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इस्पात कंपनियों के शेयरों पर सतर्क हैं विश्लेषक

उज्ज्वल जौहरी /  October 20, 2019

पिछले एक साल में गिरावट के शिकार हुए टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, सेल और जिंदल स्टील ऐंड पावर (जेएसपीएल) जैसी इस्पात कंपनियों के शेयरों में 14 अक्टूबर को 1.4-2.2 प्रतिशत के दायरे में तेजी दर्ज की गई। शेयरों में यह तेजी अमेरिका-चीन व्यापार वार्ताओं को लेकर सकारात्मक खबरों की वजह से भी आई है। वहीं व्यापार युद्घ की वजह से अंतरराष्ट्रीय मांग वृद्घि एवं प्राप्तियों को लेकर चिंताओं से घरेलू इस्पात शेयरों के खराब प्रदर्शन को बढ़ावा मिला और इनमें पिछले एक साल में 40-50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई जबकि सेंसेक्स में इस अवधि में 12 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

 
वैश्विक चिंताओं के अलावा, देश में मंदी से भी इस्पात मांग ऐसे समय में प्रभावित हो रही है जब प्राप्तियों पर लगातार दबाव बना हुआ है। जहां 14 अक्टूबर को आई सकारात्मक खबरों से कुछ उम्मीद दिखी, लेकिन विश्लेषक अभी भी इस्पात शेयरों पर सकारात्मक नहीं दिख रहे हैं। हाल में कंपनियों द्वारा दर्ज किए गए इस्पात बिक्री के आंकड़े भी उत्साहजनक नहीं रहे हैं। हालांकि टाटा स्टील का घरेलू उत्पादन सालाना आधार पर 4.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि बिक्री सितंबर तिमाही के दौरान  41.4 लाख टन रही जो सालाना आधार पर 4.2 प्रतिशत की गिरावट है। विश्लेषकों का कहना है कि टाटा स्टील के भारतीय प्रदर्शन को टाटा स्टील बीएसएल (टाटा स्टील द्वारा अधिग्रहीत भूषण स्टील) की उम्मीद से बेहतर बिक्री की वजह से मजबूत रहा। कंपनी ने यह भी कहा है कि वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में उसकी भारत में बिक्री तिमाही आधार पर 5 प्रतिशत तक बढ़ी।
 
कुछ सकारात्मक बदलावों के बावजूद विश्लेषक इस्पात कंपनियों के शेयरों पर सतर्क बने हुए हैं। दूसरी तरफ, जेएसडब्ल्यू स्टील ने दूसरी तिमाही के दौरान इस्पात उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत की कमी दर्ज की। विश्लेषकों का कहना है कि मौसमी तौर कमजोर समझी जाने वाली सितंबर तिमाही में बिक्री में गिरावट वाहन क्षेत्र से नरम मांग की वजह से भी आई। प्रमुख कंपनियों में एकमात्र (सेल के आंकड़े अभी नहीं आए हैं) अपवाद जेएसपीएल थी, जिसका उत्पादन सितंबर तिमाही के दौरान 16 प्रतिशत बढ़कर 15.8 लाख टन रहा और बिक्री 10 प्रतिशत की वृद्घि के साथ 14.6 लाख टन पर रही। यह वृद्घि जेएसपीएल के अंगुल संयंत्र के क्षमता सुधार पर केद्रित रही और इससे कंपनी के लिए परिचालन दक्षता में इजाफा हो सकता है। कमजोर घरेलू इस्पात कीमतों को देखते हुए प्राप्तियों को लेकर भी परिदृश्य उत्साहजनक नहीं है। विश्लेषकों के ताजा रुझानों से पता चलता है कि घरेलू हॉट-रॉल्ड कोइल कीमतें लगातार 18वें सप्ताह नीचे आईं और अब ये 35,150 रुपये प्रति टन (सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की गिरावट) पर हैं। 
 
जहां कमजोर अंतरराष्ट्रीय इस्पात कीमतों से घरेलू कीमतों पर ऐसे समय में दबाव पड़ रहा है, जब मांग कमजोर बनी हुई है, दक्षिणपूर्व एशिया से सस्ते आयात में तेजी आई है। एडलवाइस के विश्लेषकों का कहना है कि कमजोर घरेलू परिदृश्य को घरेलू कीमतों के मुकाबले 14 प्रतिशत (5000 रुपये प्रति टन) की भारी भरकम छूट पर निर्यात बिक्री से भी बढ़ावा मिला।  इसके अलावा, इन्वेंट्री में वृद्घि अन्य चिंता है जिससे धीमे सुधार को बढ़ावा मिल सकता है। एमके ग्लोबल के विश्लेषकों का कहना है कि इन्वेंट्री बढऩे से वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में कीमत सुधार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस्पात कंपनियों के लिए एकमात्र राहत कोकिंग कोयले और लौह अयस्क कीमतों में नरमी है। कोकिंग कोयला कीमतें सितंबर तिमाही में 19 प्रतिशत तक नीचे आईं, लेकिन इन्वेंट्री दबाव को देखते हुए विश्लेषकों को तिमाही के दौरान सिर्फ 8-10 डॉलर प्रति टन की कीमत गिरावट का अनुमान है। 
 
तिमाही के दौरान सीबोर्न श्रेणी की लौह अयस्क कीमतें भी तेजी से बढ़ीं और और ये 120 डॉलर प्रति टन से गिरकर मौजूदा समय में 95 डॉलर पर रह गई हैं। पिछले साल के 60 डॉलर प्रति टन के स्तर से दोगुनी होने के बाद वैश्विक लौह अयस्क कीमतें गिरकर 90 डॉलर के आसपास रह गईं। घरेलू लौह अयस्क आपूर्ति में सुधार के साथ इस्पात निर्माता इस मोर्चे पर कुछ राहत महसूस कर सकते हैं। हालांकि कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर घरेलू इस्पात मांग, ऊंचे निर्यात और कमजोर इस्पात कीमतों से सितंबर तिमाही के दौरान घरेलू इस्पात कंपनियों के लिए प्रति टन एबिटा में 14-28 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। कुछ अन्य विश्लेषकों का कहना है कि मांग में तेजी नहीं आ रही है, वहीं घरेलू इस्पात कंपनियों का मुनाफा घटकर 2017-18 की दूसरी तिमाही के स्तरों पर रह सकता है। मुनाफे और आय पर दबाव के साथ यह आश्चर्यजनक नहीं है कि विश्लेषकों ने इस्पात शेयरों पर अपना रुख चौकस बनाए रखा है और इनमें से कई शेयर हाल में दर्ज किए गए अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर के आसपास कारोबार कर रहे हैं। 
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