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'डेटा के निर्बाध प्रवाह की खुलें संभावनाएं'

नेहा अलावधी /  October 20, 2019

आने वाले समय में डेटा की अहम भूमिका होगी और भारत में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच बनाने के लिए फेसबुक रिलायंस जियो समेत दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियों के साथ काम करने जा रही है। फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजित मोहन ने पिछले दिनों नेहा अलावधी के साथ सोशल मीडिया कंपनी की भारत में प्राथमिकताएं, सरकार से जुड़े मामले और आगे की राह के बारे में बात की। पेश हैं संपादित अंश:

 
हॉटस्टार से फेसबुक तक का सफर कैसा रहा? भारत में फेसबुक की वरीयताएं क्या हैं?
 
पहले हॉटस्टार में मुझे अलग-अलग तरह की वीडियो शुरू करने और चलाने का अवसर मिला और यहां फेसबुक में आने पर मेरा कार्य भारत में कंपनी की गहरी पैठ बनाने और विभिन्न कार्यों में प्रासंगिकता बनाए रखना है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे हमारे विभिन्न ऐप की भारत में पहुंच, प्रासंगिकता और जुड़ाव बहुत अधिक है। फेसबुक के मासिक 32.5 करोड़ से अधिक और व्हाट्सऐप के 40 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं तथा इंस्टाग्राम भी तेजी से विस्तार कर रही है। यह स्पष्ट है कि भारत में अपना प्रभाव बढ़ाने की बहुत अधिक संभावनाएं हैं। फेसबुक समूह के ऐप सामाजिक समुदायों में अपनी गहरी पैठ बना चुके हैं। 
 
फिलहाल फेसबुक सरकार के साथ किस तरह की बातचीत कर रही है? विशेषकर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हाल ही में निजता संबंधी बयान के बाद। इस बातचीत में व्हाट्सऐप संबंधी हिस्सा कितना महत्त्वपूर्ण है? 
 
प्रधानमंत्री मोदी और सरकार अधिक संख्या में व्यक्तियों तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया की ताकत को लेकर काफी मुखर है। मेरा मानना है कि सरकारें और नागरिक, दोनों इस बात को लेकर जागरूक हैं कि कई बार तकनीकी कंपनियों के सामने कुछ विषय बहुत जटिल हो जाते हैं। जैसे भारतीय मूल्य, जिसमें अभिव्यक्ति की आजादी, खुलापन और राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय निहित है। व्हाट्सऐप के मामले में सरकार ने सार्वजनिक तौर पर यह स्पष्ट किया है कि वे एनक्रिप्शन का समर्थन करते हैं। इससे भारतीय निजी संवाद स्थापित कर सकेंगे। हम डेटा और निजता को लेकर सभी तरह के संवाद में शामिल हैं। श्रीकृष्ण समिति और इलेक्ट्रॉनिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वार्तालाप में भी हमारा प्रतिनिधित्व रहा। ये संवाद काफी जटिल थे लेकिन तकनीकी कंपनियों, सरकार और नागरिकों के बीच सही हल खोजने के लिए जरूरी भी थे। हमने अपना रुख जाहिर किया है। हम मानते हैं कि निजता एक अहम विषय है लेकिन हमें राष्ट्रीय सुरक्षा संंबधी मामलों से जुड़ी चिंताओं पर भी ध्यान देना चाहिए। 
 
सरकार निजता की बात करती है लेकिन मूल संदेश भेजने वाले का पता भी जानना चाहती है। फर्जी खबरें और ऑनलाइन सामग्री की निगरानी भी अहम मुद्दे हैं। आप इसे कैसे देख रहे हैं?
 
मूल संदेश भेजने वाले व्यक्ति की पहचान करने संबंधी मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए मैं इस बारे में फिलहाल बात नहीं कर सकता। फेसबुक पर थर्ड पार्टी की मदद से डेटा की जांच कार्यक्रम द्वारा गलत सूचना के प्रसार को सीमित किया जा रहा है। वर्तमान में हम भारत का सबसे बड़ा थर्ड पार्टी फैक्ट चेकिंग कार्यक्रम चला रहे हैं जिसमें 12 भाषाओं में नौ सहयोगी काम कर रहे हैं। जब भी कोई सामग्री फेसबुक के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है, हम उसे हटा देते हैं। हमने लोगों द्वारा पढ़े जाने से या किसी भी तरह का व्यवधान खड़ा करने से पहले ही लाखों की संख्या में ऐसी सामग्री हटाई है। कृत्रिम मेधा (एआई) की मदद से ऐसा संभव हो रहा है। व्हाट्सऐप के भारतीय शेयरधारकों से फीडबैक मिलने के बाद गलत सूचना के विस्तार पर रोक लगाने संबंधी बड़ा बदलाव लाया गया। व्हाट्सऐप ने एक समय में फॉरवर्ड करने वाले मेसेज की सीमा पांच व्यक्तियों तक सीमित कर दी और इससे फर्जी खबरों के प्रसार पर रोक लगाने के चलते हम काफी खुश थे। 
 
आपने भारत में आम चुनाव से पहले इलेक्शन इंटिग्रिटी टीम बनाई थी। चुनाव खत्म होने के बाद अब वह टीम क्या कर रही है?
 
