बिजनेस स्टैंडर्ड - अफ्रीका की कमजोर मांग से चावल निर्यात 29 प्रतिशत गिरा
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अफ्रीका की कमजोर मांग से चावल निर्यात 29 प्रतिशत गिरा

रॉयटर्स / मुंबई October 10, 2019

देश का चावल निर्यात अगस्त में सालाना आधार पर 29 प्रतिशत गिरकर 6,44,249 टन रह गया। अन्य कारणों के साथ-साथ अफ्रीकी देशों से गैर-बासमती चावल की कमजोर मांग के कारण ऐसा हुआ है। सरकार के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। ओलम इंडिया के उपाध्यक्ष (चावल कारोबार) नितिन गुप्ता ने कहा कि पश्चिमी अफ्रीकी देशों से गैर-बासमती चावल की मांग कमजोर है। उन्होंने चीन से काफी खरीद की है और अब बड़ी मात्रा में खरीद करने की जरूरत नहीं है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष 2019-20 के पहले पांच महीनों में इसकी खेपों में 27 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह लुढ़ककर 38 लाख टन रह गया है। दिल्ली के एक निर्यातक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भारत के बासमती चावल के सबसे बड़े खरीदार ईरान ने पिछले कुछ सप्ताहों से खरीद लगभग बंद ही कर दी है क्योंकि वह अपनी फसल की कटाई कर रहा है। निर्यातक ने कहा कि ईरान स्थानीय फसल कटाई के बाद अगले साल की शुरुआत में खरीद दोबारा शुरू कर सकता है।
 
गुप्ता ने कहा कि भारत की ग्रीष्मकाल में बोई जाने वाली फसल से चावल आपूर्ति अगले महीने से सुधरने की उम्मीद है और इससे स्थानीय कीमतों में गिरावट आ सकती है तथा निर्यात प्रतिस्पर्धी हो सकता है। पिछले महीने सरकार ने कहा था कि 2019 के दौरान गर्मियों में बोई जाने वाली फसल से चावल का उत्पादन एक साल पहले की तुलना में 1.7 प्रतिशत गिरकर 10.035 करोड़ टन रहने की संभावना है। चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष बीवी कृष्ण राव ने कहा कि अगर सरकार निर्यात के लिए कुछ प्रोत्साहन उपलब्ध नहीं कराती है तो पिछले साल की तुलना में 2019-20 के दौरान गैर-बासमती चावल निर्यात 40 प्रतिशत गिर सकता है। राव ने कहा कि निर्यात बढ़ाने के लिए उद्योग को सरकारी प्रोत्साहन की नितांत आवश्यकता है।
 
भारत ने 2018-19 में 31 मार्च तक 1.195 करोड़ टन चावल का निर्यात किया था जो पिछले 12 महीनों की तुलना में 7.2 प्रतिशत कम रहा। हालांकि चार महीने के लिए गैर-बासमती चावल निर्यात के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया गया था। प्रतिस्पर्धियों की ओर से कम दाम भी निर्यात में गिरावट का एक महत्त्वपूर्ण कारण हो सकता है। इस सप्ताह भारत के पांच प्रतिशत टूटे सफेद चावल के दाम करीब 368-372 डॉलर प्रति टन की दर से बोले गए हैं, जबकि वियतनाम के दाम 350 डॉलर प्रति टन रहे। भारतीय निर्यातकों के अनुसार भारत की छोटी खेपों से थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार जैसे प्रतिस्पर्धियों को अपना निर्यात बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार को भी किसानों से ज्यादा खरीद के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जबकि सरकार पिछले साल के बचे हुए स्टॉक की बिक्री के लिए मशक्कत कर रही है। भारत मुख्य रूप से बांग्लादेश, नेपाल, बेनिन और सेनेगल को गैर-बासमती चावल का तथा ईरान, सऊदी अरब और इराक को बढिय़ा बासमती चावल का निर्यात करता है।
Keyword: india, africa, rice, export,,
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