बिजनेस स्टैंडर्ड - कॉर्पोरेट कर कटौती और सकारात्मक प्रभाव
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, November 22, 2019 05:19 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

कॉर्पोरेट कर कटौती और सकारात्मक प्रभाव

शंकर आचार्य /  October 14, 2019

घटी हुई दरें तभी प्रभावी असर छोड़ सकती हैं जब उनके साथ नीतिगत सुधारों को भी अंजाम दिया जाए। ऐसा होने पर ही मध्यम अवधि में वृद्घि में सुधार देखने को मिलेगा। विस्तार से बता रहे हैं शंकर आचार्य 

 
गत 20 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में बड़ी कंपनियों पर लगने वाले कर ढांचे में अहम सुधार की घोषणा की। कंपनी आयकर की बुनियादी दर को 30 प्रतिशत (उपकर और अधिभार सहित 35 फीसदी) से घटाकर 22 फीसदी (उपकर और अधिभार सहित 25 फीसदी) कर दिया गया। इसके अलावा 1 अक्टूबर, 2019 के बाद स्थापित होने वाली नई विनिर्माण इकाइयों के लिए 15 फीसदी (उपकर और अधिभार सहित 17 फीसदी) कर दर रखी गई। न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) को उपकर और अधिभार समेत घटाकर 17 फीसदी कर दिया गया। इन घटी कर दरों का लाभ लेने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन और रियायत छोडऩे को कहा गया। शेयर बाजार सूचकांकों में उछाल आई और उद्योग जगत भी उत्साहित नजर आया। विश्लेषकों और टीकाकारों की टिप्पणी अवश्य मिलीजुली रही। वे सतर्कतापूर्वक स्वागत कर रहे थे लेकिन साथ ही राजकोषीय तनाव के दौर में कंपनियों को दी जा रही राहत को लेकर चिंतित भी थे। संतुलित विचार कायम करने के लिए उचित यही होगा कि कंपनी कर नीतियों में हुए इस बड़े बदलाव के आर्थिक प्रभाव पर चर्चा की जाए। 
 
पहला, कर कटौती अल्पावधि में राजकोषीय प्रोत्साहन देती है। सरकार का अनुमान है कि इससे 1.45 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी के 0.7 फीसदी के बराबर की क्षति होगी। परंतु तमाम विश्लेषकों (बिज़नेस स्टैंडर्ड में ए के भट्टïाचार्य और हिंदू बिजनेस लाइन में सी रंगराजन तथा डी के श्रीवास्तव) के मुताबिक यह अनुमान अतिरंजित हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शायद इसमें उस महत्त्वपूर्ण राजस्व लाभ को भी शामिल किया गया हो जो कम कर दर से लाभान्वित होने के लिए दी गई रियायतों के कारण हासिल होना हो। जबकि रियायतों को त्यागना कम कर दर के लाभ लेने के लिए आवश्यक है। बजट अनुमान के मुताबिक 2018-19 में कॉर्पोरेट कर से जुड़ी रियायत और प्रोत्साहन पर 1.08 लाख करोड़ रुपये गए। मोटे तौर पर ऐसा अधिमूल्यन में तेजी और निर्यात संबंधी लाभ के कारण हुआ। 2019-20 में इसके अच्छे खासे हिस्से को त्यागकर घटी कर दर का लाभ लिया जा सकता है। ऐसे में कर कटौती के कारण होने वाली राजस्व हानि जीडीपी के 0.4 से 0.5 फीसदी रह जाएगी। 
 
दूसरा, इस प्रोत्साहन के साथ अतिरिक्त सरकारी उधारी की सहायता से उच्च राजकोषीय घाटे की भरपाई की जाएगी। इससे मध्यम और लंबी अवधि में ब्याज दरों में इजाफा होगा जो निवेश को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके आधार पर घोषणा के बाद मानक प्रतिफल में बढ़ोतरी की बात को समझा जा सकता है। 10 वर्ष के सरकारी बॉन्ड में 20 आधार अंक की बढ़ोतरी की बात कही गई है। यानी निवेश को कुछ सकारात्मक प्रोत्साहन मिलेगा तथा बॉन्ड बाजार के घटनाक्रम से उपजे अन्य व्यय को संतुलित किया जा सकेगा। 
 
