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ओडीआई निवेश के लिए नियमों को उदार बनाएगा सेबी

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई October 09, 2019

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट (ओडीआई) जारी करने के लिए नियमों को उदार बना सकता है। यदि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने विशेष तौर पर ओडीआई जारी करने के लिए अलग से पंजीकरण कराया है तो उन्हें अंतर्निहित डेरिवेटिव के साथ इन प्रतिभूतियों को जारी करने के लिए अनुमति दी जा सकती है। नए प्रावधानों से भारत में ओडीआई के जरिये निवेश को पुनर्जीवित करने की कोशिश की गई है और यह विदेशी निवेशकों के लिए अच्छी खबर है क्योंकि उन्हें भारतीय डेरिवेटिव में निवेश करने के लिए एफपीआई के तौर पर पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने बताया कि एफपीआई अपनी निवेश सीमा का 5 फीसदी निवेश डेरिवेटिव में कर पाएंगे और वह भी अपनी अंतर्निहित पोजीशन की हेजिंग किए बिना। उन्होंने कहा कि बाजार नियामक सेबी इन एफपीआई की गतिविधियों पर कहीं अधिक करीबी नजर रख सकेगा क्योंकि वे एक अलग श्रेणी के तहत आएंगे।
 
निशीथ देसाई एसोसिएट्स के पार्टनर रिची संचेती ने कहा, 'विदेशी निवेशकों का एक तबका एफपीआई के तौर पर पंजीकृत हुए बिना ओडीआई सब्सक्राइबर के तौर पर डेरिवेटिव में निवेश करना चाहते थे।' उन्होंने कहा, 'जिन निवेशकों ने लंबी और लघु अवधि की रणनीति बनाई है और डेरिवेटिव में निवेश करना चाहते हैं लेकिन यह साबित नहीं कर सकते कि यह हेजिंग के उद्देश्य से किया गया है, उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा। इस प्रकार की रणनीतियां अब सक्रिय हो सकती हैं।' ओडीआई जारी करने वाले जिन एफपीआई ने अलग से पंजीकरण का विकल्प नहीं चुना है वे नकद इक्विटी अथवा डेट प्रतिभूतियों के साथ हेजिंग के जरिये केवल ओडीआई जारी करने में समर्थ होंगे। ऐसे एफपीआई को अब घोषणा करनी होगी कि ओडीआई की हेजिंग उनके प्रोपराइटरी डेरिवेटिव पोजीशन के लिए नहीं की गई है। ओडीआई एक तरह की प्रतिभूति है और विदेशी निवेशक सेबी में सीधे तौर पर पंजीकृत हुए बिना भारतीय प्रतिभूति बाजार में निवेश के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
 
सेबी ने साल 2017 में डेरिवेटिव की जगह इन प्रतिभूतियों को जारी करने पर पाबंदी लगा दी थी और केवल उन निवेशकों को ही इसके लिए अनुमति दी गई थी जो वन-टु-वन आधार पर इक्विटी पोजीशन की हेजिंग के लिए इसका इस्तेमाल करते हों। वन-टु-वन पोजीशन का मतलब उस डेरिवेटिव से है जिसमें इक्विटी शेयर की तरह समान अंतर्निहित हो। निफ्टी अथवा सेंसेक्स अथवा समान क्षेत्र के सूचकांक में शामिल शेयरों के खिलाफ ओडीआई की अनुमति नहीं दी गई थी। बाजार नियामक ने कहा था कि बिना हेजिंग वाली सभी मौजूदा पोजीशन को 2020 के अंत अथवा प्रतिभूति की परिपक्वता में से जो भी पहले हो, तक बराबर किया जाएगा।
 
सेबी ने भारत के डेरिवेटिव क्षेत्र में विदेशी निवेश को हतोत्साहित करने के लिए इस प्रकार की पाबंदी लगाई थी। ऐसे में पार्टिसिपेटरी नोट (पी-नोट) को बढ़ावा मिला और विदेशी निवेशकों को सेबी में सीधे तौर पर पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उदाहरण के लिए, काफी तादाद में हेज फंडों ने पी-नोट के जरिये निवेश करने के बजाय एफपीआई के तौर पर खुद को सेबी में पंजीकरण कराने का विकल्प चुना। इक्विटी, डेट एवं डेरिवेटिव पर पी-नोट्स का अनुमानित मूल्य 30 जून 2019 तक 81,013 करोड़ रुपये था जो पंजीकृत एफपीआई की परिसंपत्तियों का महज 2.4 फीसदी है। डेरिवेटिव्स पर पी-नोट्स का अनुमानित मूल्य घटकर 821 करोड़ रुपये रह गया जो जनवरी 2017 के 55,779 करोड़ रुपये के मुकाबले 98.5 फीसदी कम है।
 
मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, अंतर्निहित डेरिवेटिव्स वाले लेनदेन की अनुमति नहीं है। अंतर्निहित डेरिवेटिव्स के साथ पी-नोट्स जारी करने के लिए एफपीआई के अनुपालन अधिकारी द्वारा एक प्रमाण पत्र जारी करना होगा ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि जिस डेरिवेटिव पोजीशन पर पी-नोट जारी किया जा रहा है वह वन-टु-वन आधार पर उसके इक्विटी शेयरों के केवल हेजिंग के लिए है। पी-नोट्स की मासिक रिपोर्ट के साथ वह प्रमाण पत्र भेजना अनिवार्य होगा।
Keyword: SEBI, ODI, FPI,,
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