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समझौते की राह में तरजीही व्यापार का रोड़ा

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली October 20, 2019

सबसे तरजीही देश (एमएफएन) के प्रावधानों के तहत आपसी कारोबारी छूट और ई-कॉमर्स अब प्रस्तावित क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) के लिए चल रही बातचीत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभरे हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।  आरसीईपी भारत का सबसे महत्त्वाकांक्षी कारोबार समझौता है। आसियान के साथ भारत के मौजूदा मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की तरह आरसीईपी में न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया सहित 10 देशों का ब्लॉक शामिल होगा, जिनके बीच कारोबारी समझौता है। 
 
इस बड़े कारोबारी समझौते के लिए विभिन्न देश अपने द्विपक्षीय मतभेद सुलझाने में लगे हैं, वहींं सभी साझेदारों को तरजीही देश का दर्जा देने पर बात अटक गई है। इस प्रावधान का मतलब है कि भारत सभी आरसीईपी सदस्यों को द्विपक्षीय समझौतों के तहत स्वत:स्फूर्त रूप से निवेश या  सेवा से संबंधित छूट मुहैया कराएगा। भारत ने इसके खिलाफ तर्क दिया है क्योंकि भारत का आसियान देशों के साथ आयात शुल्क बहुत कम बना हुआ है, जो 2010 में हुए एफटीए समझौते के मुताबिक है। शुरुआती समझौते में आसियान देश और भारत अपने बाजारों को खोलने और 76.4 प्रतिशत वस्तुओं पर आयात शुल्क खत्म करने पर सहमत हुए थे। भारत ने करीब 9,000 उत्पादों पर पूरी तरह से कर छूट देने की पेशकश की थी, जबकि भारत के 10 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क कम हुआ था। 
 
इसकी वजह से आसियान ब्लॉक से भारत का आयात बढ़ गया, जबकि भारत का इन देशों को निर्यात सुस्त होता गया। 2018-19 में इस ब्लॉक को निर्यात 37.4 अरब डॉलर रहा, जो 9 प्रतिशत ज्यादा था। वहीं आयात 59.31 अरब डॉलर का रहा, जिसमें पहले के साल के 47.13 अरब डॉलर की तुलना में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। नीति आयोग के एक अध्ययन के मुताबिक क्षेत्रीय कारोबार समझौतों का भारत के निर्यातकों द्वारा इस्तेमाल कम (5 से 25 प्रतिशत के बीच) है।  एक वरिष्ठ कारोबार विशेषज्ञ ने नाम न जाहिर किए जाने की शर्त पर कहा, 'अब अगर भारत अन्य देशों पर भी उतना ही शुल्क लगाता है, खासकर चीन पर, तो चीन से आयात की बाढ़ आएगी, वहीं सरकार को भारी भरकम सीमा शुल्क गंवाना पड़ेगा।'
 
सूत्रों ने कहा कि भारत हर देश से अलग अलग मामलों का समाधान करना चाहता है और संभवत: अन्य आरसीईपी साझेदारों को कुछ विशेष सामानों पर एमएफएन का लाभ न दे।  ई-कॉमर्स और डेटा के प्रवाह के मसले पर भी अहम टकराव नजर आ रहा है। भारत ने आसियान देशों के प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें सीमा पार इलेक्ट्रॉनिक सूचनाओं के स्थानांतरण की बाधाओं को दूर करने की बात की गई है। यह सरकार के डेटा के स्थानीयकरण को अनिवार्य करने की नीति के खिलाफ जाता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत अब यह कवायद कर रहा है कि उन सभी देशों के साथ वह हाथ मिलाए, जिन्होंने प्रस्ताव को समर्थन दिया है, बशर्ते इसमें कुछ मामूली बदलाव हो। 
Keyword: india, trade, MFN,,
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