बिजनेस स्टैंडर्ड - कर्ज की मांग बढ़ा सकती है बारिश
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कर्ज की मांग बढ़ा सकती है बारिश

निधि राय / मुंबई October 20, 2019

बैंकर अब मॉनसून बेहतर रहने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आने और त्योहारी मांग पर दांव लगा रहे हैं। हालांकि अर्थव्यवस्था सुस्त रहने और घाटे के डर से असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण देने से बच सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक गैर खाद्य कर्ज पिछले साल की तुलना में 1.2 प्रतिशत कम हुआ है। हाल के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान (एफएमसीजी) की ग्रामीण इलाकों में खपत की वृद्धि दर शहरी इलाकों की तुलना में पिछले 7 साल में पहली बार कम हुई है।
 
हालांकि बैंकरों व अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह अस्थाई दौर है, जो अगले कुछ तिमाहियों में खत्म हो सकता है। देरी से मॉनसून की वापसी रबी फसलों के लिए अच्छी खबर है। अक्टूबर की नीति बैठक के ब्योरे से पता चलता है कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने इसे सकारात्मक माना है।  हालांकि व्यक्गित ऋण की वृद्धि दर में कमी आई है। मांग सुस्त होने के साथ बैंंकरों द्वारा नया कर्ज देने में सुस्ती दिखाने की वजह से ऐसा हुआ है। परिणामस्वरूप इस साल अगस्त महीने में व्यक्तिगत कर्ज की वृद्धि दर गिरकर 15.6 प्रतिशत रह गई, जो अगस्त 2018 में 18.2 प्रतिशत थी। उपभोक्ता वस्तुओं पर कर्ज लिया जाने वाला कर्ज घटा है। साथ ही सावधि जमा पर अग्रिम कम हुआ है, जबकि शेयरों व बॉन्डों पर अग्रिम कम हुआ है। 
 
बैंकरों का मानना है कि अंतिम तिमाही में ज्यादा तमा होगा और कम कर्ज दिया जाएगा। उदाहरण के लिए इंडसइंड में अग्रिम में तिमाही आधार पर सिर्फ 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि जमा 3 प्रतिशत बढ़ा है। फेडरल बैंक में अग्रिम सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढा है, जबकि जमा 18 प्रतिशत बढ़ा है। फेडरल बैंक के एमडी और सीईओ श्याम श्रीनिवासन ने बैंक की दूसरी तिमाही के परिणाम जारी किए जाने के मौके पर कहा, 'इस तिमाही में कर्ज बढ़कर 3,800 करोड़ रुपये और जमा बढ़कर करीब 7,000 करोड़ रुपये रहा। इसे रखने की लागत है, लेकिन हमें लगता है कि यह अच्छा है।' 
 
नौकरियों को लेकर अनिश्चितता एक बड़ी वजह है जिससे बैंक और ग्राहक दोनों की व्यक्तिगत कर क्षेत्र से दूरी बनाए रहे। एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'बैंक व्यक्तिगत कर्ज देने से दूर रहे, क्योंकि यह असुरक्षित कर्ज है और अर्थव्यवस्था में मंदी की वजह से नौकरियां जा रही हैं। उद्योग ने पाया कि व्यक्तिगत ऋण और क्रेडिट कार्ड की श्रेणी में विलंब की दर ज्यादा रही।'  सितंबर के रिजïर्व बैंक के ग्राहक आत्मविश्वास सर्वे से भी पता चलता है कि ग्राहकों की धारणा कमजोर और खपत की मांग सुस्त रही। खासकर गैर जरूरी सामान के क्षेत्र में यह सुस्ती अधिक रही है। 
 
बहरहाल रियल एस्टेट क्षेत्र में गैर बिके मकान बढ़े हैं और वाहन क्षेत्र दो दशक के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार से तमाम कठिनाइयां कम होने की संभावना है। साथ ही शुरुआती संकेत जैसे त्योहारी सीजन में नकदी की मांग से प्रोत्साहन मिल रहा है। दशहरा पखवाड़े में मुद्रा का सर्कुलेशन 1.8 प्रतिशत बढ़ा है, जो त्योहारी सीजन में सामान्य स्थिति में बढ़ी मांग के मुताबिक ही है। दीवाली में भी लोगों का विवेकाधीन व्यय बेहतर होने की संभावना है और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नकदी की मांग बढऩा शुरूआती संकेत है। 
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA, monsoon,,
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