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ब्रोकरेज कंपनी मुश्किल में आए तो निवेश कैसे बचाएं

संजय कुमार सिंह /  October 20, 2019

पिछले कुछ वर्षों के दौरान ब्रोकरेज कंपनियों से जुड़ी कई नकारात्मक खबरें अखबारों एवं अन्य समाचार माध्यमों की सुर्खियां रही हैं। इनमें ब्रोकरेज कंपनियों द्वारा भुगतान में चूक करने से लेकर उनके जांच के घेरे में आने और उन पर बाजार नियामकों द्वारा जुर्माना लगाने आदि जैसी खबरें शामिल रही हैं। अलाइड फाइनैंशियल्स, आम्रपाली आद्या ट्रैवलिंग ऐंड इन्वेस्टमेंट, कासा फिनवेस्ट, यूनिकॉर्न और एफ6 फिनसर्व ऐसी ही कुछ कंपनियां हैं, जो मुश्किलों में घिरी हैं और जिन्होंने अपने साथ-साथ ग्राहकों का भी बंटाधार कर दिया है। हाल में कोलकाता की एक ब्रोकरेज कंपनी बीएमए वेल्थ क्रिएटर्स का एक कारनामा सामने आया है। 

 
ग्राहकों की प्रतिभूतियों की अवैध जमाखोरी की आशंका
 
जब कोई ग्राहक शेयर खरीदता है तो ब्रोकरेज कंपनी उसे ग्राहक के डीमैट खातें में स्थानांतरित कर देती है। कभी-कभी ब्रोकरेज कंपनी ये शेयर अपने खाते (पूल अकाउंट) में रखती है। यह तब होता है जब ग्राहक उन शेयरों का पूरा भुगतान नहीं करते हैं। ब्राकरेज कंपनियों को एक्सचेंजों को नियमित अंतराल पर रिपोर्ट भेजनी होती है, जिनमें उन्हें अपने पास ग्राहकों की रखी प्रतिभूतियों की जानकारी देनी होती है। 26 सितंबर को नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएएसई) ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को बताया कि उसने डिपॉजिटरी के विवरण के साथ बीएमए द्वारा भेजी रिपोर्ट (ग्राहकों की रकम एवं प्रतिभूतियों का मासिक ब्योरा)का अध्ययन किया है। एनएसई ने कहा कि उसने अपने अध्ययन में पाया है कि 30 अगस्त तक डिपॉजिटरी के पास बीएमए द्वारा जमा ग्राहकों की प्रतिभूतियों के मूल्य में कुछ कमी दिखी थी। 
 
एनएसई ने आगे पाया कि जितनी प्रतिभूमियां कम थीं, उनमें 60 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की प्रतिभूतियों का इस्तेमाल कुछ दूसरे ग्राहकों की देनदारियां निपटाने के लिए किया गया था। इन ग्राहकों का पता ब्रोकरों की तरह ही था, जिससे स्पष्ट इशारा मिला कि उनका आपस में संबंध था। इसके बाद ग्राहकों को सेबी और एनएसई को एक शिकायत भेजनी चाहिए और उसमें बताना चाहिए कि ब्रोकरेज के पास उनकी कितनी रकम बकाया है। सेबी को सेबी कम्प्लेंस रिड्रसेल सिस्टम (स्कोर्स) की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। एनएसई ने भी निवेशकों की शिकायत निवारण के लिए 'नाइस प्लस' के नाम से एक पोर्टल तैयार किया है। ब्रोकरेज कंपनियों का कहना है कि डिपॉजिटरी- इस मामले में सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेस लिमिटेड (सीडीएसएल)- के पास डीमैट खाते में जमा शेयर सुरक्षित हैं। 
 
ट्रेड स्मार्ट ऑनलाइन के कार्यकारी निदेशक विकास सिंघानिया का कहना है कि इसके बाद तीन संभावित परिस्थितियां हो सकती हैं। पहली परिस्थिति में ग्राहक ब्रोकर के पास आवेदन कर बीएमए डीमैट खाते से शेयर स्थानांतरित कर नए खाते में स्थानांतरित कर सकता है। यह माना जाएगा कि डीमैट खाता अब भी सक्रिय है। (जब इस तरह की चीजें होती हैं तो परिचालन आम तौर पर कुछ समय के लिए रुक जाता है)। दूसरी परिस्थिति में ऐसे मामलों में दूसरी ब्रोकरेज कंपनी डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (डीपी) सदस्यता ले लेती है। उस स्थिति में ग्राहकों को नए ब्रोकर के साथ कारोबार करना होगा। तीसरी स्थिति में निवेशक अपनी डिलिवरी इंस्ट्रक्शन स्लिप सीधे सीडीएसएल को भेज सकता है। बाद में सीडीएसल एक दूसरे डीमैट खाते में शेयर स्थानांतरित कर सकती है।  ग्राहकों को ब्रोकरेज कंपनी के पूल अकाउंट से शेयर दोबारा मिलने में कुछ समय लग सकता है। दिल्ली स्थित एक डिस्काउंट ब्रोकिंग फर्म एसएएस ऑनलाइन के संस्थापक श्रेय जैन कहते हैं, '25 लाख रुपये तक की प्रतिभूतियों वाले ग्राहकों को एक्सचेंज से सुरक्षा मिली होती है। जिन ग्राहकों के पास रकम और प्रतिभूतियां 25 लाख रुपये मूल्य से अधिक की होती हैं, उन्हें एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली मध्यस्थता प्रक्रिया से गुजरना होता है। इस प्रक्रिया में तीन से छह महीने तक का समय लग सकता है।' जैन कहते हैं कि जब बड़ी तादाद में ग्राहक प्रभावित होते हैं तो उनके सभी मामले एक साथ लिए जाते हैं और इनका निपटारा समयबद्ध तरीके से होता है। 
 
