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वाहन बिक्री में कमी से वेदांत के प्रदर्शन पर असर नहीं

जयजित दास /  October 08, 2019

एल्युमीनियम उत्पादकों को पेश आ रही मुश्किलों के बीच वेदांत परिचालन लागत कम करने और मूल्य वद्र्धित उत्पादों को आगे बढ़ाने पर जो दे रही है। कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी (एल्युमीनियम ऐंड पावर) अजय कपूर ने कहा कि मध्यम अवधि में कंपनी एल्युमीनियम उत्पादन की लागत कम कर 1,500 डॉलर करना चाहती है। जयजित दास ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर बात की। पेश हैं संपादित अंश: 

 
वेदांत ने एल्युमीनियम उत्पादन लागत प्रति टन 1,500 डॉलर तक करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी कब और कैसे यह लक्ष्य हासिल करेगी?
 
उत्पादन लागत 1,500 डॉलर तक सीमित करना हमारा मध्यम अवधि का लक्ष्य है, साथ ही हमने चालू वित्त वर्ष के लिए यह आंकड़ा 1,723 से 1,775 डॉलर तक रहने का अनुमान लगाया है और हम इसे हासिल करने की राह पर हैं। एल्युमीनियम उद्योग में लागत मुख्य रूप से कच्चे माल-एलुमिना, बॉक्साइट और कोयला- की कीमतों पर निर्भर करती है। हम लागत में कमी लाने के लिए परिचालन क्षमता बढ़ाने और लागत नियंत्रित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए हमने वैश्विक एवं घरेलू आपूर्तिकर्ताओं के साथ बॉक्साइट के लिए दीर्घ अवधि का समझौता किया है। ओडिशा के लांझीगढ़ में हमारी विश्व स्तरीय रिफाइनरी में बॉक्साइट एलुमिना में तब्दील होता है और इससे भी लागत नियंत्रित करने में मदद कर रही है। 
 
लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर एल्युमीनियम कीमतें करीब 1,700 डॉलर हैं। घरेलू उत्पादकों के लिए इसके क्या मायने हैं? क्या आपको लगता है कि निकट अवधि में वैश्विक स्तर पर एल्युमीनियम की कीमतों में तेजी आएगी?
 
पिछली कुछ तिमाहियों से वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के चंगुल में फंस गई है। एलएमई कीमतों पर इन बातों का असर होता है। हरेक जिंस की तरह हमें एलएमई में भी सुधार आने की उम्मीद है। दुनिया में एल्युमीनियम दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण धातु है और अहम क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल होता है। इस नजरिये से आने वाले समय में एल्युमीनियम की मांग में बढ़ोतरी होगी।
 
भारत में एल्युमीनियम की मांग में कमी आई है। वेदांत इससे निपटने के लिए क्या करेगी? 
 
एल्युमीनियम देश के रणनीतिक हित के लिहाज से अहम है और राष्ट्र निर्माण में इसकी खासी भूमिका है। वर्ष 2018-19 में भारत में एल्युमीनियम की मांग 10 प्रतिशत रफ्तार से बढ़ी थी। फिलहाल अर्थव्यस्था कुछ चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन एल्युमीनियम कारोबारी दीर्घ अवधि को ध्यान में रखकर आगे चलते हैं और इस वजह से हम मौजूदा चुनौतियों से निपटने में सक्षम होंगे। भारत 5 लाख डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है और इस प्रक्रिया में एल्युमीनियम की खपत बढऩी तय है। फिलहाल भारत में एल्युमीनियम की प्रति व्यक्ति खपत महज 2.5 किलोग्राम है, जबकि वैश्स्ति स्तर पर यह औसत 11 किलोग्राम और चीन में 24 किलोग्राम है। हालांकि अगले पांच वर्षों के दौरान भारत में एल्युमीनियम की मांग बढ़कर 70 लाख टन से अधिक हो जाएगी। वेदांत आगे एल्युमीनियम की मांग से निपटने के लिए नए उत्पादों के विकास पर जोर देगी और नवोन्नयन को बढ़ावा देगी। वेदांत ने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के विकास के लिए निवेश किया है। 
 
क्या वाहन क्षेत्र में मंदी और देश की कमजोर आर्थिक वृद्धि दर से वेदांत की बिक्री पर असर पड़ा है?
 
भारत में पिछले कुछ महीनों से वाहन क्षेत्र मुश्किल दौर से गुजर रहा है, लेकिन आम तौर पर वाहन कंपनियां अपनी सहायक इकाइयों के माध्यमों से दीर्घ अवधि के लिए अनुबंध करती हैं। भारत में वेदांत का वाहन क्षेत्र के साथ सीमित कारोबार है, इसलिए वेदांत की बिक्री और प्रदर्शन पर कोई असर नहीं हुआ है।
 
एल्युमीनियम में फ्लैट रॉल्ड उत्पाद का बाजार बढ़ रहा है। क्या वेदांत इस खंड में उतरने के बारे में सोच रही है? 
 
एल्युमीनियम फ्लैट रॉल्ड उत्पाद का इस्तेमाल किसी अर्थव्यवस्था की दक्षता को दर्शाते हैं। भारत में इन उत्पादों का सीमित बाजार रहा है, लेकिन अब इसका विस्तार हो रहा है। हमारी अर्थव्यवस्था के मजबूत होने के साथ ही देश में फ्लैट रॉल्ड उत्पादों की खपत भी बढ़ेगी। 
 
सस्ते एल्युमीनियम की आवक बढऩे और आरसीईपी की मौजूदा चर्चाओं से एल्युमीनियम कंपनियों की हालत खराब हो गई है। शुल्क संरचना पर सरकार से आपको कोई आश्वासन मिला है?
 
इस साल क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) बैठक से पहले एल्युमीनियम उत्पादकों ने इस उद्योग को सस्ते आयात से सुरक्षा देने की वाणिज्य मंत्रालय से गुहार लगाई थी। उन्होंने सरकार से एल्युमीनियम को शुल्क में कमी पर होने वाली बातचीत से अलग रखने की मांग की थी। यह उद्योग बुनियादी तौर पर मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर पुनर्विचार करने का आग्रह कर रहा है ताकि भारत में सस्ते एल्युमीनियम के आयात पर अंकुश लग सके। सरकार ने हमें भविष्य में इन मुद्दों पर विचार करने का आश्वासन दिया है।  
 
वेदांत सर्वाधिक उत्पादन करने के साथ इस उद्योग में अग्रणी हो गई है। कंपनी अपनी इस हैसियत का किस तरह लाभ उठाएगी और आगे क्या रणनीति है?
 
वेदांत देश में एल्युमीनियम का सर्वाधिक उत्पादन करता है। वित्त वर्ष 2019 में वेदांत एल्युमीनियम ने 19.5 लाख टन उत्पादन किया था और इस तरह सालाना आधार पर इसने 17 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की थी। इस उपलब्धि के साथ ही वेदांत सरकार की एक विश्वसनीय साझेदार बनने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ गई है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सरकार को सहयोग देना हमारी शीर्ष कारोबारी प्राथमिकता है। हम भारत के घरेलू एल्युमीनियम क्षेत्र का निर्माण करना चाहते हैं और इसे दुनिया के अग्रणी देशों में शुमार करना चाहते हैं। 
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