तीसरा, कंपनी कर में यह अहम कटौती कॉर्पोरेट निवेश पर सकारात्मक असर डाल सकती है। कर दर को 35 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करना कर पश्चात प्रतिफल दर को बढ़ा सकता है। परंतु कुछ और बातें हैं जिन पर ध्यान देना होगा। प्रोत्साहन और रियायत के कारण कर कटौती का असर अलग-अलग कंपनियों पर अलग-अलग होगा। हो सकता है कई कंपनियां रियायतों को ही चुनें। कई ऐसी कंपनियां जिनको कर कटौती से लाभ हो रहा है उनकी बैलेंसशीट नकदीकृत हो सकती है। ऐसे में शायद वे अल्पावधि में अपने पूंजीगत व्यय की योजनाओं में तब्दीली न करें। कर बचत के अन्य लाभार्थी इस लाभ का इस्तेेमाल नकदी की तंगी दूर करने और तनावग्रस्त बैलेंस शीट में सुधार करने में करेंगे। क्रेडिट सुइस ने 30 सितंबर को प्रभाव विश्लेषण जारी किया जिसमें अनुमान जताया गया है कि अल्पावधि की कर कटौती से होने वाले लाभ का 90 फीसदी हिस्सा या तो अतिरिक्त मुनाफे के रूप में रहेगा या नकदीकरण के काम आएगा। यकीनन आगे चलकर अन्य आर्थिक और वित्तीय घटनाक्रम के चलते कॉर्पोरेट निवेश पर सकारात्मक प्रभाव पडऩे की भी अपेक्षा है।
 
नई कंपनियों के लिए कर दर को 35 फीसदी से घटाकर 17 फीसदी करने से आने वाले समय में इस क्षेत्र में घरेलू और विदेशी दोनों तरह का निवेश बढऩा चाहिए। परंतु कर कटौती से जुटने वाले निवेश की राशि कुछ अन्य नीतिगत बातों पर भी निर्भर करेगी जिनमें भूमि और श्रम नीतियां, वित्तीय और बुनियादी ढांचा क्षेत्र की स्थिति, कारोबारी सुगमता, अन्य कर नीतियां, राजकोषीय विवेक तथा विनिमय दर प्रतिस्पर्धा आदि शामिल हैं। अगर इन मामलों में सकारात्मक कदम उठते हैं तो निवेश पर सकारात्मक असर होगा। लेकिन इसका उलटा भी हो सकता है।
 
चौथी बात, कर कटौती निजी निपवेश और निजी क्षेत्र की गतिविधियों के लिए स्पष्ट संकेत लिए हुए है। इसका कंपनियों की निवेश योजनाओं पर सकारात्मक असर होना चाहिए। जाहिर है इससे आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ेगा। बहरहाल यह सकारात्मक असर भी व्यापक नीतिगत कारकों का मोहताज होगा।
 
पांचवां, कुछ लोगों का कहना है कि 20 सितंबर के कदमों के बाद शेयर बाजार में आई उछाल शेयर बाजार के मूल्यांकन और इस प्रकार संपत्ति पर पर सकारात्मक असर डालेगी और इससे खपत और निवेश में व्यय बढ़ेगा। मैं इसे लेकर दो वजह से शंकालु हूं। पहली बात, देश में परिसंपत्ति प्रभाव का विश्वसनीय मात्रात्मक आकलन अप्राप्यता के लिए जाना जाता है। दूसरा, शेयर कीमतों में इन दिनों जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में इसका सटीक उदाहरण देखने को मिला। मुझे इस बात को लेकर अचरज ही है कि कर कटौती से कितना विदेशी पूंजी निवेश आएगा और किन क्षेत्रों में आएगा। मेरी चिंता यह है कि यदि गैर कारोबारी क्षेत्रों में विदेशी पूंजी निवेश आया तो क्या होगा। इससे पहले से अधिमूल्यित विनिमय दर और बढ़ेगी। विनिमय दर अधिमूल्यन, आयात सब्सिडी और निर्यात पर कर का कुल मिलाकर निवेश और आयात प्रतिस्पर्धा तथा औद्योगिक निर्यात वृद्धि पर नकारात्मक असर हो सकता है। इससे बचने के लिए हमें विनिमय दर का बेहतर प्रबंधन करना होगा।
 
यानी संक्षेप में और मध्यम अवधि में कर कटौती का निवेश और वृद्धि पर क्या असर हो सकता है? यह कह पाना मुश्किल है। मेरी अपनी समझ कहती है कि अल्पावधि में इसका मामूली असर होगा और मध्यम अवधि में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। अगर सार्थक सुधार अपनाए गए तो यह सकारात्मकता कई गुना बढ़ सकती है।
Keyword: nirmala sitaraman, economy, corporate tax,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या व्यावसायिक खनन के लिए खदान आवंटन करना उचित कदम है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.