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अनियमित आय के भंवर में क्या करें फ्रीलांसर

संजय कुमार सिंह /  October 13, 2019

दिल्ली की रहने वाली प्रकाशन सलाहकार 35 वर्षीय प्रियंका सरकार अनुभवी पेशवर हैं। वह पुस्तकों का संपादन करती हैं और उन्हें काम करते हुए साढ़े ग्यारह साल हो चुके हैं। पिछले साल उन्होंने अपना काम शुरू करने का फैसला लिया क्योंकि वह नई चीजों में हाथ आजमाना चाहती थीं। वह कहती हैं, 'आपको नौकरी में साल-दर-साल एक जैसा ही काम करते रहना पड़ता है।' हालांकि वह किस परियोजना पर काम करना चाहती हैं, इसका फैसला लेने की आजादी कुछ चुनौतियों के साथ आई है। उनकी औसत मासिक आय उसकी ठीक आधी रह गई है, जितना वह एक वेतनभागी कर्मचारी के रूप में कमाती थीं। कभी-कभी काम की आवक और आमदनी दोनों नियमित नहीं होती हैं। 

डेलॉयट के हाल के एक सर्वेक्षण (ग्लोबल मिलेनियल सर्वे 2019) में पाया गया है कि ज्यादातर युवा 9 से 5 बजे तक की नौकरी के बजाय अस्थायी नौकरियों को तरजीह देंगे। हालांकि स्वतंत्र रूप से काम करने से आजादी मिलती है, लेकिन इससे वित्तीय चुनौतियां भी पैदा होती हैं। इससे फ्रीलांसरों के लिए अपने धन के प्रबंधन की सावधानीपूर्वक योजना बनाना जरूरी हो जाता है ताकि वे अपने काम की अनिश्चितता का मुकाबला कर सकें।  

बचत पर दें ध्यान 

फ्रीलांसरों की आमदनी में घटत-बढ़त के बहुत अधिक आसार होते हैं, इसलिए उन्हें अपना बजट बनाने और उससे अधिक खर्च न करने पर वेतनभागी कर्मचारियों से ज्यादा ध्यान देना चाहिए। राइट होरिजंस के मुख्य कार्याधिकारी अनिल रेगो ने कहा, 'अपनी औसत मासिक आमदनी का कम से कम 25 फीसदी बचाएं और निवेश करें।' फ्रीलांसरों को जिन महीनों में मोटी आमदनी होती है तो उन्हें उन महीनों में और अधिक पैसा बचाना चाहिए ताकि कम आमदनी के महीनों की भरपाई 

की जा सके। जिस बचत खाते में आपको पैसा मिलता है, उससे पैसे को निकालकर उस दूसरे बचत खाते में भेजें, जिसे आप निवेश खाता मानते हैं। इस तरह खातों को अलग-अलग करने से आप अपना निवेश लक्ष्य हासिल करने के लिए धनराशि का निवेश कर पाएंगे। पर्याप्त बचतों से फ्रीलांसरों को अपनी रुचि और अच्छी कमाई वाले कामों से जुड़े रहने में मदद मिलती है। 

स्वतंत्र रूप से काम करने वाले लोगों को व्यक्तिगत और कारोबारी खर्चों को अलग-अलग रखना चाहिए। अगर उन्हें पता होगा कि पैसा कहां खर्च हो रहा है तो वे न केवल खर्चों में कटौती करने मे समर्थ होंगे बल्कि खर्चों को अलग-अलग करने से कर योजना में भी मदद मिलेगी। 

आपात कोष बनाएं 

भविष्य की आय हमेशा अनिश्चित होती है, इसलिए फ्रीलांसरों को मुश्किल समय के लिए एक आपात कोष बनाना चाहिए। इन्वेस्टऑनलाइन डॉट इन के संस्थापक अभिनव अंगिरीश ने कहा, 'यह कोष आपके छह महीने के औसत खर्च के बराबर होना चाहिए।' यह धनराशि एक स्वीप अकाउंट में रखी जानी चाहिए, जिसमें बचत खाते में पैसा एक निश्चित राशि से अधिक होने पर सावधि जमा में चला जाता है। आपात धनराशि को रखने का एक अन्य विकल्प लिक्विड फंड भी हो सकता है।  

