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सिंह बंधु: कानून के शिकंजे में दिग्गज

आशिष आर्यन /  October 13, 2019

प्रमुख औषधि कंपनी रैनबैक्सी और देश की दूसरी सबसे बड़ी अस्पताल शृंखला फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रवर्तक सिंह बंधुओं की कारगुजारी धीरे-धीरे सामने आ रही है। विभिन्न अदालतों में तमाम मुकदमों से जूझ रहे मालविंदर मोहन सिंह और उनके छोटे भाई शिविंदर मोहन सिंह अब पुलिस हिरासत में हैं। सिंह बंधु द्वारा स्थापित और कभी उनके नियंत्रण वाली वित्तीय सेवा कंपनी की ओर से दायर वित्तीय अनियमितता के एक मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई है। आइये सिंह बंधुओं के खिलाफ चल रहे विभिन्न मुकदमों पर नजर डालते हैं: 

दायची सैंक्यो-रैनबैक्सी मामला

सिंह बंधु को 2013 में उस समय झटका लगा था जब जापान की औषधि कंपनी दायची सैंक्यो ने रैनबैक्सी मामले में उनके खिलाफ सिंगापुर की अदालत में याचिका दायर की थी। वहां से अनुकूल फैसला मिलने के बाद उसे लागू कराने के लिए दायची सैंक्यो ने दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।

विवाद

सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत ने दोनों भाइयों को दोषी करार देते हुए कहा कि 2008 में जब दायची सैंक्यो ने रैनबैक्सी में 34.82 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी तो उन्होंने कुछ जानकारी छिपाई थी। अदालत ने सिंह बंधु को निर्देश दिया कि वे दायची सैंक्यो को 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान करें।

स्थिति

दिल्ली उच्च न्यायालय में यह मामला तीन साल से अधिक समय से जारी है। उच्च न्यायालय ने 27 सितंबर को अपने ताजा आदेश में सिंह बंधु को 30 दिनों के भीतर अदालत में करीब 6,000 करोड़ रुपये जमा कराने के लिए कहा था। इस बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने उस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है कि अदालती आदेश को नजरअंदाज करते हुए उन्होंने आरएचसी होल्डिंग में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री की और इसके लिए उन्हें अदालत के अवमानना का दोषी माना जाय अथवा नहीं। 

एचडीएफसी-आरएचसी होल्डिंग दिवालिया मामला

एचडीएफसी ने 2018 में सिंह बंधु द्वारा प्रवर्तित कंपनी आरएचसी होल्डिंग के खिलाफ दिवालिया मामला शुरू करने के लिए एनसीएलटी में शिकायत की।

विवाद

एचडीएफसी ने कहा कि आरएचसी होल्डिंग ने करीब 41 करोड़ रुपये के भुगतान में चूक की है और पुनर्भुगतान के लिए बैंक द्वारा आग्रह किए जाने पर कोई जवाब नहीं दिया। उसने यह भी आरोप लगाया कि आरएचसी होल्डिंग गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के दायरे में नहीं आती है और इसलिए उसके खिलाफ दिवालिया मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

स्थिति

एचडीएफसी की याचिका को एनसीएलटी ने खारिज कर दिया और उसके बाद कंपनी ने नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में अपील दायर की। एनसीएलएटी ने भी एचडीएफसी की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि आरएचसी होल्डिंग वास्तव में एक एनबीएफसी थी और इसलिए उसके खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती है। अब एचडीएफसी ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है जहां मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है।

रेलिगेयर धोखाधड़ी मामला

यह मामाला फिलहाल सुर्खियों में है और इसकी शुरुआत दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश से हुई थी। दायची सैंक्यो-रैनबैक्सी मध्यस्थता मामले में सुनवाई के दौरान रेलिगेयर एंटरप्राइजेज ने यह कहते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय से संपर्क किया कि सिंह बंधु से वसूली गई रकम का एक हिस्सा उसे भी मिलना चाहिए। कंपनी ने दावा किया कि एक आंतरिक अंकेक्षण से पता चलता है कि सिंह बंधु के कार्यकाल के दौरान करीब 740 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। इस पर न्यायालय ने रेलिगेयर एंटरप्राइजेज को अपने पूर्व प्रवर्तकों के खिलाफपुलिस में शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया। उसके बाद आरईएल ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराई।

विवाद

साल 2018 में रेलिगेयर एंटरप्राइजेज से प्रवर्तक के तौर पर सिंह बंधु के बाहर होने के बाद कंपनी ने आंतरिक अंकेक्षण कराया और पाया कि दोनों बंधुओं ने उचित प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए अपनी दूसरी कंपनियों को कर्ज दिए थे। आर्थिक अपराध शाखा की एफआईआर में कहा गया है कि धोखाधड़ी की रकम 2,300 करोड़ रुपये तक हो सकती है।

स्थिति

सिंह बंधु को पिछले सप्ताह दिल्ली की एक निचली अदालत ने आर्थिक अपराध शाखो चार दिनों के लिए रिमांड पर भेज दिया। 

एसएफआईओ की जांच

फोर्टिस हेल्थकेयर से रकम की हेराफेरी मामले में सिंह बंधुओं की भूमिका की जांच आर्थिक अपराध शाखा के अलावा गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) भी कर रहा है। एसएफआईओ ने आरंभिक जांच के बाद कहा था कि इस मामले में करीब 2,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हो सकती है।

विवाद

एसएफआईओ और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आशंका जताई है कि सिंह बंधुओं ने फोर्टिस हेल्थकेयर में आम लोगों की रकम का हस्तांतरण राधा स्वामी सत्संग व्यास के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों को किया है।

स्थिति

इस मामले में मालविंदर मोहन सिंह को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है। उन्होंने आर्थिक अपराध शाखा के एफआईआर को खारिज कराने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में दलील दी है कि एसएफआईओ और ईओडब्ल्यू साथ-साथ जांच नहीं कर सकते। अदालत ने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रखा है।
Keyword: malvinder singh, shivinder singh, SEBI, Business Law, Forgery, Court,
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