बिजनेस स्टैंडर्ड - आभूषण निर्यातकों की कोष योजना पर नजर
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आभूषण निर्यातकों की कोष योजना पर नजर

दिलीप कुमार झा / मुंबई October 15, 2019

कार्यशील पूंजी जुटाने की समस्या से जूझ रहे आभूषण निर्यातकों ने सरकार से छोटे व्यवसायियों के हितों को ध्यान में रखकर इस क्षेत्र को 6,000 करोड़ रुपये की प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना (टीयूएफएस) के दायरे में लाने का अनुरोध किया है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवद्र्घन परिषद (जीजेईपीसी) के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने यहां आयोजित तीसरे इंडिया डायमंड वीक के अवसर पर कहा, 'हम टीयूएफएस का विस्तार कर इसमें छोटी व्यावसायिक इकाइयों को शामिल कराने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष एक प्रस्ताव सौंपने की योजना बना रहे हैं। हम लगभग एक महीने पहले हुई बैठक में भी वित्त मंत्री के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर चुके हैं। हमें उम्मीद है कि इस योजना का रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए विस्तार किया जाएगा।' इंडिया डायमंड वीक में दुनियाभर से 100 से अधिक खरीदारों ने हिस्सा लिया।
 
मौजूदा समय में सरकार ने टेक्सटाइल और चमड़ा क्षेत्रों के लिए 6,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। टीयूएफएस में ब्याज माफी और समान तरह की राहत की भी पेशकश की गई है। लगभग दो साल पहले हुए 12,000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले के बाद से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को उधारी रोक दी है। जरूरी कार्यशील पूंजी के अभाव में हजारों छोटे एवं मझोले उद्यमी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। बड़ी तादाद में एसएमई और एमएसएमई ने अपनी इकाइयां बंद की हैं, और कई अन्य ने अपने उत्पादन में कटौती की है। आईएलऐंडएफएस संकट के बाद गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में पैदा हुई समस्या से निर्माण क्षेत्र के लिए वित्त पोषण पर दबाव पैदा हुआ है क्योंकि एसएमई और एमएसएमई इस क्षेत्र का अभिन्न अंग हैं।
 
अग्रवाल ने कहा, 'प्रस्तावित टीयूएफएस से एसएमई और एमएसएमई को कार्यशील पूंजी उगाही पर कम ब्याज दर के संदर्भ में लाभ हासिल होगा और साथ ही उन्हें सरकारी सब्सिडी के जरिये रकम प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी। इस रकम से एसएमई और एमएसएमई को अपनी कार्यशील पूंजी बढ़ाने में मदद मिलेगी।' 
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