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अलग राह पर थोक व खुदरा महंगाई

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली October 14, 2019

उपभोक्ता मूल्य  सूचकांक (सीपीआई) और थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर की अलग राह पर यात्रा सितंबर में लगातार दूसरे माह बनी रही। ऐसा दोनों सूचकांकों की अलग बनावट की वजह से हो रहा है।  सितंबर महीने में सीपीआई आधारित महंगाई दर बढ़कर 14 माह के उच्चतम स्तर 3.99 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के 2 से 6 प्रतिशत के बीच रहने के लक्ष्य के अनुकूल है। अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर 3.28 प्रतिशत थी। वहीं थोक महंगाई दर गिरकर 39 माह के निचले स्तर 0.33 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले साल की समान अवधि में 1.08 प्रतिशत थी। 
 
इसकी प्रमुख वजह यह है कि खुदरा महंगाई में खाद्य वस्तुओं का भार ज्यादा होता है। थोक महंगाई दर में खाद्य वस्तुओं का हिस्सा 15 प्रतिशत होता है, जबकि खुदरा महंगाई दर में इसका हिस्सा 45 प्रतिशत से ज्यादा होता है।  खुदरा खाद्य महंगाई दर सितंबर महीने में बढ़कर 5.11 प्रतिशत हो गई है, जो इसके पहले महीने में 2.99 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं में सब्जियों की महंगाई दर 15.40 प्रतिशत रही है, जो इसके पहले 6.90 प्रतिशत थी। सब्जियों में भी अगर प्याज की महंगाई दर देखें तो इसमें 66.38 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो इसके पहले महीने में 6.37 प्रतिशत बढ़ी थी। जुलाई महीने में प्याज के दाम में 7.42 प्रतिशत गिरावट आई थी। 
 
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नैयर ने कहा, 'सीपीआई महंगाई दर मेंं सितंबर महीने में तेज बढ़ोतरी खाद्य वस्तुओं द्वारा संचालित रही है, जिसका एक हिस्सा अस्थायी है। जबकि अन्य सभी प्रमुख श्रेणियों में महंगाई का दबाव घटा है।'  केयर रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि अबसे सीपीआई महंगाई दर में कोई भी बढ़ोतरी होने का मतलब यह है कि रिजर्व बैंक अपने रुख में बदलाव पर विचार करेगा। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दरों में लगातार पांचवीं बार कटौती की है, जिससे आर्थिक वृद्धि को गति मिल सके। वितत्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर गिरकर 6 साल के निम्न स्तर 5 प्रतिशत पर पहुंच गई। 
 
थोक मूल्य सूचकांक में खाद्य महंगाई में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन यह सितंबर में 7.47 प्रतिशत पर बनी रही, जो अगस्त में 7.67 प्रतिशत थी। प्याज की महंगाई दर में 122 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो इस अवधि के दौरान 33 प्रतिशत थी।  दो अन्य बड़ी श्रेणियों ईंधन और बिजली व विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में थोक महंगाई दर में गिरावट आई है, जो मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय वजहों व कम मांग की वजह से है।  सीपीआई में भी ईंधन और प्रकाश की श्रेणी में गिरावट जारी है। सितंबर में अवस्फीति दर दरअसल 2.18 प्रतिशत रही है, जो इसके पहले महीने में 1.70 प्रतिशत थी। जुलाई अगस्त 2019 की स्थिरता के बाद प्रमुख सीपीआई महंगाई घटकर सितंबर महीने में 26 महीने के निचले स्तर 4.2 प्रतिशत पर आ गई। सीपीआई में स्वास्थ्य सेवाओं में महंगाई दर 7 प्रतिशत के ऊपर बनी हुई है। 
Keyword: IIP, WPI, economy,,
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