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एचडीआईएल से वसूली में कानूनी अवरोध का सामना कर रहा है बैंक

देव चटर्जी / मुंबई October 08, 2019

एचडीआईएल को जिन सार्वजनिक बैंकों ने कर्ज दिया है वह अपना बकाया वसूलने में लंबी कानूनी  लड़ाई का सामना करेगा क्योंकि रियल एस्टेट डेवलपर व प्रवर्तकों की तरफ से गिरवी रखी कई संपत्तियों को जांच एजेंसियों ने जब्त कर लिया है। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में जिन सार्वजनिक बैंकों ने एचडीआईएल के साथ एकमुश्त भुगतान (ओटीएस) करार पर हस्ताक्षर किए हैं उन्हें कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ सकता है, अगर ओटीएस की रकम पंजाब ऐंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक की तरफ से लिए कर्ज के जरिए चुकाया गया हो। पीएमसी बैंक के इन कर्जों को प्रवर्तन निदेशालय धनशोधन निरोधक अधिनियम के तहत अपराध के जरिए मिली रकम मानेगा और इस तरह से कानूनी लड़ाई का सामना करना होगा। यह मानना है वकीलों का।
 
एनसीएलटी के मुंबई पीठ में दिवालिया कार्यवाही का सामना कर रही एचडीआईएल को कई लेनदारों से एकमुश्त भुगतान के प्रस्ताव मिले थे, जिनमें बैंक ऑफ इंडिया, जम्मू ऐंड कश्मीर बैंक और आन्ध्रा बैंक शामिल है। एनसीएलएटी को सौंपी योजना के मुताबिक, एचडीआईएल ने बैंक ऑफ इंडिया के बकाए का एक हिस्सा अगस्त के आखिरी हफ्ते में पीएमसी बैंक की तरफ से जारी पे ऑर्डर के जरिए चुकाया था। लेकिन कुछ हफ्तों के भीतर पीएमसी बैंक इस खबर के बाद धराशायी हो गया कि सहकारी बैंक ने एचडीआईएल को धोखाधड़ी के जरिए 4,500 करोड़ रुपया कर्ज दिया।पीएसयू बैंकों की तरफ से दिए गए सभी कर्ज को राकेश वधावन और सारंग बधावन ने गारंटी दी है, जो कंपनी के प्रवर्तक हैं और अभी पुलिस की हिरासत में हैं।
 
वकीलों ने कहा, प्रवर्तन निदेशालय एचडीआईएल की संपत्तियां जब्त करने की प्रक्रिया में है। चूंकि इन संपत्तियों में से कई पीएसयू बैंकों के पास गिरवी हैं, लिहाजा लेनदारोंं को इन संपत्तियों का नियंत्रण हासिल करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा। एक वकील ने कहा, यह कानूनी संघर्ष बनने जा रहा है। पीएसबी ने कंपनी को 2,000 करोड़ रुपये उधार दिए हैं और उसे एचडीआईएल के खाते को धोखाधड़ी वाले खाते के तौर पर वर्गीकृत करना होगा और अगर उन्होंने विगत में एकमुश्त भुगतान स्वीकार किया है तो वह रकम उसे वापस करनी होगी।
 
एक वकील ने कहा, स्टर्लिंग बायोटेक के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने यह रुख अपनाया था कि प्रवर्तकों की तरफ से दी जाने वाली एकमुश्त रकम को अपराध की रकम मानी जाएगी और उसे जब्त किया जाएगा। एनसीएलटी के मुंबई पीठ ने स्टर्लिंग बायोटेक के प्रवर्तकों की एकमुश्त भुगतान की पेशकश को मंजूरी नहीं दी और कंपनी को परिसमापन में भेज दिया। एनसीएलएटी ने हालांकि कहा कि स्टर्लिंग बायोटेक के प्रवर्तक बैंकों के पास ओटीएस के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वे बैंक के कर्ज को चुकाने में साफ-सुथरी रकम दे। यह मामला अभी लंबित है। 
 
एचडीआईएल के मामले में एनसीएलएटी ने राकेश वधावन की अपील पर लेनदारों की समिति के गठन पर रोक लगा दी, जिसने फर्म के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने के एनसीएलटी मुंबई पीठ के आदेश को चुनौती दी थी। एनसीएलएटी इस मामले की दोबारा सुनवाई 13 नवंबर को करेगा।
Keyword: HDIL, bank, loan,,
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