बिजनेस स्टैंडर्ड - रत्नाभूषण निर्यात 7.6 फीसदी घटा
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रत्नाभूषण निर्यात 7.6 फीसदी घटा

राजेश भयानी / मुंबई October 10, 2019

नीति-निर्माताओं और बैंकरों के मस्तिष्क पर नीरव मोदी की धोखाधड़ी के पड़े असर से रत्नाभूषण क्षेत्र को बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है क्योंकि उद्योग अमेरिका-चीन के व्यापार युद्ध का लाभ उठाने में नाकाम रहा है। प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लगभग 50 लाख लोगों को रोजगार देने वाले इस उद्योग की विकास की संभावना तेजी से धुंधली पड़ती जा रही है क्योंकि इस क्षेत्र के प्रति सरकार की उदासीनता और बैंकरों द्वारा निर्यातकों की कार्यशील पूंजी की वास्तविक जरूरतों की अनदेखी की जा रही है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में कुल रत्नाभूषण निर्यात 7.58 प्रतिशत तक गिरकर 18.88 अरब डॉलर रह गया, जबकि सितंबर में यह 6.24 प्रतिशत गिरकर 3.37 अरब डॉलर रहा। अमेरिकी बाजार की ओर से क्रिसमस की मांग के कारण परिदृश्य अच्छा लग रहा है जो अब भी अन्य बाजारों की तुलना में बेहतर है लेकिन उद्योग कई दिक्कतों के कारण इसका लाभ नहीं उठा पा रहा है। इससे कार्यशील पूंजी में रुकावट आ रही है और कुल लागत में इजाफा हो रहा है जिससे निर्यात अव्यावहारिक हो रहा है।
 
रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के उपाध्यक्ष कोलिन शाह ने कहा कि विशेष आर्थिक क्षेत्र संबंधी नीति, हीरों पर सीमा शुल्क तथा प्रमाणन पर जीएसटी जैसी खास चुनौतियों को लेकर परिषद की ओर से कई बार अवगत कराए जाने के बावजूद हम अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध से फायदा उठाने में असमर्थ हैं। अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध ने भारतीय निर्यातकों के सामने अमेरिका को और अधिक निर्यात करने का रास्ता खोला है, जहां कीमती धातुओं के गहनों की अच्छी मांग है। चीनी कंपनियां अपना कारोबार चीन से भारत में स्थानांतरित करने की संभावनाएं तलाश रही हैं। यहां तक कि पिछले महीने भी कई चीनी कंपनियां भारत के दौरे पर आई थीं लेकिन सरकार सेज परिचालन के लिए नियमों में ढील और प्रक्रिया संबंधी कुछ मसलों की उनकी मांगे नहीं मान रही है।
 
एकमात्र राहत की बात यह है कि अगस्त में नजर आने वाली तेज गिरावट सितंबर में रुक गई है। अगस्त में कुल निर्यात में 14.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी और इस वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में निर्यात 8.9 प्रतिशत लुढ़क गया। तराशे हुए हीरों के मामले में भी यही रुझान देखने को मिला। तराशे हुए हीरों का निर्यात सितंबर 2019 में 17.82 प्रतिशत गिरकर 1.94 अरब डॉलर रहा, जबकि अगस्त में इसमें 24.9 प्रतिशत की गिरावट आई थी। वित्त वर्ष 20 के पहले छह महीने में निर्यात 19.8 प्रतिशत गिरकर 10.29 अरब डॉलर रहा।
 
सूरत डायमंड एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दिनेश नवाडिया ने कहा कि दिक्कत वाले डेढ़ साल बाद पिछले दो महीने में हीरा प्रसंस्करण करने वालों को कुछ राहत मिली है। कारोबारी गतिविधियों में सुधार हुआ है और उनके पास रखा स्टॉक भी कम हो रहा है। प्रसंस्करण करने वाली कई इकाइयों के लिए यह राहत स्वागत योग्य है। इन्हें दीवाली सीजन के दौरान कुछ मदद मिल सकती है। सितंबर 2019 में स्वर्ण आभूषण निर्यात में इजाफे का रुख रहा और यह 12.90 प्रतिशत बढ़कर 101.965 करोड़ डॉलर हो गया। पहले छह महीने के निर्यात में अब 0.67 प्रतिशत का मामूली इजाफा हुआ है।
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