बिजनेस स्टैंडर्ड - कर कटौती के बावजूद दूसरी तिमाही में घटेगी कंपनियों की कमाई
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कर कटौती के बावजूद दूसरी तिमाही में घटेगी कंपनियों की कमाई

कृष्ण कांत / मुंबई 10 08, 2019

कमजोर राजस्व और बिक्री का असर

बिजनेस स्टैंडर्ड कर कटौती के बावजूद दूसरी तिमाही में घटेगी कंपनियों की कमाईचालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही कंपनियों की कमाई के लिहाज से सबसे निराशाजनक तिमाहियों में शामिल हो सकती है। शेयर बाजार में सक्रिय ब्रोकरेज कंपनियों के अनुमान तो जुलाई-सितंबर तिमाही के बारे में ऐसा ही कह रहे हैं। कॉर्पोरेट कर में कटौती की घोषणा से कंपनियों को फायदा पहुंचने की उम्मीद जगी थी, लेकिन कमजोर बिक्री और वाहन, ऊर्जा, धातु तथा खनन जैसे प्रमुख क्षेत्रों का कमजोर राजस्व सारी उम्मीदों पर पानी फेर सकता है। आशंका है कि दूसरी तिमाही में निफ्टी 50 कंपनियों की आय पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के मुकाबले 3.4 प्रतिशत तक कम रह सकती है। ऐसा हुआ तो पिछले तीन वर्षों में यह सबसे खराब तिमाही साबित होगी। इससे खराब तिमाही दिसंबर, 2018 वाली ही रही थी, जब टाटा मोटर्स के एकबारगी नुकसान ने सूचकांक की आय में 22.6 प्रतिशत की चपत लगा दी थी। राजस्व के मोर्चे पर अधिक डर सता रहा है क्योंकि सूचकांक की कंपनियों की संयुक्त शुद्ध बिक्री पिछले जुलाई-सितंबर के मुकाबले 1.4 प्रतिशत तक कम हो सकती है।

बैंक एवं वित्त और तेल एवं गैस कंपनियों को छोड़कर बाकी अग्रणी कंपनियों का प्रदर्शन और भी खराब रह सकता है। दूसरी तिमाही में इनके शुद्ध मुनाफे में सालाना आधार पर 10.1 प्रतिशत की कमी आने का अंदेशा है। वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही के टाटा मोटर्स के आंकड़े समायोजित कर लें तो दूसरी तिमाही पिछली 13 तिमाहियों में इन कंपनियों के सबसे खराब प्रदर्शन का गवाह बनेगा। सितंबर तिमाहियों में इन कंपनियों की संयुक्त शुद्ध बिक्री सालाना आधार पर 2.4 प्रतिशत तक कम हो सकती है। 

पिछले महीने सरकार ने अर्थव्यवस्था की सुस्ती भगाने के लिए कई उपायों की घोषणा की है, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार कंपनियों को तत्काल इनका कोई फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। प्रभुदास लीलाधर के अमनीश अग्रवाल और अमूल्य चानना ने दूसरी तिमाही के लिए अपने अनुमान में कहा है, 'सरकार ने जितने उपायों की घोषणा की हैं, उनमें कुछ ढांचागत हैं और इनका असर दिखने में समय लग सकता है। इसीलिए मीन पर तो मांग में किसी तरह की तेजी नहीं दिख रही है।'

इसी तरह ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के धीरेंद्र तिवारी और पंकज छावछडिय़ा ने कहा कि निवेश और उपभोग के संकेतक पिछले 6 से 9 महीने में अर्थव्यवस्था पर सुस्ती छाने के संकेत दे रहे हैं। उनके अनुसार मांग में कमी और जिंसों की कमाई पर चोट पडऩे से निफ्टी 50 कंपनियों की आय के अनुमान में कमी आ सकती है। ऐंटीक के अनुसार निफ्टी कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 2.1 प्रतिशत कमी आ सकती है और सूचकांक में शामिल कंपनियों (वित्तीय कंपनियों को छोड़कर) का मुनाफा 12.8 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

दूसरी तिमाही का यह विश्लेषण शेयर ब्रोकरेज कंपनियों एडलवाइस सिक्योरिटीज, कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज, प्रभुदास लीलाधर, इलारा कैपिटल, ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग और नरनोलिया फाइनैंशियल एडवाइजर्स के जुलाई-सितंबर 2019 के आय अनुमानों पर आधारित है। अनुमानों के अनुसार वाहन और धातु कंपनियों के राजस्व और मुनाफे में कमी आ सकती है, जबकि निजी क्षेत्र के बैंक और एनबीएफसी सहित खुदरा कर्जदाता और दवा कंपनियों का प्रदर्शन शानदार रह सकता है।

बैंक, एनबीएफसी सहित खुदरा ऋणदाताओं की तुलना में एफएमसीजी कंपनियों जैसे आईटीसी, हिंदुसतान यूनिलीवर और ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) और इन्फोसिस जैसी आईटी कंपनियों का प्रदर्शन मध्यम दायरे में रह सकता है। कुछ ब्रोकरेज कंपनियों का विश्लेषण कर पूर्व लाभ में बदलावों पर आधारित है क्योंकि पिछले महीने कॉर्पोरेट कर में कटौती के बाद सालाना आधार पर करोपरांत मुनाफे की तुलना करना मुश्किल हो गया है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने भी दूसरी तिमाही में आय में कमी का अनुमान व्यक्त किया है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के संजीव प्रसाद, सुनीता बलदावा और अनिंद्य भौमिक का कहना है, 'केआईई ने जिन कंपनियों पर नजर रखी है उनके कर पूर्व मुनाफे में सालाना आधार पर दूसरी तिमाही में 4.6 प्रतिशत की कमी आ सकती है।' केआईई के अनुसार पिछले महीने कॉर्पोरेट कर में कटौती और इसके बाद कर आंकड़ों में बदलाव के कारण वित्त वर्ष 2020 के शुद्ध लाभ की तुलना वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही और वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही से नहीं की जा सकती।
Keyword: corporate tax, company, profit, share market,,
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