यह एक वैश्विक टीम है। वर्ष 2016 में अमेरिकी चुनाव संपन्न होने के बाद वहां (फेसबुक पर) काफी ध्यान दिया गया। पिछले दो वर्षों में हमारे प्रयासों में अहम बदलाव आए हैं और लगातार बेहतर हो रहे हैं। सच्चाई यह है कि विश्व में हर समय कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं। यह एक ऐसी टीम है जो चुनावों के लिए वैश्विक स्तर पर काम करती रहती है। हम चुनावों से सीखते हैं और उसके हिसाब से नए बदलाव लाते हैं। इंटिग्रिटी टीम का यही काम है। 
 
तो क्या वे राज्य के चुनावों को भी देखते हैं? 
 
हमने आम चुनावों में जिन सिद्धांतों का इस्तेमाल किया, उनका उपयोग राज्य चुनावों के लिए भी किया जाएगा। 
 
आज के समय अधिकांश नेता, कारोबारी या हस्तियां आम जनता से जानकारी साझा करने के लिए ट्विटर का उपयोग करते हैं। आप इसे कैसे देखते हैं? 
 
भारत में हमारे फैमिली ऐप के बढ़ते उपयोग को लेकर काफी खुश हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के बीच लोग हमारे प्लेटफॉर्म का काफी अलग-अलग तरीके से उपयोग करते हैं। दोस्तों और परिवार के लोगों से जुडऩे के लिए फेसबुक का उपयोग होता है। ब्रांड, लोकप्रिय हस्तियां और दूसरे समूह इंस्टाग्राम का प्रयोग करते हैं और निजी समूह व्हाट्सऐप का प्रयोग कर रहे हैं। समय के साथ हम इनमें नई विशेषताएं जोड़ रहे हैं। 
 
पिछले कुछ वर्षों में डेटा मुख्यधारा का विषय बन गया है। प्रधानमंत्री ने भी हाल ही में कहा था कि डेटा 'नया सोना' है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह कितना महत्त्वपूर्ण है? 
 
रिलायंस जियो के आने से इंटरनेट के बाजार में अहम बदलाव आया है और सस्ते, सुलभ 4जी से इंटरनेट विस्तार तेज हुआ है। डेटा से हमें बहुत लाभ पहुंचा है। हम रिलायंस के साथ साझेदारी कर रहे हैं और रिलायंस समेत दूसरे दूरसंचार सेवा प्रदाता डेटा के हिसाब से फेसबुक, इंस्टाग्राम तथा व्हाट्सऐप की महत्ता को पहचानते हैं। इसे और विस्तार से समझने की आवश्यकता है। चीन ने एक मॉडल विकसित किया है जहां इसे बंद कर दिया गया। वास्तविकता यह है कि विश्व में इंटरनेट की धुरी अमेरिका, यूरोप तथा भारत के इर्द-गिर्द घूम रही है। मेरा मानना है कि डेटा के मामले में भारत की अहम भूमिका है और डेटा तथा निजता पर भारत के रुख से कई सवालों का जवाब मिलेगा। 
 
डेटा स्थानीयकरण के लिए भारतीय मांग को आप कैसे देखते हैं? 
 
मेरा मानना है कि भारत को डेटा प्रसार पर अपने दरवाजे खुले रखना बेहतर होगा। भारत को बाह्य स्रोत या कड़ी वाली पुरानी आईटी कंपनियों से काफी लाभ हुआ है। मुझे भरोसा है कि भारत को आगे ले जा रहे मूल्यों में काफी समानता है। खुलापन, उद्यमशीलता की भावना आदि कुछ ऐसे विचार हैं जो प्रधानमंत्री ने हाल में अमेरिका में व्यक्त किए थे। इंजीनियरिंग क्षेत्र की प्रतिभाओं से भरे हुए देश भारत में नए मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। भारत के लिए यह सही राह होगी। मैं ऐसा फेसबुक के निजी हित वाले नजरिये से नहीं बल्कि पूरी नम्रता और आदर के साथ कह रहा हूं कि भारत को अपने जवाब मिल जाएंगे। 
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