बिजनेस स्टैंडर्ड - कर आतंक का भूत भगाने की दरकार
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कर आतंक का भूत भगाने की दरकार

सुदीप्त दे /  October 13, 2019

पहले राफेल लड़ाकू विमान को सौंपने के लिए पेरिस के समीप आयोजित कार्यक्रम में विमान इंजन बनाने वाली फ्रांस की बहुराष्ट्रीय कंपनी सैफ्रन के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) ने कुछ मुद्दों पर आपत्ति जताई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दी गई एक प्रस्तुति में सीईओ ने कथित तौर पर कहा कि भारत को आकर्षक कारोबारी माहौल उपलब्ध कराना चाहिए और हमें कर एवं सीमा शुल्क संबंधी नियमों से 'आतंकित' नहीं करना चाहिए। उसके तुरंत बाद कंपनी ने सफाई देते हुए स्पष्टï किया कि सीईओ को सुनने में गलती हो गई और वह कर एवं सीमा शुल्क व्यवस्था के तहत जुर्माने के खिलाफ बोल रहे थे।

राफेल लड़ाकू विमानों में सैफ्रन द्वारा विनिर्मित इंजन लगाए गए हैं। कंपनी ने भारत में प्रशिक्षण एवं रखरखाव पर 15 करोड़ डॉलर के निवेश योजनाओं की भी घोषणा की है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि सैफ्रन के सीईओ की ये टिप्पणी भले ही कुछ कर रियायत हासिल करने के लिए मोलभाव की एक चाल हो सकती है लेकिन इससे पता चलता है कि विदेशी निवेशक भारत में कराधान को लेकर अभी भी आशंकित दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कर नीति में बदलाव और कर कानूनों में पिछली तरीख से संशोधन किए जाने के कारण बढ़ रही मुकदमेबाजी के मद्देनजर बहुराष्ट्रीय कंपनियां आशंकित दिख रही हैं।

कर सलाहकार फर्म ट्रांजेक्शन स्क्वायर के संस्थापक गिरीश वनवारी ने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय कारोबारी जगत में वोडाफोन, शेल और केयर्न मामलों की गूंज अभी भी दिख रही है। एफपीआई पर अधिभार के मामले में इन मुद्दों का जोर दिखा था जो अब खत्म हो चुका है।' 

पिछले चार से पांच वर्षों के दौरान सरकार ने देश को विदेशी निवेशकों के लिए एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। कर संबंधी मुकदमेबाजी को घटाने के लिए विभिन्न मोर्चे पर कई पहल किए गए हैं। इसी क्रम में कुछ कर सीमा से नीचे के मामलों को वापस लिए गए हैं।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार कर सुधार पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अब कर प्रशासन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। ध्रुव एडवाइजर्स के सीईओ दिनेश कंवर ने कहा, 'कर की दर वास्तव में एक महत्त्वपूर्ण पहलू है और अध्यादेश के तहत लागू नई कर व्यवस्था ने भारत को कर के मोर्चे पर कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है। उसमें कहा गया है कि कर प्रशासन और कर नीतियों को लागू करना कर व्यवस्था के तहत बराबर महत्त्व के पहलू हैं।' 

केपीएमजी इंडिया के पार्टनर एवं सह-प्रमुख (कर) हितेश डी गजारिया ने कहा, 'कर प्रशासन को विभिन्न स्तरों पर करदाताओं के कहीं अधिक अनुकूल बनाने की जरूरत है।' कंवर के अनुसार, भारतीय कर व्यवस्था में मुख्य तौर पर दो खामियां हैं। उन्होंने कहा, 'पहला, अनिश्चितता क्योंकि हरेक कर अधिकारी कानून को अपने तरीके से परिभाषित करता है और कभी-कभी उसमें विरोधाभास दिखता है।' ऐसे में करदाताओं के लिए यह निश्चित करना आसान नहीं होता कि उस परिस्थिति में क्या परिणाम निकलेंगे। दूसरी समस्या कर विवाद को निपटाने में लगने वाले समय को लेकर है। उन्होंने कहा, 'किसी भी बड़े मामले को अंतिम समाधान तक पहुंचने में आमतौर पर 10 से 15 वर्ष लग जाते हैं।' उन्होंने कहा कि त्वरित निपटान व्यवस्था के तहत भी फैसला आने में चार से पांच वर्ष लग जाते हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की राह आसान बनाने के लिए एक केंद्रीय टीम गठित की जानी चाहिए जो कर कानूनों एवं संधियों की व्याख्या के मोर्चे पर निर्देश दे सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है जिससे विवाद को लंबी मुकदमेबाजी में ले जाने के बजाय तत्काल उसे निपटाया जा सके। गजारिया ने कहा कि सरकार को एक पारदर्शी विवाद निपटान अथवा समाधान योजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे निवेशकों के दिमाग में चल रही अनिश्चितताओं को दूर करने में मदद मिलेगी।

नांगिया एडवाइजर्स (एंडरसन ग्लोबल) के मैनेजिंग पार्टनर राकेश नांगिया ने कहा, 'सरकार कर व्यवस्था को दुरुस्त करने की कोशिश कर रही है और ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत में कर आंतक पतन की राह पर है।' विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को क्रियान्वयन और विवादों को तेजी से निपटाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वनवारी ने कहा कि विश्वसनीय उपायों के जरिये राजनीतिक इच्छाशक्ति को नीतिगत निर्णयों में बदलने से इस धारणा को बदलने में मदद मिलेगी।
Keyword: Rafale, France, Fighter Plane, Defence,
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