सेबी ने सख्त कर दिए नियमन
 
इस साल 20 जून को सेबी ने ब्रोकरेज कंपनियों के अवैध दांव-पेच पर नकेल कसने के लिए एक परिपत्र जारी किया था। इस परिपत्र में तीन मुख्य प्रावधान हैं। पहले प्रावधान में कहा गया है कि ब्रोकरेज कंपनियों को ग्राहकों की रकम और उनकी प्रतिभूतियों को अपनी रकम एवं प्रतिभूतियों से अलग रखनी चाहिए। दूसरी बात सेबी ने यह कही कि एक्सचेंज से प्राप्त शेयर ब्रोकर के पूल अकाउंट से ग्राहक के डीमैट खाते में एक दिन के भीतर स्थानांतरित किए जाने चाहिए। अगर ग्राहक ने खरीदे गए शेयर के लिए भुगतान नहीं किया है तो ब्रोकरेज कंपनी को उसे दूसरे खाते (क्लाइंट अनपेड सिक्योरिटीज अकांउट) में रखना चाहिए। 
 
कोई ब्रोकरेज कंपनी एक्सचेंज से ऐसे शेयर मिलने के बाद अपने पास मात्र पांच दिनों तक ही रख सकती है। उस अवधि तक अगर ग्राहक भुगतान नहीं करता है तो ब्रोकरेज कंपनी को अनिवार्य तौर पर ऐसे शेयरों की बिक्री करनी होगी। तीसरी बात नियामक ने यह कही कि ब्रोकर के पास पड़ी ग्राहकों की प्रतिभूतियां रकम जुटाने के लिए बैंकों या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के पास गिरवी नहीं रखी जा सकतीं। यह परिपत्र 1 अक्टूबर से प्रभाव में आ गया है। पहले दो प्रावधानों से ब्रोकरेज कंपनियां ग्राहकों के शेयर अवैध तरीके से अपने पास नहीं रख पाएंगी। शेयर गिरवी नहीं रखने पर पाबंदी संबंधी प्रावधान का असर होगा। कई परंपरागत ब्रोकरेज कंपनियां, जिन्होंने ग्राहकों के शेयर गिरवी रखकर रकम जुटा चुकी हैं, उन्हें नियमों का अनुपालन करने के लिए गिरवी रखे शेयर मुक्त कराने होंगे। जिन ब्रोकरेज कंपनियों के पास नहीं है, वे ऐसे मामले में चूक कर सकती हैं। 
 
शुरुआती संकेतों पर दे ध्यान
 
जिस तेजी से ब्रोकरेज कंपनियां मुश्किलों में घिरती जा रही हैं, उसके मद्देनजर ग्राहकों को अपनी रकम की सुरक्षा के लिए इनका चयन सावधानी पूर्वक करना चाहिए। ऐसी ब्रोकरेज कंपनियों से दूर रहना ही बेहतर है, जो ग्राहकों को लीवरेज मुहैया करने का प्रलोभन देती हैं। जीरोधा के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) नितिन कामत कहते हैं, 'लीवरेज एक खतरनाक हथियार की तरह है, जो ब्रोकर और ग्राहक दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।' ग्राहकों को इस बात पर भी नजर रखनी चाहिए कि उनकी ब्रोकरेज कंपनी का परिचालन ढर्रा कैसा है। 
 
जब अपने खाते में पड़ी रकम की मांग करते हैं तो यह देखें कि यह तत्काल आपके खाते में भेजी जाती है या इसमें देरी होती है। इसी तरह, जब आप शेयर खरीदते हैं तो क्या यह सीधे आपके डीमैट खाते में आता (आदर्श रूप में आना चाहिए) है या पहले ये ब्रोकर के पूल्ड अकाउंट में पड़े रहते हैं? खरीदे गए शेयर जैसे ही आपके डीमैट खाते में आते हैं उसी समय आपको सीडीएसएल /एनएसडीएल से यह संदेश मिलेगा कि इतने शेयर आपके खाते में आए हैं। आदर्श रूप में यह शेयर लिवाली के दो दिनों के भीतर होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो इसका मतलब है कि ब्रोकरेज कंपनी जान-बूझकर इन्हें (शेयर) अपने पास रख रही है। ऐसी देरी जोखिम का संकेत हो सकती है। कामत कहते हैं, 'आपको जैसे ही ऐसे किसी जोखिम का अहसास हो आप उसी समय अपना खाता किसी दूसरी ब्रोकरेज कंपनी में स्थानांतरित करा सकते हैं।'
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