पर्याप्त जीवन बीमा खरीदें 

नियमित रोजगार का एक लाभ यह है कि कर्मचारियों को समूह बीमा कवर (जीवन और स्वास्थ्य) मिल जाते हैं। फ्रीलांसर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके और उसके परिवार का पर्याप्त कवर हो। युवावस्था में ही एक टर्म कवर खरीदें, जब उसकी लागत कम होती है। एगोन लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी विनीत अरोड़ा ने कहा, 'जिन लोगों की उम्र 20 से 30 के बीच है, उन्हें अपनी सालाना आमदनी का 20 गुना कवर रखना चाहिए। 

जो लोग 30 से 40 के बीच हैं, उन्हें अपनी सालाना आय का 15 गुना बीमा लेना चाहिए। वहीं जिनकी उम्र 40 से 50 के बीच है, उन्हें 10 गुना बीमा कवर लेना चाहिए। ये आंकड़े इस अनुमान पर आधारित हैं कि आपकी आमदनी उम्र के साथ बढ़ेगी।' 

फ्रीलांसरों की आमदनी घटती-बढ़ती रहती है, इसलिए उन्हें अपने भुगतान का तरीका सावधानीपूर्वक चुनना चाहिए। अरोड़ा ने कहा, 'अगर आप 30 साल के हैं और आपने 60 साल की उम्र तक के लिए टर्म कवर लिया है तो पूरा प्रीमियम पहले 10 वर्षों में चुकाना बहुत अच्छा रहेगा।' जब फ्रीलांसर ऐसा कोई सीमित भुगतान विकल्प चुनते हैं तो उनकी अग्रिम लागत अधिक होती है, लेकिन वे कुछ समय बाद प्रीमियम चुकाने के लिए बचत की जिम्मेदारी से छुटकारा पा लेते हैं। फ्रीलांसरों को कम से कम 5 से 15 लाख रुपये का पर्सनल फैमिली फ्लोटर कवल लेना चाहिए। जिसकी उम्र 20 से 30 के बीच है, उसके लिए 10 लाख रुपये के फैमिली फ्लोटर की लागत करीब 10,000 रुपये से 15,000 रुपये आएगी।  

सही निवेश रणनीति बनाएं 

अस्थायी काम-काज करने वाले लोगों को अनिवार्य बचत और कर्मचारी भविष्य निधि और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के जरिये नियोक्ता के समान योगदान का लाभ नहीं मिलता है, इसलिए उन्हें सेवानिवृत्ति के लिए युवा उम्र से ही बचत शुरू कर देनी चाहिए। बच्चों की शिक्षा और शादी जैसे अन्य लंबी अïवधि के लक्ष्यों के लिए भी बचत की जानी चाहिए। रेगो ने कहा, 'अगर आप 100 रुपये कमाते हैं तो 25 रुपये बचाएं एवं निवेश करें। इसमें से एक सीमित राशि माना कि 10 रुपये एनपीएस (सभी नागरिकों के लिए) और सार्वजनिक भविष्य निधि जैसी लॉक-इन वाली लंबी अवधि की योजनाओं में जाने चाहिए।' शेष 15 रुपयों में से 3-4 रुपये अपने परिवार के लिए पर्याप्त जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा खरीदने पर खर्च किए जाने चाहिए। शेष 11 से 12 रुपये इक्विटी एवं डेट म्युचअल फंडों जैसी बाजार से संबंधित योजनाओं में निवेश किए जाने चाहिए।  

करों का रखें खयाल 

फ्रीलांसरों को अपनी कर देनदारी पूरी करने के लिए बजट बनाना चाहिए और पर्याप्त बचत करनी चाहिए। सैंट्रम वेल्थ मैनेजमेंट में निवेेश योजनाओं की प्रमुख रूपाली प्रभु ने कहा, 'बड़ी परियोजनाएं मिलने से उनकी आमदनी और कर देनदारी बढ़ सकती है, इसलिए उन्हें यह देनदारी पूरी करने के लिए आरक्षित कोष बनाना शुरू करना चाहिए।' उन्होंने कहा कि फ्रीलांसरों को अपनी कर देनदारी कम से कम करने के लिए सभी वैध साधनों जैसे सभी कटौतियों और छूटों का इस्तेमाल करना चाहिए। अंगिरीश ने कहा कि खुद का काम करने वाले लोगों को अपनी कर देनदारी का आकलन करते समय अपनी आमदनी से काम से संबंधित खर्चों की कटौती का लाभ उठाने से नहीं चूकना चाहिए।
Keyword: freelancer, Investment, Job, Salaried, Income,
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