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'पिछले 10 दिनों में बैंकों से जुटाए 3,000 करोड़ रुपये'

हंसिनी कार्तिक /  October 14, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस को लक्ष्मी विलास बैंक के साथ विलय करने के प्रस्ताव को टाल दिया है। इंडियाबुल्स हाउसिंग के वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गगन बंगा ने कहा कि इस निर्णय से विलय के लिए कंपनी द्वारा खुद लगाई गई पाबंदियां खत्म हो जाएंगी। हंसिनी कार्तिक से बातचीत में उन्होंने आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। पेश हैं मुख्य अंश:

 
विलय को लेकर अनिश्चितताएं अब खत्म खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में कारोबार का स्वरूप क्या होगा?
 
पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान हमने आवास एवं खुदरा ऋण से लेकर लघु एवं मझोले उपक्रमों (एसएमई) तक को संपत्ति के बदले ऋण (एलएपी) दिया है। हालांकि विलय के मुद्दे पर हम नियामक के निर्णय का इंतजार कर रहे थे लेकिन हम अपने डेवलपर ऋण खाते को युक्तिसंगत बनाने के लिए काम कर रहे थे। इसके अलावा हमने अपने बैंक एवं घरेलू बॉन्ड उधारी को भी युक्तिसंगत बनाने की कोशिश की। ये ऐसे दायित्व हैं जो किसी बैंक के पास नहीं होने चाहिए। हालांकि आरबीआई के निर्णय के बाद खुद लगाई गई इस प्रकार की पाबंदियां अब खत्म हो गई हैं और अब हम वृद्धि को रफ्तार देने के लिए स्वतंत्र हैं। हम अपनी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी और शुद्ध ब्याज आय एवं कर बाद मुनाफे में 18-19 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद करते हैं। जबकि इक्विटी पर रिटर्न 20 फीसदी से अधिक जारी रहेगा।
 
वित्तपोषण की क्या स्थिति है? क्या आपने मौजूदा लाइन ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल किया और बैंकों से ताजा ऋण हासिल किए?
 
पिछले 10 दिनों में बैंकों से हमने करीब 3,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। पिछले साल सितंबर में उद्योग को नकदी संकट का झटका लगने के बाद हमारे पास 56,000 करोड़ रुपये से अधिक का दीर्घावधि फंड उपलब्ध है। हमारी क्रेडिट रेटिंग लगातार एएप्लस रही है और हमने बैंक, बॉन्ड बाजार एवं बाह्यï वाणिज्यिक उधारी जैसे विविध स्रोतों से रकम जुटाई है। पिछले 12 महीनों के दौरान हम अपने दायित्व प्रोफाइल पर काम कर रहे हैं और लघु अवधि वाणिज्यिक पत्रों पर निर्भरता को 1 फीसदी से कम उधारी तक घटाई है जो पहले 15 फीसदी थी। हमारी शुद्ध हैसियत 19,000 करोड़ रुपये और बहीखाते का आकार 1.1 लाख करोड़ रुपये है। इंडियाबुल्स हाउसिंग का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 27.8 फीसदी पर देश की सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में सर्वाधिक है। 
 
विलय में आसानी के लिए पिछले छह महीनों के दौरान आपने कुछ थोक ऋण की बिक्री की है। क्या आप इस श्रेणी में ऋण वितरण दोबारा शुरू करेंगे?
 
हमने दो ढांचे के तहत ऋण का विस्तार किया है: लीज रेंटल डिस्काउंटिंग (एलआरडी) और रेजिडेंशियल कंस्ट्रक्शन फाइनैंस (आरसीएफ)। एलआरडी का प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है जबकि कुछ वर्ष पहले आरसीएफ में नरमी का जोखिम दिखा था। उसके बाद हमने इइस परिसंपत्ति वर्ग पर जोर देना कम कर दिया। हम इस बहीखाते को लगातार घटा रहे हैं। हमने पहले भी कहा है कि हम मुख्य तौर पर खुदरा ऋण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं न कि थोक डेवलपर ऋण पोर्टफोलियो बढ़ाने के लिए नई परियोजनाओं पर।
 
दिसंबर के बाद आपने दायित्व प्रोफाइल में काफी बदलाव किया है। आगे इसका क्या आकार होगा?
 
पिछले 12 महीनों के दौरान ऋण बाजार वास्तव में खुला है। सह-उत्पत्ति मॉडल के तहत हमने सार्वजनिक क्षेत्र के कई बड़े बैंकों के साथ करार किया है। इससे हमें बहीखाते को युक्तिसंगत बनाते हुए ऐसेट-लाइट मॉडल के तहत वृद्धि करने का अवसर मिला है। हमारी एक तिहाई परिसंपत्तियां प्रतिभूतिकृत होंगी, एक तिहाई सह-उत्पत्तिकृत और शेष एक तिहाई परिसंपत्तियां हमारे बहीखाते पर बरकरार रहेंगी।
Keyword: RBI, indiabulls, laxmi vilas bank,,
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