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भाजपा को इस बार मेवात में मिल पाएगी जीत!

तिरुमय बनर्जी और नितिन कुमार /  October 17, 2019

अबकी बार 75 पार। चुनावी राज्य हरियाणा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के किसी भी नेता या कार्यकर्ता से पार्टी की संभावनाओं के बारे में पूछिए तो उसका यही जवाब होगा। भाजपा ने वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की जीत के बाद हरियाणा को अपना मजबूत गढ़ बना लिया है। लेकिन उसके गढ़ में एक कमजोरी है: मेवात।

मेवात कई मानकों पर देश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शामिल है लेकिन नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल के वर्षों के वहां कुछ प्रगति हुई है। मेव मुसलमानों के दबदबे वाले इस इलाके में पिछले पांच वर्षों में कई सड़क परियोजनाओं, स्कूलों, नहरों और जल परियोजनाओं का निर्माण हुआ है।

साथ ही मेवात क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हुए हैं। वर्ष 2016 तक हरियाणा सिविल सेवा में मेवात का कोई अधिकारी नहीं था लेकिन 2016 में वकील अहमद को पलवल के हथीन में एसडीएम नियुक्त किया गया। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही नूह जिले की तीन सीटों पर सबकी नजरें टिक गई हैं। वर्ष 2005 में फरीदाबाद और गुडग़ांव (गुरुग्राम) को काटकर नूह जिला बनाया गया था।

भाजपा ने अंतिम बार 1996 गठबंधन के सहारे इस इलाके में एक सीट जीती थी और उसके बाद वह यहां एक भी सीट नहीं जीत पाई है।  मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टïर ने पिछले महीने नूह में जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान एक जनसभा में जिले में उनकी सरकार द्वारा किए गए कामों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'हमारा मेवात से कोई विधायक नहीं है लेकिन जब भी किसी स्थानीय विधायक ने हमसे कोई मदद मांगी तो हमने उनके साथ मिलकर काम किया।

हमने नूह में पीने के पानी की परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।' साथ ही सरकार कई लंबित परियोजनाओं पर काम शुरू करने जा रही है जिनमें कोटला बांध भी शामिल है। भाजपा धीरे-धीरे मेवात में बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभर रही है। इस क्षेत्र के दो विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इनमें इंडियन नैशनल लोक दल के चौधरी जाकिर हुसैन (नूह) और नसीर अहमद (फिरोजपुर झिरका) शामिल हैं। इसके अलावा पुन्हाना के निर्दलीय विधायक रहीश खान पहले ही भाजपा से जुड़ चुके थे।  

मेवात के अनुभवी लोगों का कहना है कि क्षेत्र की बदहाली के लिए कांग्रेस और क्षेत्रीय दल जिम्मेदार हैं। एक ग्रामीण ने कहा, 'उन्हें मुस्लिम वोट चाहिए लेकिन वे हमें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देना चाहते हैं और न ही हमारी बेहतरी के लिए काम करते हैं।' दूसरे लोग भी उनसे सहमत हैं।

भाजपा का दावा है कि उसने इस क्षेत्र के विकास के लिए कई काम किए। इनमें करीब 900 किमी का दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे शामिल है जो नगीना और तिजारा को जोड़ता है। साथ ही फिरोजपुर झिरका में एक कॉलेज, एक डेंटल स्कूल और नूह में यूनानी मेडिकल कॉलेज भी खोला गया है। मेवात के 47 गांवों को आठ लेन के एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना के लिए जिन किसानों से जमीन ली गई है, उन्हें मुआवजा मिलना शुरू हो गया है। 

हालांकि भाजपा के विकास के दावों को कांग्रेस ने खारिज किया है। नूह के पूर्व विधायक कांग्रेस के आफताब अहमद ने कहा, 'इस साल हुए आम चुनावों में कांग्रेस मेवात की सभी तीनों विधानसभा सीटों में आगे रही थी। यहां के लोगों ने भाजपा के विभाजनकारी एजेंडे का विरोध किया है। हमें उम्मीद है कि हम केवल मेवात में ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में अच्छा प्रदर्शन करेंगे।'

लोकनीति-सीएसडीएस सर्वेक्षण के मुताबिक मेवात में 70 फीसदी मुस्लिम आबादी है। इनमें से अधिकांश ने लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को वोट दिया था। केवल 14 फीसदी मुसलमानों ने भाजपाा को वोट दिया जबकि 2014 में यह संख्या केवल 5 फीसदी थी। सीएसडीएस में प्रोफेसर संजय कुमार ने कहा, 'भाजपा के वोटों में मेव मुस्लिमों की हिस्सेदारी बढ़ी है। इस बार इसमें 5 से 7 फीसदी का और इजाफा हो सकता है लेकिन इससे अधिक की गुंजाइश नहीं है।' वर्ष 2014 से राज्य में कोई बड़ी साम्प्रदायिक हिंसा नहीं हुई है लेकिन अशांति की खबरें आती रही हैं।

सार्वजनिक कार्य एवं वन मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा, 'कई घटनाओं को साम्प्रदायिक रंग दिया गया है। उदाहरण के लिए एक क्रिकेट मैच को लेकर हुए झगड़े को हिंदू-मुस्लिम झगड़े का रंग दिया गया। ये चीजें दुर्भाग्यपूर्ण है। मेवात और हरियाणा में कोई साम्प्रदायिक संघर्ष नहीं हुआ है।'

भाजपा के राज्य नेतृत्व को उम्मीद है कि इस बार मेवात उसे निराश नहीं करेगा। भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष सुभाष बराला ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'हम तो एक-एक सीट जीतने की कोशिश में हैं। मेवात के सभी विधायक भाजपा से जुड़ चुके हैं जो इस बात का सबूत है कि भाजपा सरकार ने अच्छा काम किया है।'

लेकिन मेव मुसलमान विधायकों के पार्टी बदलने से चिंतित हैं। समुदाय के कई नेताओं ने कहा कि उनके मुद्दों को उठाने वाले ज्यादा नेता नहीं रह गए हैं। रकीब खान का कहना था कि दलबदलू नेताओं को ज्यादा वोट नहीं मिलेंगे। राज्य में मुसलमानों की आबादी 7.2 फीसदी है।

एक बुजुर्ग ने कहा कि मुस्लिम आंखों पर पट्टी बांधकर भाजपा पर भरोसा नहीं करेंगे। उन्होंने पूछा, 'क्या उनके पास कोई एक भी मुस्लिम विधायक है।' 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में भाजपा के 47 विधायक हैं जिनमें एक भी मुस्लिम नहीं है।

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