पैदा करने वाले तरीके पर ध्यान बनाए रखना भूल जाते हैं। जबकि अधिक प्रभावी कदम उठाने महत्त्वपूर्ण हैं। बेहद जरूरी कदम पर ध्यान बनाए रखने से ही हम सांस लेने का अधिकार हासिल कर सकते हैं।

 
आखिर हुआ क्या है? पहली बात, अब वायु गुणवत्ता की स्थिति और हमारे स्वास्थ्य से इसके संबंध के बारे में सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध है। कुछ साल पहले, सरकार वायु गुणवत्ता सूचकांक लेकर आई थी जिसमें हमें प्रदूषण के हरेक स्तर का स्वास्थ्य पर पडऩे वाले असर के बारे में बताया गया था। फिर, बड़ी संख्या में वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन बन गए जिनसे हमें फौरन जानकारी मिलती है। हरेक सांस के बारे में जानकारी हमारे फोन पर उपलब्ध है। हम जानते हैं कि हवा कब जहरीली हो चुकी है? हम इस बारे में जानते हैं और इसीलिए गुस्से में हैं। हालांकि यह पता होना चाहिए कि इन निगरानी स्टेशनों का नेटवर्क देश के अन्य हिस्सों में नहीं बन पाया है और अधिकांश शहरों में एक-दो निगरानी केंद्र ही होने से लोगों को वायु गुणवत्ता के बारे में नहीं पता चल पाता है। लेकिन दिल्ली में जहरीली हवा एक राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है और श्रेय लेने के लिए विभिन्न दलों के बीच रस्साकशी चल रही है। यह अपने-आप में अच्छी बात भी है।
 
दूसरी बात, इस दिशा में कदम उठाए गए हैं। गत कुछ वर्षों में काफी कुछ किया गया है। बीएस-6 मानक वाले अधिक स्वच्छ ईंधन को तय समय से पहले ही लागू करने से लेकर कोयला-आधारित बिजली उत्पादन संयंत्रों को बंद करने के अलावा पेट कोक, फर्नेस ऑयल और कोयले का भी औद्योगिक इस्तेमाल दिल्ली में प्रतिबंधित हो चुका है। यह अच्छा कदम है लेकिन काफी नहीं है। दिल्ली को गैस या बिजली रूपी स्वच्छ ईंधन में पूरी तरह ढलने की जरूरत है। डीजल कारों की बिक्री गिरी है। इसका आंशिक कारण डीजल एवं पेट्रोल के बीच कीमत का फासला कम करने की सरकारी नीति है। और थोड़ी वजह अदालतों की सख्ती भी है जिसने परंपरागत ईंधन से चलने वाले वाहनों की उम्र सीमा तय करने के अलावा इनकी विषाक्तता के बारे में लोगों को जागरूक करने का भी काम किया है। कुछ साल पहले उच्चतम न्यायालय ने प्रदूषण पर लगाम के लिए मालवाहक वाहनों को दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए उन पर कंजेशन चार्ज लगाया। इस साल इस कदम का असर दिखेगा। पूर्वी एवं पश्चिमी एक्सप्रेसवे के पूरी तरह गतिशील हो जाने से भारी वजन वाले वाहन दिल्ली की सीमा में घुसे बगैर बाइपास होकर गुजरने लगे हैं। इसके अलावा दिल्ली की सीमाओं पर चुंगी संग्रह को कैशलेस किया जा चुका है और इसके लिए आरएफआईडी तकनीक लागू की गई है। इससे दिल्ली सीमा में घुसने वाले ट्रकों की संख्या कम होने से प्रदूषण में भी गिरावट आएगी। हमें अब इसके साथ सार्वजनिक परिवहन को भी उन्नत करने की जरूरत है ताकि निजी वाहनों का प्रयोग बहुत कम हो। हालांकि अभी ऐसा नहीं हो पा रहा है।
 
अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि ये कदम आंकड़ों के रूप में नजर आ रहे हैं। मेरे सहयोगियों ने पिछले दशक की वायु गुणवत्ता आंकड़ों का अध्ययन कर यह पता लगाया है कि धुंध छाने की मियाद कम हो रही है। अब धुंध देर से छाती है और जल्दी चली जाती है। गत आठ वर्षों से सक्रिय वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में उससे पहले के तीन वर्षों की तुलना में 25 फीसदी गिरावट देखी गई है। यह एक अच्छी खबर है। अब एक बुरी खबर पर गौर करते हैं। हवा की विषाक्तता में कमी आई है लेकिन वह काफी नहीं है। हमें अपेक्षित वायु गुणवत्ता तक पहुंचने के लिए अभी 65 फीसदी की गिरावट और लानी होगी। 
 
इसका यह मतलब भी है कि हम छोटे विकल्पों का दौर पार कर चुके हैं। पहली एवं दूसरी पीढ़ी के सुधार किए जा चुके हैं लेकिन अभी बहुत लंबा सफर तय करना बाकी है। स्वच्छ हवा के लिए हमें ईंधन जलाने के तरीके में व्यापक बदलाव लाना होगा। सभी तरह के कोयला उपयोग पर प्रतिबंध लगाना होगा या इस ईंधन से होने वाले प्रदूषण पर सख्त लगाम लगानी होगी। हमें सड़कों पर दौडऩे वाले वाहनों की संख्या में कमी लानी होगी और इसके लिए बस, मेट्रो एवं साइकिल पथ की संख्या बढ़ाने के साथ पैदल यात्रियों के लिए भी इंतजाम करने होंगे। हमें पुराने ईंधन मानकों से चल रहे वाहनों को बीएस-6 वाहनों से बदलना भी होगा।
 
लेकिन जब तक हम प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों पर काबू नहीं पाएंगे, तब तक यह बहुत कारगर नहीं होगा। कचरा जलाने, धूल उडऩे और खाना बनाते समय निकलने वाले धुएं से प्रदूषण फैलता है। इस पर काबू पाना मुश्किल है अगर हम जमीनी स्तर पर कारगर क्रियान्वयन नहीं कर पाते हैं या हमारे पास वैकल्पिक उपाय नहीं हैं। प्लास्टिक एवं अन्य औद्योगिक एवं घरेलू कचरे को अलग कर उनका अलग निपटान होना चाहिए। लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रदूषण मानकों का क्रियान्वयन इस संघर्ष में हमारी सबसे कमजोर कड़ी है। लेकिन हमें अपना ध्यान इस ओर बनाए रखना है। हम एकदम नीले आसमान एवं साफ फेफड़े के लिए अपनी जंग जरूर जीतेंगे। 
Keyword: delhi, pollution, plastic,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दूरसंचार क्षेत्र को राहत देने के उपाय करे सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.