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मंदी निवेशकों के लिए अवसर : गोयल

शाइन जैकब / नई दिल्ली October 15, 2019

वाणिज्य एवं रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि भले ही देश मंदी के दौर से गुजर रहा है, लेकिन वृद्धि के रफ्तार पकडऩे के पहले यह निवेश का एक मौका है। मंत्री ने निवेशकों से अनुरोध किया कि वे अपने कारोबार का फिर से आकलन करें और इस अवधि के दौरान वे ढांचागत समायोजन करें। दिल्ली में सेरा वीक के इंडिया एनर्जी फोरम को संबोधित करते हुए कहा, 'वैश्विक स्थिति के मुताबिक भारत में भी मंदी आई है। लेकिन मैं इससे व्याकुल नहीं हूं। मेरा माना है कि यह हम सभी के लिए अवसर है कि हम अपनी क्षमताओं, उत्पादकता व उत्पादन लागत का फिर से आकलन करें।'
 
गोयल ने कहा, 'मंत्री बनने के पहले मैं करीब 30 साल तक कारोबार से जुड़ा रहा हूं और अभी भी मैं इसे ऐसे वक्त के रूप में देखता हूं कि इस मौके का इस्तेमाल हो सकता है।' गोयल ने कहा कि भारत, अमेरिका से ज्यादा निवेश होने की उम्मीद कर रहा है और दोनों देशों के बीच कोई कारोबारी विवाद नहीं है।  अपने संबोधन में कोयला और खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार कोयला क्षेत्र में निजी हिस्सेदारी और बढ़ाने के लिए नई नीति पर काम कर रही है। हाल में हुई कोयले की नीलामी में सरकार को उद्योग जगत से सुस्त प्रतिक्रिया मिली थी और 27 ब्लॉकों में से सिर्फ 6 के लिए बोली मिली। सरकार ने कोयला खनन क्षेत्र विदेशी निवेशकोंं को लिए खोल दिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उद्योग जगत इसमें रुचि नहीं ले रहा है। मंत्री ने कहा, 'इस समय कोयला ब्लॉकों का आकार बहुत छोटा है। वैश्विक निवेशकोंं को आकर्षित करने के लिए हमें बड़े ब्लॉकों की जरूरत है।' उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी नीति पर काम कर रही है, जिससे विदेशी कारोबारियोंं को बड़े ब्लॉक मिल सकें और यह नीति एक पखवाड़े में आ सकती है। गोयल ने भी कोयला क्षेत्र में ज्यादा विदेशी निवेश लाने के लिए नीतिगत बदलाव की वकालत की। उन्होंने कहा कि सरकार को कुछ फीडबैक मिला है कि छोटे ब्लॉकों में निवेशक ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं। 
 
गोयल ने आगे कहा कि भारतीय रेल में अगले 12 साल मेंं 700 अरब डॉलर का भारी भरकम निवेश होगा। इसके साथ ही अगले 5 साल में देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 1.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने व्यापक निवेश योजना का खाका खींचा था।  रेलवे की बड़ी परियोजनाओं में विद्युतीकरण 100 प्रतिशत किया जाना, उन्नत सिगनल व्यवस्था, यात्री सुविधाओं में सुधार और स्टेशनों का पुनर्विकास शामिल है। इसके साथ ही माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाकर 2030 तक 60 प्रतिशत करने की योजना है, जो अभी महज 30 प्रतिशत है। गोयल ने संकेत दिए कि इससे लॉजिस्टिक लागत में भी कमी आएगी। 
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