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मंत्रालयों में अनिवार्य होंगे टेक्निकल टेक्सटाइल!

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली October 13, 2019

घरेलू उत्पादन और रोजगार सृजन बढ़ावा देने के लिए सरकार जल्दी ही सभी मंत्रालयों और सरकारी संस्थाओं के लिए टेक्निकल टेक्सटाइल्स के इस्तेमाल को अनिवार्य बनाने की तैयारी में है। वरिष्ठ सरकारी सूत्रों के मुताबिक 92 श्रेणियों के टेक्निकल टेक्सटाइल्स की अनिवार्य इस्तेमाल के लिए पहचान की गई है। इनमें आग से बचाव वाले पर्दे, रेलवे के लिए जियो ग्रिड, बुलेट प्रूफ जैकेट, कृषि जिंसों को ढोने के लिए लेनो बैग और टेंटों के लिए आर्किटेक्चरल मेंब्रेन शामिल है। 

सूत्रों का कहना है कि बुनियादी और सार्वजनिक निर्माण की बड़ी परियोजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले सात मंत्रालय इस पहल की अगुआई करेंगे। इनमें रेलवे, सड़क परिवहन, जल शक्ति, कृषि, शहरी विकास, स्वास्थ्य और रक्षा शामिल हैं। मंत्रिमंडल में जल्दी ही इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है और नियमों को अधिसूचित किया जा सकता है। टेक्निकल टेक्सटाइल्स का संबंध ऐसे कपड़ों से है जिनका उत्पादन पहनने के लिए नहीं किया जाता है।

इनका इस्तेमाल वाहन, निर्माण, कृषि और कई अन्य उद्योगों में किया जाता है। इस क्षेत्र में उच्च विकास और रोजगार सृजन की अपार क्षमता है। फिलहाल यह 12 अलग-अलग उद्योगों में बंटा है। एक अधिकारी ने कहा कि इंप्लाट जैसे मेडिकल टेक्सटाइल, नदी तटबंधों को बनाने या चट्टानों के सुदृढ़ीकरण में काम आने वाला जियोटेक्सटाइल और फसलों के संरक्षण में उपयोगी एग्रोटेक्सटाइल में विकास की अपार संभावनाएं हैं। कपड़ा मंत्रालय सार्वजनिक निर्माण में इन उत्पादों की व्यावहारिकता का पता लगाने के लिए कई प्रायोगिक परियोजनाएं चला रहा है। अधिकारी ने बताया कि पूर्वोत्तर की पहाडिय़ों में सड़क निर्माण में जियोटेक्सटाइल के इस्तेमाल की 427 करोड़ रुपये की परियोजना बेहद सफल रही है। इससे सड़कों को कम मरम्मत की जरूरत होती है और उन पर लंबे समय तक वाहन चल सकते हैं। साथ ही यह भूकंप के लिहाज से संवेदनशील पूर्वोत्तर के अनुकूल है। 

सरकार साथ ही टेक्निकल टेक्सटाइल्स के निर्यात को भी दुरुस्त करना चाहती है। जनवरी में सरकार ने 207 टेक्निकल टेक्सटाइल उत्पादों के लिए हार्मोनाइज्ड सिस्टम ऑफ नॉमेनक्लेचर (एचएसएन) कोड अधिसूचित किए थे। यह कोड विश्व स्तर पर सामान का वर्गीकरण करता है और उनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सहायता देता है। स्पष्टï वर्गीकरण के अभाव में टेक्निकल टेक्सटाइल बनाने वाली कंपनियों की शिकायत रहती है कि उन्हें केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से छूट नहीं मिल रही है।

अब कपड़ा मंत्रालय ने विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) से 40 और उत्पादों को मंजूरी देने का अनुरोध किया है। इसके बाद इनके निर्यात की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसी योजना के तहत सरकार 348 तरह के टेक्निकल टेक्सटाइल्स के मानकीकरण को अंतिम रूप दे चुकी है और 159 भारतीय मानक ब्यूरो के विचाराधीन हैं। 

सरकार ऐसे समय में टेक्निकल टेक्सटाइल क्षेत्र पर दांव खेल रही है जब देश का परिधान निर्यात सुस्त पड़ा है। परंपरागत रूप से भारत को इससे काफी विदेशी मुद्रा अर्जित होती रही है। भारत हर साल 16 अरब डॉलर के सिलेसिलाए कपड़ों का निर्यात करता है लेकिन 2018-19 में इसमें तीन फीसदी गिरावट देखी गई।  

मौजूदा वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में केवल 6.8 अरब डॉलर के तैयार कपड़े निर्यात किए गए। इसकी तुलना में जिन 348 उत्पादों के मानकीकरण किया गया है, उनका निर्यात जनवरी से जून की अवधि में 17 फीसदी बढ़ा है, जबकि नकारात्मक व्यापार संतुलन में 52 फीसदी रह कमी आई है। सरकार निर्यातकों के लिए कई कार्यशालाएं आयोजित करने जा रही है। जल्दी ही देश में टेक्निकल टेक्सटाइल्स पर छह नए पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। आगामी नीति से लागत में न्यूनतम बढ़ोतरी होगी क्योंकि घरेलू कंपनियों की लगभग सभी टेक्निकल टेक्सटाइल्स में उल्लेखनीय मौजूदगी है।

टेक्निकल टेक्सटाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक धीरे-धीरे ही सही लेकिन इन उत्पादों का उत्पादन भारत में जोर पकड़ रहा है। दुनिया के टेक्निकल टेक्सटाइल्स बाजार में भारत की हिस्सेदारी अभी महज चार फीसदी है लेकिन पिछले कुछ वर्षों के दौरान यह 12 फीसदी की सालाना दर से बढ़ा है। मंत्रालय द्वारा कराए गए पिछले सर्वेक्षण के मुताबिक देश में 2017-18 में इसका घरेलू बाजार 1.16 लाख करोड़ रुपये का था। कपड़ा आयुक्त कार्यालय का अनुमान है कि 2020-21 तक इसका बाजार दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली द्वारा कराए जा रहे नए सर्वेक्षण के नतीजे नवंबर में जारी किए जाएंगे। 

सरकारी अनुमानों के अनुसार देशभर में 2100 इकाइयां टेक्निकल टेक्सटाइल्स का उत्पादन कर रही हैं। सबसे अधिक इकाइयां गुजरात में हैं। इसके बाद महाराष्ट्र तथा तमिलनाडु का स्थान है। देश की कुल टेक्सटाइल मूल्य शृंखला में इसकी हिस्सेदारी 12 से 15 फीसदी है। परिधानों की तुलना में टेक्निकल टेक्सटाइल की विकास दर बहुत ज्यादा है। ब्रिटेन की संस्था अलाइड मार्केट रिसर्च के मुताबिक 2017 में वैश्विक टेक्निकल टेक्सटाइल बाजार की कीमत 234 अरब डॉलर थी।

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